Milak Assembly Caste Equations: मिलक विधानसभा के जातिगत समीकरण 2027

Published on 31 जुल॰ 2026

रामपुर जिले की मिलक विधानसभा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों में शामिल है। Milak Assembly Caste Equations की बात करें तो यहां मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी मौजूदगी के साथ दलित, सैनी, जाट, ब्राह्मण और दूसरे पिछड़े-सवर्ण समुदाय चुनावी नतीजे को प्रभावित करते हैं। सीट SC आरक्षित होने के कारण सभी प्रमुख दलों को अनुसूचित जाति का प्रत्याशी उतारना होता है, लेकिन जीत के लिए मुस्लिम और दूसरे सामाजिक समूहों का समर्थन भी जरूरी रहता है। 2026 की अंतिम SIR मतदाता सूची के मुताबिक मिलक विधानसभा में 3,26,397 मतदाता हैं। इनमें 1,78,622 पुरुष, 1,47,761 महिला और 14 अन्य मतदाता शामिल हैं।

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 आने वाले समय में राज्य की राजनीति को एक नई दिशा प्रदान करने वाला साबित होगा।

मिलक का हालिया चुनावी इतिहास भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधे मुकाबले की कहानी बताता है। 2012 में सपा के विजय सिंह ने सीट जीती थी, लेकिन 2017 में भाजपा की राजबाला ने उन्हें हराकर मिलक में कमल खिलाया। 2022 में दोनों प्रत्याशी फिर आमने-सामने आए और भाजपा ने सीट बरकरार रखी, लेकिन जीत का अंतर घटकर सिर्फ 5,912 वोट रह गया। इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में मिलक विधानसभा सेगमेंट में भाजपा को सपा पर 19,853 वोट की बढ़त मिली।

मिलक विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभामिलक
विधानसभा संख्या38
जिलारामपुर
लोकसभा क्षेत्ररामपुर
आरक्षणअनुसूचित जाति (SC)
वर्तमान विधायकराजबाला सिंह
पार्टीभारतीय जनता पार्टी
2022 जीत का अंतर5,912 वोट
2026 कुल मतदाता3,26,397
पुरुष मतदाता1,78,622
महिला मतदाता1,47,761
अन्य14
प्रमुख सामाजिक समूहमुस्लिम, दलित, सैनी, जाट, ब्राह्मण व अन्य OBC
क्षेत्रीय चरित्रमुख्य रूप से ग्रामीण
प्रमुख मुद्देकृषि, गन्ना, रोजगार, सड़क, बिजली, सिंचाई, शिक्षा और ग्रामीण विकास

मिलक विधानसभा का मौजूदा स्वरूप 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया और 2012 में यहां पहला विधानसभा चुनाव हुआ। यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है तथा रामपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।

Milak Assembly Caste Equations का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, लेकिन पुराने चुनावी आकलनों में यहां हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव लगभग बराबरी के आसपास माना गया है। मुस्लिम मतदाता सबसे बड़े सामाजिक समूहों में हैं, जबकि हिंदू मतदाताओं के भीतर दलित, ब्राह्मण, सैनी और जाट समुदायों को चुनावी रूप से महत्वपूर्ण बताया जाता रहा है।

2011 की जनगणना आधारित विधानसभा प्रोफाइल में क्षेत्र की अनुसूचित जाति आबादी करीब 22.52 प्रतिशत बताई गई है। इसी प्रोफाइल में क्षेत्र का करीब 86.33 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण आबादी वाला बताया गया है। यह मौजूदा जातिवार वोटर प्रतिशत नहीं है, लेकिन सीट के सामाजिक और ग्रामीण चरित्र का महत्वपूर्ण संकेत देता है।

मिलक विधानसभा का सामाजिक चुनावी समीकरण

सामाजिक समूहचुनावी भूमिका
मुस्लिमसबसे बड़े और निर्णायक समूहों में
अनुसूचित जाति/दलितSC आरक्षित सीट होने से प्रत्याशी चयन और वोट दोनों में अहम
सैनीगैर-यादव OBC समीकरण में महत्वपूर्ण
जाटग्रामीण और किसान राजनीति में प्रभाव
ब्राह्मणगैर-मुस्लिम सवर्ण वोट का महत्वपूर्ण हिस्सा
अन्य OBCकरीबी मुकाबले में निर्णायक
वैश्य व अन्य सवर्णकस्बाई और बाजार क्षेत्रों में प्रभाव

