PDA बयान पर घिरे अखिलेश यादव, डिप्टी CM ब्रजेश-केशव ने दिया करारा जवाब

Published on 6 अग॰ 2026

जनेश्वर मिश्र की जयंती पर बुधवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के भाषण के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. अखिलेश के बयान पर योगी सरकार के दोनों उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने जोरदार पलटवार करते हुए समाजवादी पार्टी पर तुष्टिकरण, वोट बैंक की राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया. दोनों नेताओं ने PDA से लेकर राम मंदिर तक कई मुद्दों पर सपा को घेरा.

'सपा को ब्राह्मण सम्मेलन से नहीं, सिर्फ वोट बैंक से मतलब'

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी का ब्राह्मण समाज से कोई सरोकार नहीं है. ब्राह्मण सम्मेलन और सामाजिक न्याय की बातें केवल दिखावे के लिए की जा रही हैं. उनका असली उद्देश्य केवल वोट बैंक की राजनीति करना है. उन्होंने कहा, 'समाजवादी पार्टी आज खुद अपने PDA फार्मूले को लेकर भ्रमित है. कभी अगड़ों को अगड़ा बताती है, कभी उन्हें अल्पसंख्यक बताने लगती है. कभी कोई नया सामाजिक फार्मूला लेकर आती है, तो कभी कोई और. यह सब केवल वोटों की राजनीति के लिए किया जा रहा है.'

ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि सपा जब भी सत्ता में आई, उसने विकास के बजाय गुंडई और अराजकता को बढ़ावा दिया. उन्होंने कहा कि सपा की राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों पर नहीं, बल्कि तुष्टिकरण और जातीय समीकरणों पर आधारित है.

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'सदन में कुछ, बाहर कुछ... यही सपा का दोहरा चरित्र'

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी लोकतंत्र की बात तो करती है, लेकिन उसका आचरण बिल्कुल उल्टा है. उन्होंने कहा, 'विपक्ष का दोहरा चरित्र सामने आ चुका है. अखिलेश यादव प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने में लगे हैं.

जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय वे केवल राजनीतिक विवाद खड़े करना चाहते हैं. सदन के अंदर कुछ बोलते हैं और बाहर आकर कुछ और कहते हैं.' उन्होंने कहा कि विपक्ष को जनता के मुद्दों पर बहस करनी चाहिए, लेकिन समाजवादी पार्टी केवल राजनीतिक नौटंकी में लगी हुई है.

'राम मंदिर पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं'

केशव प्रसाद मौर्य ने राम मंदिर के मुद्दे पर भी समाजवादी पार्टी को घेरा. उन्होंने कहा कि जो लोग वर्षों तक राम मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे, संतों का अपमान करते रहे और रामभक्तों पर गोली चलाने वाली राजनीति का हिस्सा रहे, उन्हें आज राम मंदिर पर बयान देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. यह चोरी भी और सीनाजोरी भी वाली राजनीति है. यह बिल्कुल वैसा है जैसे सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली.

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