Chandausi Assembly Caste Equations: चंदौसी विधानसभा के जातिगत समीकरण 2027

Published on 31 जुल॰ 2026

संभल जिले की चंदौसी विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों में शामिल है। Chandausi Assembly Caste Equations को देखें तो यहां अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाता सबसे बड़े चुनावी समूहों में हैं, जबकि यादव, वैश्य, मौर्य, सैनी, पाल, ठाकुर, कश्यप, ब्राह्मण और दूसरे पिछड़े वर्ग भी नतीजे पर सीधा असर डालते हैं। 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद चंदौसी का मतदाता आधार करीब 3.24 लाख के आसपास है। अंतिम SIR आंकड़ों में प्री-SIR सूची के मुकाबले 75,333 मतदाताओं की शुद्ध कमी, यानी 18.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

चंदौसी का राजनीतिक समीकरण बाकी संभल जिले से काफी अलग है। जहां संभल, असमोली और कुंदरकी जैसे क्षेत्रों में मुस्लिम वोट चुनावी चर्चा के केंद्र में रहता है, वहीं चंदौसी में अनुसूचित जाति, वैश्य, सैनी-मौर्य और दूसरे हिंदू सामाजिक समूहों की मजबूत मौजूदगी चुनाव को अलग दिशा देती है। यही वजह है कि भाजपा ने 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनाव यहां बड़े अंतर से जीते और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी चंदौसी सेगमेंट में भाजपा को 46 हजार से अधिक वोटों की बढ़त मिली।

चंदौसी विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभाचंदौसी
विधानसभा संख्या31
जिलासंभल
लोकसभा क्षेत्रसंभल
आरक्षणअनुसूचित जाति (SC)
वर्तमान विधायकगुलाब देवी
पार्टीभारतीय जनता पार्टी
2022 जीत का अंतर35,367 वोट
2026 अनुमानित अंतिम मतदाताकरीब 3.24 लाख
SIR में शुद्ध कमी75,333 मतदाता
प्रमुख सामाजिक समूहमुस्लिम, जाटव, यादव, वैश्य, मौर्य, सैनी, पाल, ठाकुर, कश्यप, ब्राह्मण, वाल्मीकि, कोरी
सीट का स्वरूपशहरी-कस्बाई और ग्रामीण मिश्रित
प्रमुख मुद्देरोजगार, व्यापार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और नगरीय सुविधाएं

चंदौसी विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इसका अर्थ है कि प्रत्याशी अनुसूचित जाति वर्ग से ही हो सकता है, लेकिन मतदान सभी समुदायों के मतदाता करते हैं। यही वजह है कि यहां दलित समाज के भीतर प्रत्याशी की स्वीकार्यता के साथ मुस्लिम, OBC और सवर्ण वोटों का गठजोड़ भी चुनावी सफलता के लिए उतना ही जरूरी रहता है।

Chandausi Assembly Caste Equations में अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाता सबसे प्रभावशाली समूह माने जाते हैं। पुराने चुनावी आकलन में करीब एक लाख मुस्लिम और लगभग 70 हजार जाटव मतदाताओं की मौजूदगी बताई गई थी। इसके बाद यादव और वैश्य करीब 30-30 हजार, मौर्य लगभग 25 हजार और पाल मतदाता करीब 16 हजार आंके गए थे।

इन संख्याओं को 2026 की वर्तमान आधिकारिक जातिवार मतदाता संख्या नहीं माना जाना चाहिए। ये पुराने चुनावी आकलन हैं और SIR के बाद मतदाता आधार में बड़ा बदलाव आया है। फिर भी वे यह समझने में मदद करते हैं कि चंदौसी में कोई एक जाति अकेले चुनाव तय करने की स्थिति में नहीं है।

चंदौसी विधानसभा का पुराना अनुमानित जातीय समीकरण

समुदायपुराने चुनावी आकलन में मतदाता
मुस्लिमलगभग 1,00,000
जाटवलगभग 70,000
यादवलगभग 30,000
वैश्यलगभग 30,000
मौर्यलगभग 25,000
पाललगभग 16,000
ठाकुरलगभग 15,000
कश्यपलगभग 14,000
ब्राह्मणलगभग 14,000
दिवाकरलगभग 9,000
वाल्मीकिलगभग 8,000
पंजाबीलगभग 6,000
कोरीलगभग 5,000