नोट: विधानसभा स्तर पर जाति और धर्म के अनुसार 2026 की आधिकारिक मतदाता संख्या उपलब्ध नहीं है। इसलिए सामाजिक समूहों की स्थिति पुराने चुनावी आकलनों, जनगणना आधारित प्रोफाइल और पिछले चुनावों के मतदान व्यवहार के आधार पर समझी जानी चाहिए।

2026 में मिलक विधानसभा में 3,26,397 मतदाता

10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार मिलक विधानसभा में कुल 3,26,397 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 1,78,622 पुरुष, 1,47,761 महिला और 14 अन्य मतदाता हैं।

मतदाता वर्गसंख्या
पुरुष1,78,622
महिला1,47,761
अन्य14
कुल3,26,397

SIR से पहले 27 अक्टूबर 2025 की सूची में मिलक विधानसभा में 3,69,649 मतदाता थे। जनवरी 2026 की ड्राफ्ट सूची में संख्या घटकर 3,12,017 रह गई। दावा-आपत्ति और सत्यापन के बाद 14,380 मतदाता और जुड़े तथा अंतिम संख्या 3,26,397 पहुंची। प्री-SIR सूची से अंतिम सूची तक 43,252 मतदाताओं की शुद्ध कमी दर्ज हुई।

SIR चरणमतदाता
27 अक्टूबर 20253,69,649
6 जनवरी 2026 ड्राफ्ट3,12,017
ड्राफ्ट के बाद बढ़े मतदाता14,380
10 अप्रैल 2026 अंतिम सूची3,26,397
शुद्ध कमी43,252

यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 2022 या 2024 के बूथवार वोट और पुराने जातीय अनुमान अब केवल संदर्भ दे सकते हैं। वास्तविक रणनीति 2026 की नई सूची के आधार पर ही बनानी होगी।

मुस्लिम मतदाता मिलक में कितना बड़ा फैक्टर?

मिलक को लंबे समय से बड़ी मुस्लिम मौजूदगी वाली सीट माना जाता रहा है। पुराने चुनावी आकलनों में यहां हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं का अनुपात लगभग आधा-आधा बताया गया था। इसे 2026 की मौजूदा आधिकारिक धार्मिक संरचना नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन इससे सीट के राजनीतिक चरित्र का अंदाजा मिलता है।

यही कारण है कि सपा के लिए मुस्लिम वोट इस सीट का बड़ा चुनावी आधार बन सकता है। लेकिन मिलक SC आरक्षित सीट है, इसलिए केवल मुस्लिम वोटों की एकजुटता पर्याप्त नहीं होती। पार्टी को दलित और दूसरे OBC-सवर्ण समुदायों से भी समर्थन जोड़ना पड़ता है।

2012 में सपा की जीत इसी व्यापक गठजोड़ की ओर संकेत करती है, जबकि 2017 और 2022 में भाजपा गैर-मुस्लिम सामाजिक समूहों के बड़े हिस्से के साथ अनुसूचित जाति मतदाताओं में भी मजबूत समर्थन हासिल करने में सफल रही।

2027 में यदि मुस्लिम वोट एक प्रमुख विपक्षी उम्मीदवार की ओर बड़े स्तर पर जाता है और साथ में दलित-OBC वोट का हिस्सा जुड़ता है तो भाजपा के लिए मुकाबला कठिन हो सकता है। वहीं मुस्लिम वोटों में विभाजन भाजपा को फायदा दे सकता है।

SC आरक्षित सीट होने से दलित वोट क्यों सबसे खास?

