PM Modi Birthday Special: 12 साल में कितना बदला भारत? Economy, UPI से Global Power तक
Published: Thursday, September 17, 2026, 13:29 [IST]
आज 17 सितंबर है और आज ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। इसी मौके पर पिछले करीब 12 वर्षों के दौरान भारत में आए बदलावों को देखने की कोशिश की जा सकती है। मई 2014 में नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। तब से अब तक देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था, डिजिटल व्यवस्था, सरकारी योजनाओं की पहुंच और दुनिया में भारत की भूमिका से जुड़े कई क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिले हैं। इन बदलावों में सरकार की नीतियों के साथ-साथ वैश्विक परिस्थितियों का भी योगदान रहा है।

2014 के बाद सरकार का एक बड़ा फोकस सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने पर रहा। जन धन योजना के जरिए करोड़ों बैंक खाते खोले गए और आधार तथा मोबाइल के साथ बैंकिंग व्यवस्था को जोड़कर Direct Benefit Transfer यानी DBT का विस्तार किया गया। इसका मकसद सरकारी सहायता को सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते तक पहुंचाना था। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत पात्र किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था भी इसी दौर में शुरू हुई।
राशन की व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू-
कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने मुफ्त राशन की व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू किया। करोड़ों लाभार्थियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का इस्तेमाल किया गया। महामारी के दौरान वैक्सीन और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती रहीं। भारत में कोविड वैक्सीन का उत्पादन हुआ और देश के भीतर टीकाकरण अभियान चलाने के साथ दूसरे देशों को भी वैक्सीन की आपूर्ति की गई। हालांकि, महामारी के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों पर पड़े असर को लेकर अलग-अलग आकलन भी सामने आए।
गरीब परिवारों की महिलाओं को LPG कनेक्शन-
महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर भी इस अवधि में जोर बढ़ा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बड़े पैमाने पर शौचालयों का निर्माण हुआ। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के जरिए गरीब परिवारों की महिलाओं को LPG कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों, लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसे कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। सरकार के अनुसार इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ लाभार्थी के तौर पर नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदार बनाना है।
UPI और डिजिटल पेमेंट का विस्तार-
देश में भुगतान के तरीके में भी बड़ा बदलाव आया। UPI और डिजिटल पेमेंट के विस्तार ने छोटे-बड़े कारोबार में ऑनलाइन भुगतान को सामान्य बना दिया। मोबाइल फोन के जरिए कुछ सेकंड में भुगतान करने की सुविधा शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ी। इसी डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल सरकारी भुगतान और कई तरह की नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने में भी किया गया। सरकारी कामकाज में भी डिजिटल व्यवस्था का दायरा बढ़ा। आयकर रिटर्न से लेकर कई सरकारी सेवाओं तक ऑनलाइन सुविधाएं बढ़ीं। दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए self-attestation जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। इससे पहले कई प्रक्रियाओं में सरकारी अधिकारियों के सत्यापन की जरूरत पड़ती थी। सरकार ने इस तरह की प्रक्रियाओं को कम करने और नागरिकों के लिए अनुपालन आसान बनाने पर जोर दिया।
भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा निवेश-
इस दौरान भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा निवेश हुआ। सड़कों, रेलवे, एयरपोर्ट और बंदरगाहों के विस्तार के साथ हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को बढ़ाने पर जोर दिया गया। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस प्रोडक्शन, बायोटेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमता बढ़ाने की कोशिश भी हुई। सरकार की 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों का उद्देश्य भारत को मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है। राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी कई बड़े फैसले हुए।
अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव-
2019 में जम्मू-कश्मीर से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव किया गया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों-जम्मू-कश्मीर और लद्दाख-में पुनर्गठित किया गया। इसी अवधि में तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाला कानून भी पारित हुआ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद साफ हुआ और जनवरी 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई।
विदेश नीति को सक्रिय बनाने की कोशिश
विदेश नीति के स्तर पर भी भारत ने अपनी भूमिका को ज्यादा सक्रिय बनाने की कोशिश की। भारत ने G20 की अध्यक्षता की, BRICS जैसे समूहों में अपनी भूमिका बढ़ाई और अमेरिका, रूस, यूरोप, पश्चिम एशिया तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ अलग-अलग स्तर पर रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाया। सितंबर 2026 में भारत में BRICS का 18वां शिखर सम्मेलन भी आयोजित हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS बिजनेस फोरम में समूह के बढ़ते आर्थिक महत्व और भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर तथा टेक्नोलॉजी क्षेत्र पर जोर दिया।
उपलब्धियों के साथ कई सवाल भी-
हालांकि, इन 12 वर्षों को केवल उपलब्धियों के नजरिए से देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। नोटबंदी, कृषि कानून, बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक तनाव और विभिन्न सरकारी नीतियों के प्रभाव को लेकर विपक्ष और अलग-अलग विशेषज्ञों की आलोचनाएं भी सामने आती रही हैं। कोरोना के दौरान अर्थव्यवस्था पर पड़ा असर और बाद में रोजगार तथा आय से जुड़े सवाल भी सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 240 सीटें मिलीं और NDA गठबंधन ने सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत हासिल किया। इसके साथ नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस तरह 2014 से शुरू हुआ उनका प्रधानमंत्री कार्यकाल एक दशक से आगे बढ़ चुका है।
Story first published: Thursday, September 17, 2026, 13:29 [IST]
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