छाती पर मूंग दल रहे बांग्लादेशी: समितियां बनीं पर कार्रवाई शून्य, सुरक्षा एजेंसियों के दावों की पोल खुली!| Navbharat Live

Published on 31 जुल॰ 2026

छाती पर मूंग दल रहे बांग्लादेशी: समितियां बनीं पर कार्रवाई शून्य, सुरक्षा एजेंसियों के दावों की पोल खुली!

  • Written By:

    अंकिता पटेल

Updated On: Jul 31, 2026 | 02:54 PM IST

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सार

Illegal Immigrants India: नागपुर में 2018 से पकड़े गए 21 बांग्लादेशी नागरिकों की अब तक स्वदेश वापसी नहीं होने से सुरक्षा और निर्वासन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Bangladeshis acting with brazen impunity: Committees formed but no action taken—security agencies' claims exposed!

नागपुर बांग्लादेशी, अवैध घुसपैठ, सांकेतिक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)

विस्तार

Bangladeshi Deportation Policy India: भले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार राज्य के गृह मंत्रालय ने देश में पकड़े गए विदेशी नागरिकों की स्वेदश वापसी को लेकर समितियों का गठन किया हो लेकिन वास्तविक तौर पर काम होता दिखाई नहीं दे रहा है। असल में इस गंभीर मुद्दे को लेकर सरकार और पुलिस गंभीर ही नहीं हैं। इसका उदाहरण शहर में ही देखने को मिलता है। वर्ष 2018 से अब तक 21 बांग्लादेशियों को पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पकड़ा जा चुका है लेकिन सब के सब यहां छाती पर मूंग दल रहे हैं।

उन्हें वापस बांग्लादेश भेजने के लिए किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह देश की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर मुद्दा है। जो लोग देश में घुसपैठ कर अलग-अलग शहरों में बस गए, वहां के पूरे दस्तावेज तैयार कर लिए, वे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। एक तरफ भारत-बांग्लादेश सीमा पर तनाव कायम है।

देश की सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए विभिन्न प्रकार की उपाययोजना की जा रही है। देश में नकली नोटों की तस्करी का सबसे बड़ा नेटवर्क बांग्लादेश से ही ऑपरेट होता है। इसका उदाहरण पूर्व में हुई कार्रवाई में देखने को मिला है। बावजूद इसके बांग्लादेशियों पर नकेल कसकर उन्हें देश से बाहर खदेड़ने के लिए कदम न उठाना सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है।

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3 वर्ष तक रहा जेल में, अब घूम रहा खुला

पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद बरुआ लगभग 3 वर्षों तक जेल में था। इस दौरान उसकी आय का कोई साधन नहीं था। इसके बावजूद वह सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। कोर्ट में केस लड़ना कितना महंगा है, यह सब जानते हैं। ऐसे में आय का कोई स्रोत न
होते हुए भी बरुआ ये कैसे कर रहा है, यह बड़ा सवाल है।

बताया जाता है कि बरुआ द्वारा विदेश भेजे गए लोग ही अब उसके लिए फंडिंग करते हैं। कुछ समय पहले ही उसके खिलाफ एक महिला ने उत्पीड़न की शिकायत की। थाने में मामला भी दर्ज हुआ लेकिन बरुआ अब शहर में खुला घूम रहा है। कानूनी पेच अड़ाकर वह शहर में ही बना रहना चाहता है।

मार्च में जारी किया गया था GR

केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुरूप महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के मामलों की जांच और उन्हें उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए जिला एवं राज्य स्तरीय सत्यापन समितियों के गठन करने का निर्णय लिया। इस संबंध में राज्य के गृह विभाग ने 25 मार्च 2026 को शासन निर्णय (जीआर) जारी किया।

जीआर के अनुसार, कई विदेशी नागरिक भारत में अपना प्रवास बढ़ाने या निर्वासन से बचने के लिए आपराधिक मामलों में शामिल हो जाते हैं और बाद में कानूनी व तकनीकी आधार पर देश में बने रहते हैं। इसे देखते हुए गृह मंत्रालय ने ऐसे मामलों में यदि उपयुक्त हो तो आपराधिक प्रकरण वापस लेकर संबंधित विदेशी नागरिकों को शीघ्र उनके मूल देश भेजने के लिए एक मानक प्रक्रिया निर्धारित की है।

गिट्टीखदान में घरे गए थे 4

ज्ञात हो कि अगस्त 2018 में भी सिटी पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने गिट्टीखदान थाना क्षेत्र से 4 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया था। चारो बौद्ध भिक्षु बनकर ही शहर में रह रहे थे। पकड़े गए आरोपियों में रॉकी बिमल बरुआ उर्फ रॉकी चौधरी (26), सुदर्शन नयन बरुआ उर्फ नयन सुमन तालुकदार (30), विप्लव शिशिर बरुआ उर्फ विप्लव शिशिर तालुकदार (34) और प्रदीप चितरंजन बरुआ उर्फ नंदन उर्फ नंदप्रिय तपन बरुआ (28) का समावेश था, ये सभी पलाश के ही चट्टग्राम जिले के ही रहने वाले थे, आश्चर्य की बात यह कि पहले भी इस तरह के प्रकरण सामने आने के बावजूद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क नहीं हुई।

जांच एजेंसियों की मानें तो वर्ष 2016 से 2022 तक करीब 50 युवकों ने नागपुर से फर्जी पासपोर्ट बनवाया जबकि बड़ी संख्या में बरुआ ने भोपाल के पासपोर्ट अधिकारी नसीम अख्तर के जरिए बांग्लादेशी युवकों को विदेशों में भेजा था।

पलाश बरुआ सबसे ताजा उदाहरण

बांग्लादेशी नागरिक पलाश बिपन बरुआ उर्फ पलाश बिपन चौधरी (42) इसका सबसे ताजा उदाहरण है। सितंबर 2023 में सिटी पुलिस ने बरुआ को गिरफ्तार किया था।

उसके खिलाफ विविध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। तब पता चला कि बरुआ खुद नागपुर और भोपाल से एक बड़ा नेटकर्व चला रहा था। वर्ष 2012 में बरुआ सीमा पार करके भारत आया। तब से वह नागपुर के पीली नदी परिसर में एक बौद्ध विहार में भिक्षु बनकर रह रहा था।

इसी दौरान उसने बौद्ध विहार के दस्तावेज और लेटर हेड हासिल कर लिए, वहीं के पते पर अपना फर्जी पासपोर्ट तैयार कराया। इसके बाद भिक्षु बनकर थाईलैंड भी घूमने गया।

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विदर्भ के अलग-अलग जिलों में होने वाले बौद्ध सम्मेलनों में हिस्सा लिया। इसी बीच उसके करीबी 22 बांग्लादेशियों के नागपुर आने का पता चला। वर्ष 2012 से 2016 के बीच यशोधरानगर और जरीपटका थाना क्षेत्र से 6 बांग्लादेशियों द्वारा पासपोर्ट बनवाने की जानकारी सामने आई।

अचानक उसने भिक्षु का अवतार बदल लिया और जिम ट्रेनर बन गया। उसने कई बोग्लादेशी युवकों को घुसपैठ कराकर भारत बुलाया। फिर यहां से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाकर विभिन्न देशों में भेजा। इसके लिए वह मोटी रकम भी चार्ज करता था।

-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से अभिषेक तिवारी की रिपोर्ट

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