मिलक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा है। इसका अर्थ है कि प्रत्याशी अनुसूचित जाति वर्ग से ही होंगे, लेकिन सभी जाति और धर्म के मतदाता चुनाव में मतदान करेंगे।

पुरानी जनगणना आधारित प्रोफाइल में अनुसूचित जाति आबादी करीब 22.52 प्रतिशत बताई गई है। यह सीट के सबसे बड़े सामाजिक समूहों में से एक है।

इस कारण भाजपा, सपा और बसपा के बीच केवल मुस्लिम या OBC वोटों की लड़ाई नहीं है। दलित मतदाताओं के भीतर किस प्रत्याशी की स्वीकार्यता अधिक है, यह चुनाव का केंद्रीय सवाल रहता है।

2022 में बसपा के सुरेंद्र सिंह सागर ने 31,492 वोट हासिल किए थे। यह भाजपा की 5,912 वोट की जीत के अंतर से पांच गुना से भी ज्यादा था। यानी बसपा के दलित आधार में कुछ हजार वोट का बदलाव भी भाजपा-सपा के मुकाबले की दिशा बदल सकता था।

बसपा का दलित वोट किसका समीकरण बिगाड़ेगा?

मिलक में बसपा का वोट शेयर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। 2017 में बसपा के राधेश्याम राही ने 39,271 वोट, यानी 18 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए थे। 2022 में बसपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह सागर को 31,492 वोट और 13.86 प्रतिशत मत मिले।

चुनावबसपा वोट
201234,964
201739,271
202231,492

इन तीन चुनावों में बसपा लगातार 30 हजार से अधिक वोट हासिल करती रही है। इसलिए उसे सिर्फ तीसरे स्थान की पार्टी मानना मिलक का पूरा चुनावी गणित नहीं बताता।

अगर 2027 में बसपा अपने परंपरागत दलित आधार को मजबूत करती है तो भाजपा और सपा दोनों की चुनौती बढ़ेगी। अगर उसका वोट कमजोर होता है तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि वे मतदाता भाजपा की ओर जाते हैं या सपा के साथ जुड़ते हैं।

सैनी मतदाता गैर-यादव OBC गणित की कुंजी

मिलक के पुराने सामाजिक आकलनों में सैनी मतदाताओं को निर्णायक समुदायों में गिना जाता रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सैनी समाज गैर-यादव OBC राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भाजपा के लिए सैनी और दूसरे गैर-यादव OBC समूहों को दलित और सवर्ण मतदाताओं के साथ जोड़ना उसके जीत के मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

सपा की कोशिश मुस्लिम मतदाताओं और अनुसूचित जाति वोटों के साथ OBC समुदायों में अतिरिक्त समर्थन जुटाने की होगी।

2022 में दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के बीच सिर्फ 5,912 वोट का अंतर रहा था। ऐसे में सैनी या किसी अन्य मध्यम आकार के समुदाय में कुछ हजार वोटों की दिशा बदलने से सीट आसानी से पलट सकती है।

जाट और किसान वोट भी महत्वपूर्ण

मिलक का करीब 86 प्रतिशत क्षेत्रीय चरित्र ग्रामीण माना गया है। इसलिए यहां जातीय समीकरण के साथ किसान राजनीति को अलग करके नहीं देखा जा सकता।

पुराने सामाजिक आकलनों में जाट मतदाताओं की भी अच्छी मौजूदगी बताई गई है। इसके अलावा मुस्लिम, सैनी और अनुसूचित जाति के बड़ी संख्या में परिवार कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं।

गन्ना मूल्य और भुगतान, गेहूं-धान खरीद, सिंचाई, बिजली, खाद-बीज, आवारा पशु, ग्रामीण सड़क और मंडी व्यवस्था जैसे मुद्दे अलग-अलग जातीय समूहों को एक समान प्रभावित कर सकते हैं।

इसलिए 2027 में किसान मुद्दों का असर बढ़ता है तो जाट वोट के साथ दूसरे ग्रामीण समुदायों के मतदान व्यवहार में भी बदलाव हो सकता है।

ब्राह्मण मतदाता भी क्यों हैं महत्वपूर्ण?

