पर्सनल लोन की एक ईएमआई मिस होने पर लेट फीस और अतिरिक्त ब्याज लग सकता है। भुगतान में देरी से क्रेडिट हिस्ट्री प्रभावित हो सकती है। समय पर बकाया चुकाना और बैंक से संपर्क रखना जरूरी है।
personal loan emi bounce
- Published: 09 Aug 2026, 10:10 PM IST
- Last Updated: 09 Aug 2026, 09:28 PM IST
पर्सनल लोन की एक EMI समय पर नहीं भर पाना हमेशा बड़ी वित्तीय परेशानी का संकेत नहीं होता। कभी सैलरी देर से आती है, बिजनेस पेमेंट अटक जाता है या बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने से ऑटो-डेबिट फेल हो जाता है। लेकिन यह सोचकर कि एक EMI ही तो है, अगले महीने दे देंगे, इसे टालना महंगा पड़ सकता है।
सबसे पहले जेब पर पड़ेगा असर
ईएमआई की तय तारीख निकलने के बाद बैंक या एनबीएफसी लोन एग्रीमेंट के मुताबिक लेट फीस, पेनल चार्ज या अतिरिक्त ब्याज वसूल सकता है। इसकी रकम अलग-अलग संस्थानों और लोन की शर्तों पर निर्भर करती है। शुरुआत में यह रकम छोटी लग सकती है, लेकिन भुगतान में ज्यादा देरी होने पर बकाया बढ़ता जाता है।
क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ सकता है असर
ईएमआई भुगतान की जानकारी नियमित रूप से क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को भेजी जाती है। अगर बकाया EMI लंबे समय तक जमा नहीं होती और इसकी रिपोर्टिंग होती है, तो इसका असर आपके क्रेडिट इतिहास पर पड़ सकता है।
इसका नुकसान आगे तब दिख सकता है, जब आप नया पर्सनल लोन, होम लोन या क्रेडिट कार्ड लेने के लिए आवेदन करें। लगातार समय पर EMI चुकाने से क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होती है, जबकि भुगतान में देरी इसका उल्टा असर डाल सकती है।
बैंक के कॉल और मैसेज आ सकते हैं
ईएमआई मिस होने के बाद बैंक या एनबीएफसी की ओर से कॉल, SMS या दूसरे रिमाइंडर आना सामान्य प्रक्रिया है। अगर भुगतान किसी अस्थायी वित्तीय परेशानी की वजह से रुका है तो लेंडर से बात करना बेहतर है। समस्या छिपाने या कॉल से बचने के बजाय स्थिति स्पष्ट करने से समाधान निकालना आसान हो सकता है।
एक EMI को अगली किस्त तक न खींचें
अगर पहली बकाया EMI अगले महीने तक नहीं चुकाई गई तो दूसरी EMI भी देय हो जाएगी। ऐसे में दो किस्तों का बोझ एक साथ आ सकता है और धीरे-धीरे बकाया बढ़ने लगेगा। इसलिए मिस हुई EMI को जल्द से जल्द चुकाना बेहतर है।
ऑटो-डेबिट फेल होने की वजह भी जांचें
हर बार EMI मिस होने का कारण पैसों की कमी नहीं होता। ई-मैंडेट एक्सपायर होना, तकनीकी समस्या या ऑटो-डेबिट के समय खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होना भी इसकी वजह हो सकती है। ऐसे में बैंक खाते की जांच करें और जरूरत पड़ने पर लेंडर से संपर्क करें।
इमरजेंसी फंड से बच सकती है परेशानी
मेडिकल खर्च, नौकरी में बदलाव या बिजनेस पेमेंट में देरी जैसी परिस्थितियां अचानक बजट बिगाड़ सकती हैं। ऐसे समय कुछ महीनों की EMI के बराबर इमरजेंसी फंड मददगार हो सकता है।
एक EMI मिस होना वित्तीय संकट नहीं है, लेकिन उसे नजरअंदाज करना समस्या बढ़ा सकता है। बकाया रकम जल्द चुकाएं और बैंक के संपर्क में रहें।
(प्रियंका कुमारी)