वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्ण शिखर से सोना गायब होने की शिकायत के बाद मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गया है. मंदिर में दर्शन करने वाले पेशे से वकील नित्यानंद राय ने शिखर के कई हिस्सों से सोने की प्लेटें गायब होने की आशंका जताते हुए मंदिर प्रशासन, मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की है. शिकायतकर्ता का दावा है कि कुछ हिस्सों में सोना गायब दिखाई दे रहा है और उसका दायरा बढ़ रहा है. वहीं, मंदिर प्रशासन ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा है कि सोना सुरक्षित है.
नित्यानंद राय के मुताबिक, वह सितंबर 2026 में नियमित दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे थे. इस दौरान उनकी नजर स्वर्ण जड़ित शिखर पर पड़ी, जहां उन्हें करीब 8 से 10 हिस्सों में सोना गायब दिखाई दिया. इसके बाद उन्होंने 23 सितंबर 2026 को मंदिर प्रशासन, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और मंदिर न्यास के सभी ट्रस्टियों को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी. उन्होंने कथित तौर पर गायब सोने की स्थिति स्पष्ट करने, संबंधित हिस्सों को दोबारा स्थापित कराने और सोना गायब होने की परिस्थितियों की जानकारी देने की मांग की.
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शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि मंदिर प्रशासन को पूरे मामले पर श्वेतपत्र जारी करना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं और आम लोगों के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके. उनकी शिकायत का मंदिर प्रशासन की ओर से 9 अक्टूबर को लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर निस्तारण कर दिया गया. हालांकि, नित्यानंद राय इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने आगे भी अपनी शिकायत जारी रखी.
लेखपाल की रिपोर्ट में क्या बताया गया?
शिकायत के जवाब में दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, 3 अक्टूबर 2026 को नित्यानंद राय से फोन पर बातचीत की गई थी. उन्होंने मंदिर के मुख्य हिस्से पर लगी स्वर्ण प्लेटों को लेकर अपनी आशंकाएं और सुझाव बताए थे. रिपोर्ट में कहा गया कि काशी विश्वनाथ मंदिर का गर्भगृह पहले से ही पूरी तरह सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में है और वहां की फुटेज सुरक्षित रखी जाती है.
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास स्वर्ण शिखर की मरम्मत के लिए आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों के संपर्क में है. मरम्मत का उद्देश्य धार्मिक और पुरातात्विक महत्व को बनाए रखते हुए संरचना को दुरुस्त करना है. हालांकि, शिकायतकर्ता का कहना है कि इस जवाब से उनकी आशंकाओं का समाधान नहीं हुआ.
नित्यानंद राय के अनुसार, 13 अक्टूबर को प्रधानमंत्री कार्यालय के पब्लिक ग्रीवांस विभाग की ओर से भी उन्हें फोन आया था. बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी शिकायत पर की गई कार्रवाई के प्रति असंतोष जताया. उनका दावा है कि नियमित दर्शन के दौरान उन्हें शिखर के पूर्वी हिस्से की उत्तरी ओर गोल आकार में सोना गायब दिखाई दिया था और अब उस जगह का क्षेत्र बढ़ता नजर आ रहा है.
शिकायतकर्ता ने उठाए सोने की गुणवत्ता और जांच पर सवाल
नित्यानंद राय ने अपनी नई शिकायत में कहा है कि 23 सितंबर को शिकायत करने के बाद भी शिखर के पूर्वी हिस्से की उत्तरी ओर कथित तौर पर गायब सोने का क्षेत्र बढ़ रहा है. उन्होंने आशंका जताई कि वहां से लगातार सोना हटाया जा रहा हो सकता है. हालांकि, यह शिकायतकर्ता की आशंका है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
उन्होंने वर्ष 2022 में दानदाताओं की ओर से दिए गए सोने की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग भी की है. शिकायत के मुताबिक, उस समय स्वर्ण शिखर के करीब 10 फीट क्षेत्र में सोने की प्लेटें लगाई गई थीं और गर्भगृह में भी स्वर्ण प्लेटें स्थापित की गई थीं. नित्यानंद राय ने सवाल उठाया कि दानदाताओं ने जिस कैरेट का सोना दिया था, क्या उसी गुणवत्ता का सोना मंदिर में लगाया गया. उन्होंने कहा कि कुछ काशीवासियों ने भी इस विषय पर चिंता जताई है.
शिकायतकर्ता ने मंदिर न्यास के सभी ट्रस्टियों की तत्काल बैठक बुलाने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि 23 और 24 सितंबर 2026 को दिए गए प्रत्यावेदनों पर कार्रवाई करते हुए मंदिर प्रशासन को श्वेतपत्र जारी करना चाहिए, ताकि काशीवासियों और देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के सामने स्थिति स्पष्ट हो सके. उन्होंने पूर्व में मंदिरों में हुई चोरी की घटनाओं का हवाला देते हुए ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की है.
मंदिर प्रशासन का जवाब- सोना गायब होने की खबर गलत
इस मामले पर काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पदेन अध्यक्ष और वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने मंदिर प्रशासन की ओर से लिखित बयान जारी किया है. इसमें सोशल मीडिया पर मंदिर के शिखर या गुंबद से सोना गायब होने की खबरों को पूरी तरह गलत बताया गया है. प्रशासन का कहना है कि मंदिर का सोना सुरक्षित है.
बयान के मुताबिक, करीब तीन महीने पहले ओलावृष्टि के दौरान मंदिर के प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर स्थित गुंबद या कलश का एक हिस्सा गिर गया था. मंदिर प्रशासन ने उस हिस्से को सुरक्षित रख लिया है. प्रशासन ने इसे सोना चोरी होने की घटना नहीं बताया है.
मंडलायुक्त के अनुसार, मंदिर की संरचनात्मक मजबूती का आकलन करने के लिए आईआईटी मद्रास को अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी गई है और इसके लिए भुगतान भी किया जा चुका है. विशेषज्ञों की टीम इस महीने के आखिर में मंदिर का दौरा करेगी. उसकी रिपोर्ट मिलने के बाद उसी के अनुरूप मरम्मत का काम कराया जाएगा. फिलहाल, शिकायतकर्ता की ओर से सोना गायब होने की आशंका जताई जा रही है, जबकि मंदिर प्रशासन ने इसे खारिज किया है.
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