Bharat Rajya Website: PM मोदी ने 'मन की बात' में कृष्ण शेषाद्रि की AI से बनी हिस्टोरिकल एटलस वेबसाइट 'भारतराज्य' का ज़िक्र किया। मुंबई के रहने वाले शेषाद्रि को कोडिंग नहीं आती, लेकिन उन्होंने जेनरेटिव AI की मदद से ये इंटरैक्टिव मैप बनाया ताकि भारतीय इतिहास को आसानी से और दिलचस्प तरीके से समझा जा सके।
Bharat Rajya Historical Atlas: जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार सुबह अपने रेडियो प्रोग्राम 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में भारतराज्य (www.bharatrajya.com) वेबसाइट का ज़िक्र किया, तो पूरे देश का ध्यान भारत के इतिहास को आसान बनाने वाली एक गज़ब की कोशिश पर गया। यह एक इंटरैक्टिव हिस्टोरिकल एटलस है, जिसमें यूज़र्स टाइमलाइन स्लाइडर को आठ सदियों तक ड्रैग करके देख सकते हैं कि भारत के हर ज़िले पर किसका शासन था। लेकिन इस वेबसाइट के पीछे की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है। इसे बनाने वाले कृष्ण शेषाद्रि खुद को 'बिलो एवरेज ड्यूड' यानी एक साधारण इंसान बताते हैं, जिनका 15 साल पुराना सपना कोडिंग स्किल से नहीं, बल्कि जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पूरा हुआ। मुंबई के रहने वाले कृष्ण शेषाद्रि लंबे समय से भारत में इतिहास पढ़ाने के तरीके से निराश थे। वह अपनी वेबसाइट पर लिखते हैं, "इतिहास को कहानियों की तरह पढ़ाएं, तो लोग इसे ज़िंदगी भर याद रखते हैं। इसे तारीखों और घटनाओं की लिस्ट बना दें, तो लोग सवाल करने लगते हैं कि यह विषय है ही क्यों।"
ANI से खास बातचीत में शेषाद्रि ने बताया कि 'मन की बात' में उनके प्रोजेक्ट का ज़िक्र होना किसी सपने जैसा है। उन्होंने कहा, "सच कहूं तो मुझे अभी तक यकीन नहीं हो रहा है, एड्रेनालाईन अभी भी हाई है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक छोटा-सा हॉबी प्रोजेक्ट इतना बड़ा बन सकता है। मैं सभी का और खासकर प्रधानमंत्री का बहुत आभारी हूं कि उन्होंने इस छोटे से प्रोजेक्ट पर ध्यान दिया, इसे समझा और 'मन की बात' में इसकी चर्चा की।"
उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि PM मोदी ने असल में वेबसाइट को एक्सप्लोर किया। शेषाद्रि ने कहा कि यह उनके लिए "सबसे बड़ी पहचान" है, जो एक ऐसे लीडर से मिली है जो भारतीय इतिहास, संस्कृति और जीवन शैली से गहराई से जुड़े हैं। "इस पूरी बातचीत की सबसे खूबसूरत बात यह थी कि PM मोदी जी ने सिर्फ़ वेबसाइट के बारे में बात नहीं की, बल्कि उन्होंने इसे असल में एक्सप्लोर किया। उन्होंने स्क्रॉल किया, अलग-अलग साम्राज्यों और हमारे बनाए फीचर्स को देखा, करेक्शन बॉक्स पर भी ध्यान दिया। मेरे जैसे इंसान के लिए, जिसने इसे सिर्फ़ एक हॉबी के तौर पर किया, मोदी जी जैसे व्यक्ति से तारीफ मिलना मेरे प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ा सम्मान है।"
इतिहास की पढ़ाई का तरीका बदलने का मिशन
शेषाद्रि ने बताया कि भारत में इतिहास को पारंपरिक रूप से एक समय में एक साम्राज्य या क्षेत्र के नज़रिए से पढ़ाया गया है, जिससे पूरे भारत की तस्वीर कभी साफ नहीं हो पाती। वह सवाल उठाते हैं, "हमें कभी नहीं बताया गया कि मुग़ल साम्राज्य के साथ-साथ और कौन मौजूद था? जब मुहम्मद गोरी ने हमला किया, तब बाकी जगहों पर किसका राज था? जिस दिन वास्को डी गामा कालीकट पहुंचा, उस दिन नॉर्थ ईस्ट में कौन शासन कर रहा था?"
