2022 Khargone communal violence: खरगोन की उस रात का खौफ आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है. मगर कानूनी पन्नों में इस हिंसा के आरोपी अब पूरी तरह आजाद हैं. मध्य प्रदेश की एक सत्र अदालत ने इस हिंसा के सभी 11 आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कोर्ट की कार्यवाही दावों और जज्बातों से नहीं, बल्कि ठोस सबूतों के आधार पर चलती है.
क्या है खरगोन हिंसा का पूरा मामला?
अब आइए इस पूरे मामले को तफ्सील से बताते हैं. 10 अप्रैल 2022 को मध्य प्रदेश का खरगोन शहर राम नवमी के जश्न में डूबा हुआ था. मगर शाम होते-होते खुशियों का यह माहौल अचानक चीख-पुकार में बदल गया. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, शाम के 6 से रात के 9 बजे के बीच भाटवाड़ी इलाके में एक ऐसी भीड़ सड़कों पर उतरी, जिसके हाथों में पत्थर, तलवारें और कथित तौर पर पेट्रोल बम थे. घरों पर पथराव हुआ, गाड़ियां फूंक दी गईं. देखते ही देखते पूरा इलाका सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलस गया.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसा में इदरीस खान नाम के एक शख्स की मौत हो गई थी. हिंसा के एक दिन बाद जिला प्रशासन ने शहर के पांच इलाकों में 16 मकानों और 29 दुकानों को ध्वस्त कर दिया था. उस समय मध्य प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा था, ‘जिस घर से पत्थर आए हैं, उसी घर को पत्थरों का ढेर बना देंगे.’
चश्मदीद ही गवाही से मुकर गए
पुलिस ने हिंसा फैलाने और तोड़फोड़ करने के आरोप में 11 लोगों को गिरफ्तार किया. इसके बाद अदालती कार्रवाई शुरू हुई. करीब चार साल बाद जब कोर्ट का फैसला आया तो अभियोजन पक्ष का पूरा दावा ताश के पत्तों की तरह बिखर गया. अभियोजन पक्ष के 11 में से 8 गवाह आरोपियों को पहचानने से मुकर गए.
फॉरेंसिक रिपोर्ट भी नहीं दे पाई साथ
इसके अलावा फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट भी पेट्रोल बम या किसी विस्फोटक के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं कर सकी जबकि पुलिस ने दावा किया था कि भीड़ ने पेट्रोल बम और खतरनाक विस्फोटकों से हमला किया था. अदालत ने बेनिफिट ऑफ डाउट देते हुए सभी 11 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया. जब गवाह मुकर गए और लैब की रिपोर्ट भी मामले की पुष्टि नहीं कर सकी तो कोर्ट के पास सिर्फ यही रास्ता था.
सबूत के अभाव में सभी आरोपी बरी
चौथे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मुकेश नाथ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर सका. अदालत ने कहा कि पूरा मामला सिर्फ चश्मदीदों की गवाही पर टिका था. यह गवाही घटना के 51 दिन बाद दर्ज की गई थी और इसके लिए कोई वजह भी नहीं बताई गई थी. इसके अलावा, उस गवाह का नाम FIR में या मूल शिकायत में कहीं भी नहीं था इसलिए कोर्ट ने सभी 11 आरोपियों को बरी कर दिया.
कोर्ट ने इन 11 लोगों को किया बरी
कोर्ट ने जिन 11 आोपियों को बरी किया, उनमें इबादत, सादिक, अब्दुल्ला, साहेब उर्फ साहिब, शहरयार, फैजल, आजम, शब्बीर, इमरान, मुस्ताक और राजिक शामिल हैं. पुलिस ने इन सभी पर दंगा करने, आगजनी, घर में जबरदस्ती घुसने और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराधों का आरोप लगाया था. मगर कोर्ट ने सबूत के अभाव में इन सभी आरोपियों को बरी कर दिया.

मुकेश झा
मुकेश झा पिछले 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वो मौजूदा समय में टीवी9 भारतवर्ष के डिजिटल प्लेटफॉर्म में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. 2017 में अमर उजाला के साथ उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें आकाशवाणी रेडियो के साथ भी काम करने का अनुभव है. ऑल इंडिया रोडियो दिल्ली में करीब एक दर्जन से अधिक प्रोग्राम कर चुके हैं. मुकेश को देश-दुनिया, राजनीति, खेल और साहित्य में खास रुचि है. साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर भी लिखने में दिलचस्पी है. मीडिया में नए प्रयोग को सीखने और समझने की ललक है. इन्हें एंकरिंग का भी शौक है. बिहार में मधुबनी से ताल्लुक रखने वाले मुकेश झा ओडिशा के संबलपुर यूनिवर्सिटी से बीसीए ग्रेजुएट हैं. इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा मुकेश प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से तबला से भी ग्रेजुएट हैं.
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