Rampur Assembly Caste Equations: रामपुर विधानसभा के जातिगत समीकरण 2027

Published on 31 जुल॰ 2026

रामपुर जिले की रामपुर विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक सीटों में शामिल रही है। Rampur Assembly Caste Equations की बात करें तो मुस्लिम मतदाता यहां सबसे बड़ा और निर्णायक सामाजिक समूह माने जाते हैं, जबकि वैश्य, लोधी, सैनी-मौर्य, अनुसूचित जाति, यादव, कायस्थ, ब्राह्मण और सिख मतदाताओं की भूमिका भी चुनावी नतीजे पर असर डालती है। 2026 की अंतिम SIR मतदाता सूची के मुताबिक रामपुर विधानसभा में अब कुल 3,20,090 मतदाता हैं। इनमें 1,70,549 पुरुष, 1,49,521 महिला और 20 अन्य मतदाता शामिल हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों की राय में, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के परिणाम राज्य के भविष्य के राजनीतिक एजेंडे को तय करेंगे।

रामपुर की राजनीति लंबे समय तक आजम खान के प्रभाव के इर्द-गिर्द घूमती रही, लेकिन दिसंबर 2022 के उपचुनाव में भाजपा के आकाश सक्सेना की जीत ने सीट के पुराने राजनीतिक पैटर्न को बदल दिया। इससे कुछ महीने पहले हुए 2022 के आम विधानसभा चुनाव में आजम खान ने भाजपा उम्मीदवार को 55,141 वोट से हराया था, लेकिन उसी वर्ष उपचुनाव में आकाश सक्सेना ने सपा के आसिम राजा को 34,136 वोट से पराजित कर सीट भाजपा के खाते में डाल दी। 2024 लोकसभा चुनाव में हालांकि रामपुर विधानसभा सेगमेंट में सपा फिर भाजपा से 37,820 वोट आगे रही।

रामपुर विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभारामपुर
विधानसभा संख्या37
जिलारामपुर
लोकसभा क्षेत्ररामपुर
आरक्षणसामान्य
वर्तमान विधायकआकाश सक्सेना
पार्टीभारतीय जनता पार्टी
वर्तमान विधायक का चुनावदिसंबर 2022 उपचुनाव
2022 आम चुनाव विजेतामोहम्मद आजम खान
2022 आम चुनाव जीत का अंतर55,141 वोट
2022 उपचुनाव जीत का अंतर34,136 वोट
2026 कुल मतदाता3,20,090
पुरुष मतदाता1,70,549
महिला मतदाता1,49,521
अन्य20
प्रमुख सामाजिक समूहमुस्लिम, वैश्य, लोधी, सैनी-मौर्य, दलित, यादव, सिख
सीट का चरित्रमुख्य रूप से शहरी
प्रमुख मुद्देरोजगार, व्यापार, नगरीय सुविधाएं, शिक्षा, सड़क, बिजली और स्थानीय विकास

रामपुर सामान्य विधानसभा सीट है और रामपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। वर्तमान स्वरूप में सीट मुख्य रूप से रामपुर नगर और आसपास के शहरी क्षेत्रों को समेटती है। पुराने निर्वाचन प्रोफाइल में इसे मुस्लिम बहुल और मुख्य रूप से शहरी विधानसभा बताया गया है।

Rampur Assembly Caste Equations में मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर हैं। पुराने चुनावी आकलनों में मुस्लिम हिस्सेदारी को करीब 52 प्रतिशत से 60-65 प्रतिशत तक बताया गया है। अलग-अलग आकलनों के अंतर का कारण वर्ष, मतदाता सूची और अनुमान लगाने की पद्धति अलग होना है। इसलिए 2026 में किसी एक प्रतिशत को मौजूदा आधिकारिक धार्मिक संरचना मानना सही नहीं होगा।

पुराने सीटवार आकलनों में हिंदू मतदाताओं के भीतर वैश्य और लोधी समुदाय को सबसे प्रभावशाली समूहों में गिना गया था। वैश्य करीब 35 से 40 हजार, लोधी लगभग 32 से 35 हजार, सैनी-मौर्य करीब 18 हजार, दलित लगभग 12 से 20 हजार और यादव मतदाता करीब 10 हजार बताए जाते रहे हैं। सिख मतदाताओं की हिस्सेदारी पुराने चुनावी आकलनों में करीब 3 प्रतिशत तक बताई गई थी।

रामपुर विधानसभा का पुराना अनुमानित सामाजिक समीकरण

सामाजिक समूहपुराने चुनावी आकलन में स्थिति
मुस्लिमलगभग 52% से 60-65% तक अलग-अलग अनुमान
वैश्यकरीब 35-40 हजार
लोधीकरीब 32-35 हजार
सैनी-मौर्यकरीब 18 हजार
अनुसूचित जाति/दलितकरीब 12-20 हजार
यादवकरीब 10 हजार
सिखपुराने अनुमान में करीब 3%
कायस्थ, ब्राह्मण व अन्यछोटे लेकिन करीबी मुकाबले में महत्वपूर्ण

नोट: ये जातिवार आंकड़े 2022 के आसपास के चुनावी अनुमानों पर आधारित हैं। 2026 SIR के बाद रामपुर की कुल मतदाता संख्या में बड़ा बदलाव हुआ है, इसलिए इन्हें वर्तमान आधिकारिक जातिवार संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