पुराने चुनावी आकलनों में ब्राह्मण समुदाय को मिलक के महत्वपूर्ण हिंदू सामाजिक समूहों में शामिल किया गया है।

भाजपा के व्यापक सामाजिक गठजोड़ में ब्राह्मण मतदाता महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं। लेकिन मिलक जैसी करीबी सीट पर प्रत्याशी, स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय मुद्दे इस वोट बैंक के भीतर भी बदलाव ला सकते हैं।

सपा अगर मुस्लिम-दलित आधार के साथ सवर्ण वोटों का छोटा हिस्सा भी जोड़ती है तो उसका असर बड़े जीत-हार अंतर से अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि 2022 का पूरा चुनाव केवल 5,912 वोट से तय हुआ था।

2022 में सिर्फ 5,912 वोट से जीती भाजपा

2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा की राजबाला सिंह को 97,948 वोट मिले। उनका वोट शेयर 43.11 प्रतिशत रहा।

समाजवादी पार्टी के विजय सिंह ने 92,036 वोट और 40.50 प्रतिशत वोट हासिल किए। भाजपा ने केवल 5,912 वोट के अंतर से चुनाव जीता।

उम्मीदवारपार्टीवोटवोट शेयर
राजबाला सिंहभाजपा97,94843.11%
विजय सिंहसपा92,03640.50%
सुरेंद्र सिंह सागरबसपा31,49213.86%
कुमार एकलव्यकांग्रेस2,8361.25%
NOTA1,4790.65%
जीत का अंतर5,9122.60%

2022 का परिणाम मिलक के जातीय समीकरण का सबसे महत्वपूर्ण संकेत है। भाजपा और सपा के वोट शेयर में केवल 2.61 प्रतिशत का अंतर था, जबकि बसपा के पास लगभग 14 प्रतिशत वोट था।

यानी तीसरे दल के वोट बैंक में छोटा बदलाव भी 2027 में सीट का विजेता बदल सकता है।

2017 में भाजपा ने 16,667 वोट से पलटी थी सीट

2017 में भाजपा की राजबाला को 89,861 वोट मिले थे। सपा के तत्कालीन विधायक विजय सिंह को 73,194 वोट मिले और बसपा के राधेश्याम राही ने 39,271 वोट हासिल किए।

भाजपा ने सपा को 16,667 वोट के अंतर से हराकर सीट अपने नाम की थी।

उम्मीदवारपार्टीवोट
राजबालाभाजपा89,861
विजय सिंहसपा73,194
राधेश्याम राहीबसपा39,271
जीत का अंतर16,667

2017 से 2022 के बीच भाजपा का वोट करीब 8 हजार बढ़ा, लेकिन सपा का वोट लगभग 19 हजार बढ़ा। इसी वजह से भाजपा की जीत का अंतर 16,667 से घटकर सिर्फ 5,912 रह गया।

यह ट्रेंड 2027 के लिए महत्वपूर्ण है। भाजपा ने सीट दो बार लगातार जीती जरूर है, लेकिन 2022 में सपा काफी करीब पहुंच चुकी थी।

2012 में सपा के विजय सिंह ने जीती थी सीट

2008 के परिसीमन के बाद 2012 में मिलक के मौजूदा स्वरूप में पहला विधानसभा चुनाव हुआ।

सपा के विजय सिंह को 56,798 वोट मिले। कांग्रेस के चंद्रपाल सिंह को 36,635 वोट और बसपा के राधेश्याम को 34,964 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी को 26,978 वोट मिले थे।

विजय सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार को 20,163 वोटों से हराकर मिलक के पहले विधायक के रूप में जीत दर्ज की।

उम्मीदवारपार्टी2012 वोट
विजय सिंहसपा56,798
चंद्रपाल सिंहकांग्रेस36,635
राधेश्यामबसपा34,964
काशीरामभाजपा26,978
जीत का अंतर20,163

2012 में भाजपा चौथे स्थान पर थी, लेकिन सिर्फ पांच साल बाद 2017 में पार्टी लगभग 90 हजार वोट हासिल कर विजेता बन गई। यह बदलाव बताता है कि मिलक में सामाजिक वोट किसी एक पार्टी के स्थायी कब्जे में नहीं हैं।

2012 से 2022 तक कैसे बदला मिलक का चुनावी गणित?

