Pitru Paksha Shradh Dates 2026: पितृपक्ष में पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। जानें पूर्णिमा श्राद्ध से सर्वपितृ अमावस्या तक की पूरी लिस्ट।
26 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष
- Published: 09 Aug 2026, 04:03 PM IST
- Last Updated: 09 Aug 2026, 04:03 PM IST
Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृपक्ष यानी श्राद्ध पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इन दिनों परिवार के दिवंगत सदस्यों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे पितृ कर्म किए जाते हैं।
पंचांग के अनुसार, पितृपक्ष 2026 की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार से होगी। इस दिन पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ नियमित श्राद्ध तिथियों का क्रम शुरू होगा।
पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। परंपरा के अनुसार जिस तिथि को किसी पूर्वज का निधन हुआ था, पितृपक्ष में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है।
26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध
पितृपक्ष की शुरुआत पूर्णिमा श्राद्ध से होगी। पूर्णिमा तिथि पर जिन पूर्वजों का निधन हुआ था, उनके लिए इस दिन श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। इसके बाद 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ मृत्यु तिथि के आधार पर पितृ कर्मों का क्रम आगे बढ़ेगा।
29 सितंबर को महाभरणी श्राद्ध
29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध के साथ महाभरणी श्राद्ध भी होगा। भरणी नक्षत्र से जुड़े होने के कारण पितृ कर्म की परंपरा में इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है।
30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों का श्राद्ध होगा। जिस पूर्वज की मृत्यु संबंधित तिथि को हुई है, उनके लिए उसी तिथि पर श्राद्ध किया जाता है।
4 अक्टूबर को मातृ नवमी
4 अक्टूबर को नवमी श्राद्ध होगा। कई परंपराओं में इस दिन को मातृ नवमी के रूप में भी विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन दिवंगत माता, दादी, नानी या परिवार की अन्य महिला सदस्यों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है।
7 अक्टूबर को द्वादशी और मघा श्राद्ध
7 अक्टूबर को द्वादशी श्राद्ध के साथ मघा श्राद्ध भी होगा। धार्मिक मान्यता में मघा नक्षत्र का संबंध पितरों से माना जाता है, इसलिए इस दिन किए जाने वाले पितृ कर्म को विशेष माना जाता है।
9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध
9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध किया जाएगा। इस तिथि पर उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन चतुर्दशी को हुआ था। धार्मिक परंपराओं में असामान्य या अकाल मृत्यु से जुड़े पितृ कर्म का संबंध भी चतुर्दशी से बताया जाता है।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
पितृपक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या होगा। यह दिन उन सभी पितरों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी वजह से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका। कई परिवार इस दिन अपने सभी दिवंगत पूर्वजों का सामूहिक रूप से श्राद्ध और तर्पण करते हैं।
किस तिथि पर करें पूर्वजों का श्राद्ध?
पितृपक्ष में श्राद्ध की सबसे अहम बात पूर्वज की मृत्यु तिथि होती है। सामान्य धार्मिक परंपरा के अनुसार जिस तिथि को व्यक्ति का निधन हुआ था, पितृपक्ष में उसी तिथि पर उसका श्राद्ध किया जाता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी पूर्वज का निधन द्वितीया तिथि को हुआ था, तो पितृपक्ष की द्वितीया तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाएगा। इसी तरह तृतीया, चतुर्थी, पंचमी या अन्य तिथियों के लिए भी यही परंपरा अपनाई जाती है। अगर मृत्यु तिथि मालूम नहीं है या निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया, तो सर्वपितृ अमावस्या को पितृ कर्म करने की परंपरा है।