ये आंकड़े पुराने अनुमान हैं। 2026 में समुदायवार आधिकारिक मतदाता सूची उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन्हें मौजूदा सटीक संख्या के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

2026 में चंदौसी में करीब 3.24 लाख मतदाता

चंदौसी विधानसभा की मतदाता सूची में 2026 के SIR के दौरान बड़ा बदलाव हुआ। 27 अक्टूबर 2025 की प्री-SIR सूची में चंदौसी के करीब 3,99,331 मतदाता थे। जनवरी 2026 के ड्राफ्ट चरण में नाम हटने के बाद संख्या करीब 3 लाख तक पहुंच गई थी। इसके बाद दावे-आपत्तियों और नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया चली। अंतिम राज्य स्तरीय SIR आंकड़े चंदौसी में प्री-SIR संख्या के मुकाबले 75,333 मतदाताओं की शुद्ध कमी बताते हैं। इस आधार पर अंतिम मतदाता आधार करीब 3,23,998 यानी लगभग 3.24 लाख बैठता है।

स्थितिमतदाता
प्री-SIR आधार3,99,331
अंतिम शुद्ध कमी75,333
2026 का अंतिम अनुमानित आधारकरीब 3,23,998
शुद्ध कमी18.86%

ड्राफ्ट और अंतिम सूची के आंकड़ों में अंतर इसलिए दिखाई देता है क्योंकि ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद पात्र मतदाताओं के नए आवेदन और दावे स्वीकार किए गए। पूरे संभल जिले का ड्राफ्ट मतदाता आधार 12,51,705 था, जबकि अंतिम प्रकाशन में यह बढ़कर 13,43,051 हो गया। इसलिए चंदौसी के जनवरी ड्राफ्ट के करीब 3 लाख मतदाताओं को अप्रैल की अंतिम सूची मानना सही नहीं होगा।

2027 के लिहाज से यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 75 हजार की शुद्ध कमी का मतलब है कि 2022 के जातिवार या बूथवार आंकड़ों को सीधे अगला चुनाव समझने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

अनुसूचित जाति वोट चंदौसी की राजनीति का केंद्र

चंदौसी SC आरक्षित सीट है और अनुसूचित जाति के मतदाता यहां संख्या के साथ राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। जाटव के अलावा वाल्मीकि, कोरी, धोबी और अनुसूचित जाति के दूसरे समूह क्षेत्र में मौजूद हैं।

मौजूदा विधायक गुलाब देवी स्वयं अनुसूचित जाति के धोबी समाज से आती हैं। वह चंदौसी की राजनीति में भाजपा के सबसे पुराने चेहरों में शामिल हैं और अलग-अलग चुनावों में इस सीट से कई बार जीत दर्ज कर चुकी हैं।

आरक्षित सीट होने के कारण भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस सभी को अनुसूचित जाति का उम्मीदवार उतारना होता है। ऐसे में चुनाव का सवाल केवल यह नहीं रहता कि दलित मतदाता किस पार्टी के साथ जाएंगे, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होता है कि विभिन्न दलित उपजातियों में किस उम्मीदवार की स्वीकार्यता ज्यादा है।

बसपा के लिए जाटव वोट परंपरागत आधार रहा है। भाजपा ने गैर-जाटव दलित समूहों के साथ जाटव समाज में भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश की है। सपा भी PDA राजनीति के जरिए दलित वोटों में हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।

जाटव वोट सबसे महत्वपूर्ण दलित समूह

पुराने जातीय आकलन में जाटव मतदाताओं की संख्या करीब 70 हजार बताई गई थी। दूसरे चुनावी आकलनों में पूरे अनुसूचित जाति वोट बैंक को इससे भी बड़ा माना गया है। इससे स्पष्ट है कि चंदौसी में जाटव मतदाता अकेले ही एक बड़ा चुनावी ब्लॉक हैं।