चुनावविजेतापार्टीवोटजीत का अंतर
2012विजय सिंहसपा56,79820,163
2017राजबालाभाजपा89,86116,667
2022राजबाला सिंहभाजपा97,9485,912

मिलक में अब तक मौजूदा परिसीमन के तहत तीन विधानसभा चुनाव हुए हैं। पहले चुनाव में सपा और अगले दो चुनावों में भाजपा जीती।

इन नतीजों में सबसे दिलचस्प बदलाव जीत के अंतर का है। भाजपा की 2017 की 16 हजार से ज्यादा की बढ़त 2022 में छह हजार से भी कम रह गई।

इसलिए 2027 में मिलक को भाजपा की सुरक्षित सीट मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन लगातार दो जीत के कारण पार्टी का मजबूत संगठनात्मक और चुनावी आधार जरूर मौजूद है।

2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को 19,853 वोट की बढ़त

2024 लोकसभा चुनाव के दौरान मिलक विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने 2022 की तुलना में अपनी बढ़त बढ़ाई।

भाजपा उम्मीदवार को मिलक विधानसभा सेगमेंट से 98,197 वोट, जबकि सपा को 78,344 वोट मिले। भाजपा को 19,853 वोट की बढ़त मिली।

चुनावभाजपासपाबढ़त
विधानसभा 202297,94892,036भाजपा +5,912
लोकसभा 2024, मिलक सेगमेंट98,19778,344भाजपा +19,853

2024 में भाजपा का वोट लगभग 2022 के स्तर पर ही बना रहा, जबकि सपा का वोट कम हुआ। पुराने विधानसभा प्रोफाइल के मुताबिक 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिलक में 46.84 प्रतिशत, सपा को 37.37 प्रतिशत और बसपा को 14.30 प्रतिशत वोट मिले।

यह भाजपा के लिए सकारात्मक संकेत था, लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाव का मतदान व्यवहार अलग हो सकता है। इसलिए 2024 की 19 हजार की बढ़त को 2027 की निश्चित तस्वीर नहीं माना जा सकता।

भाजपा का जीत का गणित क्या है?

मिलक में भाजपा के पास लगातार दो विधानसभा जीत और 2024 लोकसभा चुनाव की स्पष्ट बढ़त है।

पार्टी के लिए सबसे मजबूत रणनीति दलित मतदाताओं के एक हिस्से के साथ सैनी, जाट, ब्राह्मण और दूसरे गैर-मुस्लिम OBC-सवर्ण समूहों को एक साथ बनाए रखना होगी।

मुस्लिम मतों में विभाजन भी भाजपा के लिए अनुकूल परिस्थिति बना सकता है।

राजबाला सिंह का लगातार दो बार चुनाव जीतना प्रत्याशी की व्यक्तिगत पहचान और स्थानीय संगठन को भी भाजपा के पक्ष में जोड़ता है।

लेकिन 2022 की सिर्फ 5,912 वोट की जीत यह भी बताती है कि पार्टी अपने मौजूदा वोट बैंक में मामूली गिरावट भी आसानी से वहन नहीं कर सकती।

सपा के लिए सीट पलटने का रास्ता

समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत 2022 का परिणाम है। विजय सिंह 92,036 वोट लेकर भाजपा से सिर्फ 5,912 वोट पीछे रहे थे।

सपा के लिए मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा समर्थन सीट की शुरुआती ताकत बन सकता है। लेकिन SC आरक्षित सीट होने के कारण दलित मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ बनाए बिना जीत मुश्किल होगी।

इसके अलावा सैनी, जाट और दूसरे OBC समूहों में अतिरिक्त वोट हासिल करना जरूरी होगा।

2017 से 2022 के बीच सपा का वोट करीब 73 हजार से बढ़कर 92 हजार पहुंचा था। यदि पार्टी यह आधार कायम रखते हुए बसपा के दलित वोट या दूसरे समूहों में कुछ हजार अतिरिक्त मत जोड़ती है तो मुकाबला पलट सकता है।

बसपा के प्रदर्शन पर क्यों टिकी भाजपा-सपा की नजर?