पिनकोड से प्रोग्रामिंग तक, AI ने दिखाया रास्ता
शेषाद्रि के दिमाग में 15 साल से ज़्यादा समय से ऐतिहासिक डेटा का नक्शा तो था, लेकिन उनके पास एक फंक्शनल वेबसाइट बनाने की प्रोग्रामिंग स्किल नहीं थी। यह कमी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल, खासकर एंथ्रोपिक के AI असिस्टेंट 'क्लॉड' (Claude) ने पूरी कर दी। इतिहास के शौकीन शेषाद्रि कहते हैं, "मेरे पास इसे हकीकत में बदलने की तकनीकी स्किल नहीं थी। फिर क्लॉड आया। डारियो अमोदेई और एंथ्रोपिक के जीनियस लोगों का शुक्रिया - लाइन दर लाइन, प्रॉम्प्ट दर प्रॉम्प्ट और अनगिनत डीबगिंग सेशन के बाद - पंद्रह साल पुराना एक आइडिया आखिरकार कुछ ऐसा बन गया जिसे आप ब्राउज़र में खोल सकते हैं।"
इस साइट को बनाने से पहले प्रोग्रामिंग के साथ अपने रिश्ते के बारे में बताते हुए शेषाद्रि कहते हैं, "एक ऐसा आदमी, जिसका कोड से सिर्फ़ इतना वास्ता था कि उसके घर का पिनकोड क्या है, वो भी ऐसी चीज़ बना सका, तो इन महान लोगों की वजह से। मेरा एक अधूरा सपना पूरा करने के लिए शुक्रिया।"
यह कोई किताब नहीं, एक्सप्लोर करने का कैनवस है
शेषाद्रि इस बात पर ज़ोर देते हैं कि 'भारतराज्य' को एक अकादमिक किताब की तरह नहीं, बल्कि एक एक्सप्लोर करने वाले कैनवस के रूप में डिज़ाइन किया गया है। वह साइट पर लिखते हैं, "'भारतराज्य' को किसी एयर कंडीशन कमरे में बैठे, ट्वीड जैकेट पहने इतिहासकारों की कमेटी ने नहीं बनाया है। इसे एक साधारण लड़के ने काम के बाद और वीकेंड पर, चाय और जंक फूड के सहारे बनाया है, जिसे अपने इतिहास से प्यार था और वह इसे एक्सप्लोरेबल बनाना चाहता था।"
यह इंटरैक्टिव एटलस फिलहाल 800 से ज़्यादा सालों (700 ईस्वी से लेकर आधुनिक समय तक) में फैले लगभग 1000 ज़िलों को कवर करता है। इसे ओपन-सोर्स एजुकेशनल भावना के साथ बनाया गया है और प्लेटफॉर्म का मैपिंग डेटा क्रिएटिव कॉमन्स ज़ीरो (CC0) लाइसेंस के तहत जारी किया गया है, ताकि छात्र, शिक्षक और रिसर्चर मैप लेआउट का मुफ़्त में इस्तेमाल कर सकें।
'यह सब कैसे हुआ?': PM मोदी की शेषाद्रि से बातचीत
आषाढ़ी एकादशी के आसपास इस प्रोजेक्ट ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान खींचा, जिसके बाद उन्होंने शेषाद्रि से सीधे फोन पर बात की और 'मन की बात' में देश के साथ इस पहल को साझा किया। PM ने अपने कार्यक्रम में कहा, "कुछ समय पहले किसी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'आषाढ़ी एकादशी के शुभ अवसर पर, मुझे इतिहास को रोचक बनाने की अपनी पहल शुरू करने की खुशी है।' उन्होंने आगे बताया कि आइडिया बहुत सरल है: वेबसाइट पर जाएं और कोई भी साल चुनें। वहां आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि उस समय भारत के किस हिस्से पर किस शासक का शासन था। मुझे यह काफी दिलचस्प लगा और मैंने इसके बारे में और जानने की सोची। मुझे पता चला कि यह काम मुंबई के रहने वाले श्रीमान कृष्ण शेषाद्रि ने किया है।"
PM मोदी ने शेषाद्रि से अपनी बातचीत की शुरुआत यह पूछकर की, "दोस्त, मुझे पता चला कि आप न तो टेक की दुनिया से हैं और न ही इतिहास के टीचर; फिर भी आपने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इतिहास को समर्पित एक वेबसाइट बना दी। मैं बहुत उत्सुक हूं - यह सब कैसे हुआ?"