2017 में बसपा उम्मीदवार बिरमावती को 51,049 वोट मिले थे। 2022 में बसपा उम्मीदवार रणविजय सिंह का वोट घटकर 30,481 रह गया। इसी दौरान भाजपा ने लगातार सीट जीती।

बसपा के कमजोर होने की स्थिति में दलित वोट किस दिशा में गया, यह भाजपा-सपा मुकाबले को समझने का महत्वपूर्ण पहलू है।

2027 में अगर बसपा जाटव वोटों को फिर बड़े स्तर पर अपने साथ जोड़ती है तो भाजपा के लिए चुनौती बढ़ सकती है। वहीं अगर दलित वोट भाजपा और सपा में विभाजित होता है तो मुख्य मुकाबले की तस्वीर अलग हो सकती है।

मुस्लिम वोट करीब एक लाख का पुराना अनुमान

पुराने सामाजिक आकलन में चंदौसी विधानसभा में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग एक लाख बताई गई थी। दूसरे पुराने आकलनों में यह करीब 88 हजार के आसपास भी बताई गई है। यानी मुस्लिम मतदाता इस सीट के सबसे बड़े सामाजिक समूहों में स्पष्ट रूप से शामिल हैं।

इसके बावजूद भाजपा की लगातार जीत यह बताती है कि चंदौसी का चुनावी पैटर्न संभल विधानसभा जैसा नहीं है।

अगर मुस्लिम वोट सपा के पक्ष में बड़े स्तर पर एकजुट होता है तो उसे मजबूत आधार मिलता है, लेकिन जीत के लिए दलित और OBC वोटों में भी बड़ी हिस्सेदारी चाहिए।

2022 में सपा को 77,523 वोट मिले थे, जबकि पुराने अनुमानों में अकेले मुस्लिम मतदाता इससे ज्यादा बताए जाते रहे हैं। इससे भी स्पष्ट है कि सामाजिक संख्या को किसी पार्टी का निश्चित वोट नहीं माना जा सकता।

मतदान प्रतिशत, प्रत्याशी की जाति, दलित वोटों का बंटवारा और स्थानीय समीकरण मिलकर अंतिम परिणाम तय करते हैं।

यादव वोट सपा के लिए महत्वपूर्ण आधार

पुराने आकलन में चंदौसी में करीब 30 हजार यादव मतदाता बताए गए थे। मुस्लिम वोट के साथ यादव समाज सपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार तैयार करता है।

लेकिन चंदौसी आरक्षित सीट होने के कारण सपा को चुनावी सफलता के लिए मजबूत दलित प्रत्याशी और अनुसूचित जाति मतदाताओं के एक बड़े हिस्से का समर्थन भी चाहिए।

2012 इसका उदाहरण है। उस चुनाव में सपा की लक्ष्मी गौतम ने भाजपा की गुलाब देवी को सिर्फ 4,007 वोटों के अंतर से हराया था।

इसके बाद 2017 और 2022 में भाजपा ने सीट वापस जीत ली।

वैश्य मतदाता चंदौसी शहर में असरदार

चंदौसी का बड़ा कस्बाई और व्यापारिक आधार वैश्य मतदाताओं को चुनावी रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। पुराने आकलन में करीब 30 हजार वैश्य मतदाता बताए गए थे, जबकि दूसरे राजनीतिक अनुमानों में यह संख्या 40 हजार के आसपास भी मानी गई।

व्यापार, बाजार, जीएसटी, स्थानीय सड़कें, बिजली, पार्किंग, यातायात और नगरीय सुविधाएं इस वर्ग के लिए महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे हो सकते हैं।

भाजपा को लंबे समय से शहरी व्यापारी और वैश्य समाज में मजबूत समर्थन मिलता रहा है। चंदौसी में भाजपा की सफलता में यह वोट बैंक एक प्रमुख हिस्सा माना जाता है।

मौर्य-सैनी और दूसरे OBC भी भाजपा-सपा के लिए निर्णायक

पुराने जातीय आंकड़े मौर्य मतदाताओं की संख्या करीब 25 हजार बताते हैं। अलग-अलग चुनावी आकलनों में सैनी समाज की भी अच्छी मौजूदगी बताई गई है। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने संभल से परमेश्वर लाल सैनी को उम्मीदवार बनाया था और चंदौसी विधानसभा से उन्हें बड़ी बढ़त मिली।