2022 में भाजपा और सपा के बीच जीत का अंतर सिर्फ 5,912 वोट था, जबकि बसपा को 31,492 वोट मिले।

इसीलिए बसपा का भविष्य का वोट ट्रांसफर सबसे बड़े स्विंग फैक्टर में शामिल है।

यदि बसपा मजबूत प्रत्याशी के साथ अपने दलित आधार को बनाए रखती है तो मुकाबला फिर त्रिकोणीय रहेगा। यदि उसका वोट कमजोर होता है तो भाजपा और सपा दोनों यह वोट हासिल करने की कोशिश करेंगे।

सपा को बसपा के दलित वोट का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा भी मिल जाए तो 2022 का अंतर खत्म हो सकता है। दूसरी तरफ यही वोट भाजपा की तरफ जाता है तो पार्टी की स्थिति 2024 वाले लोकसभा पैटर्न की तरह मजबूत हो सकती है।

2026 SIR के बाद क्यों बदल गया पूरा बूथ गणित?

2024 की मतदाता सूची में मिलक विधानसभा में लगभग 3,62,388 मतदाता दर्ज थे। अक्टूबर 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3,69,649 पहुंची थी। लेकिन 2026 की अंतिम SIR सूची में कुल वोटर 3,26,397 रह गए।

वर्ष/चरणमतदाता
20123,07,708
2022लगभग 3.81 लाख
20243,62,388
अक्टूबर 20253,69,649
अप्रैल 20263,26,397

2026 में हुए बदलाव का अर्थ है कि राजनीतिक दल पुराने बूथवार वोटों को नई मतदाता सूची से मिलाए बिना सही चुनावी रणनीति नहीं बना सकते।

यह दावा करना भी उचित नहीं होगा कि सूची में कमी किसी विशेष जाति या धर्म को ज्यादा प्रभावित करती है, जब तक बूथ स्तर के आधिकारिक आंकड़े इसकी पुष्टि न करें।

2027 में इन सात समीकरणों पर रहेगी नजर

2027 विधानसभा चुनाव में मिलक की लड़ाई सात प्रमुख चुनावी सवालों के आसपास घूम सकती है।

पहला सवाल मुस्लिम वोटों की दिशा का होगा। पुराने आकलन में यह सीट की आबादी का बेहद बड़ा हिस्सा माना गया है। अगर मुस्लिम मतदाता एक प्रमुख विपक्षी उम्मीदवार की तरफ बड़े स्तर पर जाते हैं तो मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है।

दूसरा और सबसे खास फैक्टर अनुसूचित जाति वोट होगा। सीट SC आरक्षित है और पुराने जनसांख्यिकीय आंकड़ों में अनुसूचित जाति आबादी 22 प्रतिशत से अधिक बताई गई है।

तीसरा, बसपा अपने परंपरागत दलित वोट को किस स्तर तक कायम रखती है। 2022 के 31 हजार से अधिक बसपा वोट भाजपा-सपा दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

चौथा, सैनी और दूसरे गैर-यादव OBC मतदाताओं का रुख होगा।

पांचवां जाट और व्यापक किसान वोट होगा। करीब 86 प्रतिशत ग्रामीण चरित्र वाली सीट पर कृषि और ग्रामीण मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

छठा प्रत्याशी चयन होगा। 2017 और 2022 दोनों बार भाजपा की राजबाला और सपा के विजय सिंह के बीच मुकाबला रहा। नए चेहरे आने पर जातीय वोट ट्रांसफर का पैटर्न भी बदल सकता है।

सातवां और सबसे नया फैक्टर 2026 की 3,26,397 मतदाताओं वाली नई सूची है। अक्टूबर 2025 के मुकाबले 43,252 की शुद्ध कमी ने पुराने बूथ गणित को बदल दिया है।

2012 में सपा की जीत, 2017 में भाजपा की 16,667 वोट की बढ़त, 2022 में सिर्फ 5,912 वोट का अंतर और 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की 19,853 वोट की बढ़त—ये चार आंकड़े बताते हैं कि मिलक का चुनावी झुकाव हाल के वर्षों में भाजपा की ओर रहा है, लेकिन सीट पूरी तरह एकतरफा नहीं है।

उत्तर प्रदेश की सभी सीटों की सामाजिक संरचना और चुनावी गणित जानने के लिए उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण की विस्तृत कवरेज पढ़ी जा सकती है।

प्रत्याशियों, टिकट वितरण, गठबंधन और सीटवार राजनीतिक रणनीति से जुड़े अपडेट के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव की विस्तृत कवरेज पढ़ें।

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