जल संधि पर पड़ोसी देश से बिना देरी शुरू करें बातचीत, शशि थरूर की अध्यक्षता वाली समिति ने क्यों कहा ऐसा
Jul 30, 2026 10:22 pm ISTपीटीआई, नई दिल्ली
संसदीय समिति ने बांग्लादेश में बीजिंग की बढ़ती मौजूदगी, जिसमें मोंगला पोर्ट पर 370 मिलियन डॉलर का विस्तार प्रोजेक्ट भी शामिल है, पर भी चिंता जताई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर।
भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई गंगा जल संधि की अवधि इस साल समाप्त होने का उल्लेख करते हुए संसद की एक समिति ने सरकार से ढाका के साथ ''बिना किसी और देरी के'' बातचीत शुरू करने का आग्रह किया है। कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसद की स्थायी समिति ने गुरुवार (30 जुलाई) को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश की। ''भारत-बांग्लादेश संबंधों के भविष्य'' शीर्षक वाली रिपोर्ट में समिति ने कहा कि गंगा जल संधि 2026 में समाप्त होने वाली है और इसके नवीकरण को लेकर अभी तक द्विपक्षीय बातचीत शुरू नहीं हुई है।
समिति ने सुझाव दिया कि संधि के नवीकरण पर जल्द बातचीत शुरू की जानी चाहिए, जिसमें जल संबंधी नये आंकड़ों, जलवायु परिवर्तन के अनुमान और पश्चिम बंगाल तथा बिहार सरकार से परामर्श को शामिल किया जाना चाहिए। वर्ष 1996 की गंगा जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच एक द्विपक्षीय समझौता है, जिसके तहत फरक्का बैराज पर गंगा नदी के पानी के बंटवारे की व्यवस्था 30 वर्षों के लिए की गई थी।
2023 में एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया था
समिति ने बताया कि संधि की आंतरिक समीक्षा के लिए जुलाई 2023 में एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया था और बांग्लादेश में गठित नयी सरकार के तहत दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत शुरू होने की उम्मीद है। समिति ने कहा, ''हालांकि ये कदम सही दिशा में हैं, लेकिन संधि के 2026 में समाप्त होने के साथ समय कम बचा है।'' संसदीय समिति ने सरकार से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश के साथ ''बिना किसी और देरी के द्विपक्षीय बातचीत शुरू करे'', ताकि 2026 के बाद किसी तरह की अनिश्चित स्थिति पैदा न हो।
पश्चिम बंगाल और बिहार सरकार के साथ भी हो परामर्श
समिति ने सिफारिश की कि अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा की जा रही आंतरिक समीक्षा को जल्द पूरा किया जाए, ताकि भारत की बातचीत के लिए रणनीति तैयार हो सके। उसने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल और बिहार सरकार के साथ लगातार परामर्श जारी रखा जाना चाहिए। समिति ने कहा कि उसे जानकारी दी गई है कि गंगा जल संधि तैयार करने में पश्चिम बंगाल की महत्वपूर्ण भागीदारी रही थी और राज्य के तत्कालीन वित्त मंत्री ने संधि के प्रावधान तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।
तीस्ता नदी जल बंटवारे को ध्यान में रखा जाए
समिति ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने मार्च 2025 में कोलकाता में हुई संयुक्त नदी आयोग (जेआरसी) की हालिया बैठक में भी भाग लिया था। समिति ने सिफारिश की कि संधि नवीकरण की प्रक्रिया में जल संबंधी नये आंकड़ों, जलवायु परिवर्तन के अनुमान और ''नदियों के जल के न्यायसंगत एवं टिकाऊ उपयोग'' की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसने बातचीत के दौरान तीस्ता नदी जल बंटवारे को लेकर पश्चिम बंगाल की चिंताओं को दूर करने के महत्व पर भी जोर दिया है। समिति ने कहा, ''निष्पक्ष, समान और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समझौता प्राथमिकता बना हुआ है और पश्चिम बंगाल की चिंताओं का उचित समाधान किया जाना चाहिए।'' इसने उम्मीद जताई कि दोनों देश इन वार्ताओं में ''रचनात्मक दृष्टिकोण'' अपनाएंगे और इन्हें ''समयबद्ध तरीके से'' पूरा करेंगे।