मुंबई के इस क्रिएटर ने बताया कि वह एक इंजीनियर हैं जिन्होंने MBA किया और मार्केटिंग के क्षेत्र में आ गए। शेषाद्रि ने PM को बताया, "हालांकि, इस सब के दौरान, इतिहास में मेरी गहरी रुचि बनी रही - जो बचपन से थी। इसलिए, मैं हमेशा इतिहास पर कुछ करना चाहता था - इसे कैसे दिलचस्प बनाया जाए और मुझे लगा कि हम जिस तरह से इतिहास पढ़ाते हैं उसमें सुधार और बदलाव की बहुत गुंजाइश है... हम इतिहास को एक कहानी के रूप में लोगों तक पहुंचा सकते हैं।"
भारत के 'अनदेखे' साम्राज्यों पर रोशनी
PM के पूछने पर शेषाद्रि ने कहा कि हमारे स्कूलों और कॉलेजों में भारतीय इतिहास को अक्सर एक ही साम्राज्य के नज़रिए से पढ़ाया जाता है, जिससे उन खास साम्राज्यों पर बहुत ज़्यादा ध्यान दिया जाता है। "नतीजतन, हम कई अन्य महान साम्राज्यों से अनजान रहते हैं - जैसे चोल, पल्लव, कश्मीर का कार्कोट राजवंश, या अहोम, जिन्होंने असम में कम से कम 600 वर्षों तक अपनी संस्कृति और मूल्य प्रणाली को संरक्षित रखा। इसलिए, मैंने एक ऐसी साइट बनाने का फैसला किया जो लोगों को इन महान साम्राज्यों से परिचित कराए।"
उन्होंने आगे कहा कि अगर उन्हें भारतीय इतिहास के किन्हीं तीन किरदारों से बात करने का मौका मिले, तो वह राजराज चोल या राजेंद्र चोल को चुनेंगे - जो चोल साम्राज्य के सबसे शक्तिशाली राजाओं में से एक थे, हेमू - "एक सैन्य जीनियस जिन्होंने अपने करियर में 23 लड़ाइयां लड़ीं और उनमें से 22 जीतीं" और त्रिभुवन महादेवी नाम की एक महिला, जिनकी कहानी ओडिशा के भौमकर राजवंश से जुड़ी है।
प्रसारण के दौरान, PM मोदी ने शेषाद्रि से इतिहास और टेक्नोलॉजी के अलावा उनकी अन्य रुचियों के बारे में पूछा। शेषाद्रि ने जवाब दिया, "मैं एक बोरिंग किस्म का इंसान हूं जो इतिहास और टेक्नोलॉजी में ही डूबा रहता है," इस जवाब पर प्रधानमंत्री हंस पड़े और उनकी लगन की तारीफ करते हुए उन्हें सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।