मौर्य-सैनी के अलावा पाल, कश्यप और अन्य पिछड़ा वर्ग भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण हैं।

OBC समूहपुराने आकलन में स्थिति
यादवकरीब 30 हजार
मौर्यकरीब 25 हजार
पालकरीब 16 हजार
कश्यपकरीब 14 हजार
सैनीअलग पुराने आकलनों में मजबूत उपस्थिति

भाजपा के लिए गैर-यादव OBC वोट महत्वपूर्ण हैं, जबकि सपा यादव आधार के साथ मौर्य, पाल, कश्यप और दूसरे पिछड़े वर्गों में समर्थन बढ़ाने की कोशिश करती है।

2027 में इसी OBC वोट के भीतर होने वाला कुछ हजार वोटों का बदलाव मुकाबले का अंतर घटा या बढ़ा सकता है।

ठाकुर और ब्राह्मण वोट भी भाजपा के सामाजिक गठजोड़ का हिस्सा

पुराने अनुमान में चंदौसी में करीब 15 हजार ठाकुर और 14 हजार ब्राह्मण मतदाता बताए गए थे। इन दोनों समूहों की कुल संख्या किसी बड़े समुदाय के बराबर न हो, लेकिन व्यापक चुनावी गठजोड़ में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।

भाजपा की चुनावी रणनीति वैश्य, ठाकुर, ब्राह्मण, गैर-यादव OBC और दलित समूहों को जोड़कर बड़ा सामाजिक आधार बनाने की रही है।

2017 और 2022 के नतीजे बताते हैं कि भाजपा इस सामाजिक गठजोड़ को वोट में बदलने में सफल रही।

2022 में भाजपा ने 35,367 वोट से जीती सीट

2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा की गुलाब देवी ने 1,12,890 वोट हासिल किए और उनका वोट शेयर 49.53 प्रतिशत रहा।

सपा की विमलेश कुमारी को 77,523 वोट मिले। बसपा के रणविजय सिंह 30,481 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे।

गुलाब देवी ने चुनाव 35,367 वोट के अंतर से जीता।

उम्मीदवारपार्टीवोटवोट प्रतिशत
गुलाब देवीभाजपा1,12,89049.53%
विमलेश कुमारीसपा77,52334.02%
रणविजय सिंहबसपा30,48113.38%
मिथलेश कुमारीकांग्रेस1,595
NOTA2,0590.90%
जीत का अंतर35,36715.52%

इस चुनाव में भाजपा अकेले लगभग आधे वोट हासिल करने में सफल रही। सपा और बसपा के वोट जोड़ने पर मुकाबला अलग दिखाई देता है, लेकिन चुनाव में अलग-अलग दलित समूहों और OBC वोटों के विभाजन ने भाजपा को स्पष्ट बढ़त दी।

2017 में भाजपा ने 45 हजार से ज्यादा वोट से जीत दर्ज की

2017 में भी भाजपा की गुलाब देवी ने चंदौसी सीट जीती थी। उन्हें 1,04,806 वोट मिले।

कांग्रेस-सपा गठबंधन में कांग्रेस उम्मीदवार विमलेश कुमारी को 59,337 वोट मिले, जबकि बसपा की बिरमावती ने 51,049 वोट हासिल किए।

गुलाब देवी की जीत का अंतर 45,469 वोट रहा।

उम्मीदवारपार्टी2017 वोट
गुलाब देवीभाजपा1,04,806
विमलेश कुमारीकांग्रेस59,337
बिरमावतीबसपा51,049
जीत का अंतर45,469

2017 के नतीजे में बसपा का 51 हजार से अधिक वोट खास तौर पर महत्वपूर्ण है। दलित वोटों का बड़ा हिस्सा बसपा के पास होने के बावजूद भाजपा एक लाख से ज्यादा वोट हासिल करने में सफल रही।

इसका अर्थ है कि भाजपा की जीत केवल किसी एक दलित उपजाति पर आधारित नहीं थी, बल्कि उसे OBC, सवर्ण और अनुसूचित जाति के हिस्सों का व्यापक समर्थन मिला।

2012 में भाजपा को सिर्फ 4,007 वोट से हराकर जीती थी सपा

2012 में तस्वीर बिल्कुल अलग थी। सपा की लक्ष्मी गौतम को 55,871 वोट मिले और भाजपा की गुलाब देवी को 51,864 वोट।

बसपा के गिरीश चंद्र भी 51,534 वोट लेकर बेहद करीब रहे।

सपा ने सिर्फ 4,007 वोट से चुनाव जीता।

उम्मीदवारपार्टीवोट
लक्ष्मी गौतमसपा55,871
गुलाब देवीभाजपा51,864
गिरीश चंद्रबसपा51,534
जीत का अंतर4,007

यह चुनाव चंदौसी के जातीय गणित का सबसे साफ उदाहरण है। भाजपा और बसपा के बीच सिर्फ 330 वोट का अंतर था, जबकि सपा उनसे करीब चार हजार वोट आगे थी।

यानी तीन मजबूत दलित प्रत्याशियों और सामाजिक वोटों के बंटवारे ने त्रिकोणीय मुकाबला बनाया था।

2012 से 2022 तक कैसे बदला चंदौसी का मुकाबला?

चुनावविजेतापार्टीवोटजीत का अंतर
2012लक्ष्मी गौतमसपा55,8714,007
2017गुलाब देवीभाजपा1,04,80645,469
2022गुलाब देवीभाजपा1,12,89035,367

2012 के बाद चंदौसी में भाजपा के वोटों में बड़ा उछाल आया। 51 हजार से बढ़कर 2017 में भाजपा एक लाख के पार पहुंच गई और 2022 में 1.12 लाख से अधिक वोट हासिल किए।

सपा का प्रदर्शन 2022 में सुधरा, लेकिन भाजपा से अंतर फिर भी 35 हजार से अधिक रहा।

2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को 46,318 वोट की बढ़त

2024 लोकसभा चुनाव का चंदौसी विधानसभा सेगमेंट 2027 के लिए और महत्वपूर्ण संकेत देता है।

संभल लोकसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी ने चुनाव जीता, लेकिन चंदौसी विधानसभा सेगमेंट में भाजपा ने बड़ी बढ़त बनाई।

भाजपा उम्मीदवार को चंदौसी में 1,14,204 वोट मिले, जबकि सपा उम्मीदवार को 67,886 वोट मिले। बसपा को 29,419 वोट मिले।

भाजपा की विधानसभा क्षेत्र में बढ़त 46,318 वोट रही।

2024 लोकसभा: चंदौसी सेगमेंटवोट
भाजपा1,14,204
सपा67,886
बसपा29,419
भाजपा की बढ़त46,318

यह नतीजा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संभल लोकसभा सीट के अन्य अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में सपा आगे रही, लेकिन चंदौसी ने भाजपा को बड़ी बढ़त दी।

इससे चंदौसी और बाकी संभल जिले के राजनीतिक चरित्र के बीच अंतर साफ दिखाई देता है।

भाजपा का मजबूत गढ़ क्यों बनी चंदौसी?

चंदौसी में भाजपा की ताकत कई सामाजिक समूहों के गठजोड़ में दिखाई देती है।

अनुसूचित जाति के एक हिस्से के साथ वैश्य, मौर्य-सैनी, ठाकुर, ब्राह्मण, पाल, कश्यप और दूसरे गैर-यादव OBC मतदाताओं में भाजपा मजबूत समर्थन जुटाती रही है।

गुलाब देवी का लंबा व्यक्तिगत राजनीतिक नेटवर्क भी पार्टी के लिए अहम है। वह चंदौसी से कई बार विधायक चुनी जा चुकी हैं और राज्य सरकार में मंत्री पद पर भी रही हैं।

2022 में करीब 50 प्रतिशत विधानसभा वोट और 2024 लोकसभा चुनाव में 52.81 प्रतिशत वोट भाजपा के मजबूत आधार का संकेत देते हैं।

सपा को 2027 में क्या करना होगा?

सपा के लिए चंदौसी में सबसे बड़ा आधार मुस्लिम और यादव मतदाता हो सकते हैं, लेकिन इस सीट पर इतना गठजोड़ पर्याप्त साबित नहीं हुआ है।

2027 में सपा को अनुसूचित जाति के मतदाताओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। खास तौर पर जाटव, वाल्मीकि, कोरी, धोबी और दूसरे दलित समूहों में मजबूत प्रत्याशी की स्वीकार्यता निर्णायक हो सकती है।

साथ ही मौर्य, पाल, कश्यप और दूसरे OBC मतदाताओं में भाजपा की बढ़त कम करना जरूरी होगा।

अगर सपा मुस्लिम-यादव आधार के साथ दलित और OBC वोटों का बड़ा हिस्सा जोड़ती है तो मुकाबला 2012 जैसी करीबी दिशा में जा सकता है।

बसपा का वोट किसका गणित बिगाड़ सकता है?

चंदौसी SC आरक्षित सीट होने के कारण बसपा का प्रदर्शन विशेष महत्व रखता है।

2012 में बसपा के गिरीश चंद्र को 51,534 वोट मिले थे। 2017 में भी पार्टी ने 51,049 वोट हासिल किए। लेकिन 2022 में बसपा का वोट घटकर 30,481 रह गया।

चुनावबसपा वोट
201251,534
201751,049
202230,481
2024 लोकसभा, चंदौसी29,419

यदि बसपा 2027 में जाटव वोटों को दोबारा बड़े स्तर पर एकजुट करती है तो भाजपा और सपा दोनों की रणनीति प्रभावित हो सकती है।

अगर बसपा कमजोर रहती है तो उसके परंपरागत वोट का भाजपा और सपा के बीच बंटवारा सीधे परिणाम तय कर सकता है।

2027 में सात समीकरणों पर रहेगी नजर

2027 विधानसभा चुनाव में चंदौसी की लड़ाई सात प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक सवालों पर निर्भर कर सकती है।

पहला सवाल अनुसूचित जाति वोट का है। जाटव, वाल्मीकि, कोरी, धोबी और दूसरे दलित समूह किस दल के साथ जाते हैं, यह सीट का सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगा।

दूसरा, करीब एक लाख के पुराने अनुमान वाला मुस्लिम वोट किस हद तक सपा के साथ एकजुट होता है।

तीसरा, भाजपा वैश्य और सवर्ण मतदाताओं में अपना पुराना समर्थन कितना बनाए रखती है।

चौथा, मौर्य-सैनी और दूसरे गैर-यादव OBC समूहों का रुख किस तरफ रहता है।

पांचवां, यादव मतदाता सपा के साथ किस स्तर तक एकजुट रहते हैं।

छठा, बसपा का प्रदर्शन होगा। बसपा जितनी मजबूत होगी, दलित वोटों का त्रिकोणीय बंटवारा उतना ही बढ़ सकता है।

सातवां और सबसे नया फैक्टर 2026 SIR वोटर लिस्ट है। करीब 3.99 लाख के पुराने आधार की तुलना में अब चंदौसी में मतदाता संख्या करीब 3.24 लाख के आसपास है। 75 हजार से अधिक की शुद्ध कमी ने बूथ स्तर का पुराना गणित बदल दिया है।

2017 और 2022 विधानसभा चुनाव के साथ 2024 लोकसभा चुनाव में भी चंदौसी से भाजपा की स्पष्ट बढ़त इसे फिलहाल पार्टी की मजबूत सीटों में रखती है। इसके बावजूद 2012 का नतीजा यह याद दिलाता है कि दलित वोटों का बंटवारा, मजबूत प्रत्याशी और OBC-मुस्लिम समीकरण बदलने पर सीट का परिणाम भी बदल सकता है।

उत्तर प्रदेश की सभी सीटों की सामाजिक संरचना और चुनावी गणित जानने के लिए उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण पर विस्तृत जानकारी पढ़ी जा सकती है।

प्रत्याशियों, टिकट वितरण, गठबंधन, सीटवार रणनीति और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े अपडेट के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव की विस्तृत कवरेज पढ़ें।

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