2026 में रामपुर विधानसभा में 3,20,090 मतदाता

2026 की अंतिम मतदाता सूची में रामपुर विधानसभा में कुल 3,20,090 मतदाता हैं। इनमें 1,70,549 पुरुष और 1,49,521 महिला मतदाता हैं। 20 मतदाता अन्य श्रेणी में दर्ज हैं।

मतदाता वर्ग2026 संख्या
पुरुष1,70,549
महिला1,49,521
अन्य20
कुल3,20,090

रामपुर जिले की पांचों विधानसभा सीटों में SIR के दौरान सबसे बड़ा बदलाव रामपुर विधानसभा में ही दर्ज हुआ। 27 अक्टूबर 2025 की सूची में यहां 3,92,948 मतदाता थे। जनवरी 2026 की ड्राफ्ट सूची में संख्या घटकर 2,86,182 हो गई। दावे-आपत्तियों और सुनवाई के बाद 33,897 मतदाता जुड़े और 10 अप्रैल 2026 की अंतिम सूची में संख्या 3,20,090 पहुंची।

SIR चरणमतदाता
27 अक्टूबर 20253,92,948
6 जनवरी 2026 ड्राफ्ट2,86,182
ड्राफ्ट के बाद बढ़े मतदाता33,897
10 अप्रैल 2026 अंतिम सूची3,20,090
प्री-SIR से शुद्ध कमी72,858

प्री-SIR सूची के मुकाबले अंतिम मतदाता संख्या में लगभग 18.5 प्रतिशत की शुद्ध कमी हुई। यह रामपुर जिले की किसी भी विधानसभा में सबसे बड़ी गिरावट रही। इसलिए 2022 के लगभग 3.88 लाख या 2024 के करीब 3.92 लाख वाले मतदाता आधार को 2027 के लिए सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

मुस्लिम वोट रामपुर में कितना निर्णायक?

रामपुर विधानसभा की राजनीति में मुस्लिम मतदाता लंबे समय से सबसे प्रभावशाली रहे हैं। पुराने अनुमानों में विधानसभा क्षेत्र के आधे से कहीं अधिक मतदाता मुस्लिम बताए गए हैं। मुस्लिम आबादी का घनत्व रामपुर शहर के पुराने इलाकों में और ज्यादा माना जाता है।

मुस्लिम समाज के भीतर पठान, अंसारी, तुर्क और अन्य बिरादरियों की मौजूदगी है। राजनीतिक स्तर पर पसमांदा मुस्लिम मतदाताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति भी पिछले चुनावों में खास चर्चा में रही। 2022 के उपचुनाव में भाजपा ने अपने पारंपरिक गैर-मुस्लिम आधार के साथ मुस्लिम मतदाताओं के एक हिस्से तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश की थी।

लेकिन रामपुर के चुनावी इतिहास से यह भी साफ है कि किसी समुदाय की आबादी को किसी एक पार्टी का निश्चित वोट मान लेना सही नहीं होगा। आम चुनाव, उपचुनाव, उम्मीदवार और मतदान प्रतिशत बदलने पर परिणाम में बड़ा अंतर दिखाई दिया है।

वैश्य मतदाता भाजपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

रामपुर विधानसभा में वैश्य समुदाय लंबे समय से प्रमुख गैर-मुस्लिम वोट बैंक माना जाता है। पुराने सामाजिक आकलनों में करीब 35 से 40 हजार वैश्य मतदाता बताए गए थे।

वर्तमान विधायक आकाश सक्सेना का सामाजिक और राजनीतिक आधार शहर के कारोबारी वर्ग से भी जुड़ा रहा है। रामपुर की शहरी अर्थव्यवस्था, बाजार और व्यापारिक गतिविधियों के कारण व्यापारी मतदाताओं की भूमिका दूसरे ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

सड़क, यातायात, बिजली, बाजार की सुविधाएं, उद्योग, रोजगार और स्थानीय व्यापार से जुड़े मुद्दे इस वर्ग के मतदान व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

2027 में भाजपा के लिए वैश्य मतदाताओं का समर्थन बनाए रखना उसके मुख्य सामाजिक आधारों में शामिल रहेगा।

लोधी वोट भी भाजपा-सपा की रणनीति के केंद्र में

रामपुर विधानसभा में पुराने अनुमानों के मुताबिक लगभग 32 से 35 हजार लोधी मतदाता हैं। वैश्य समाज के साथ लोधी मतदाताओं को सीट का सबसे प्रभावशाली गैर-मुस्लिम वोट बैंक माना जाता रहा है।

रामपुर जिले की व्यापक राजनीति में लोधी समुदाय पहले से महत्वपूर्ण रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने घनश्याम सिंह लोधी को प्रत्याशी बनाया था। हालांकि रामपुर विधानसभा सेगमेंट में सपा को बड़ी बढ़त मिली, लेकिन लोधी समुदाय भाजपा के सामाजिक गणित का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा।

सपा के लिए चुनौती यह है कि मुस्लिम मतदाताओं के साथ लोधी और दूसरे OBC समूहों का एक हिस्सा भी जोड़ सके। 2027 में यदि गैर-मुस्लिम OBC मतों में बड़ा बदलाव होता है तो सीट का मुकाबला पिछले चुनावों से अलग हो सकता है।

सैनी-मौर्य और दूसरे OBC वोट भी निर्णायक

पुराने चुनावी आकलनों में सैनी और मौर्य समुदाय को मिलाकर करीब 18 हजार मतदाता बताए गए थे। संख्या वैश्य या लोधी समाज से कम है, लेकिन दो बड़े दलों के बीच करीबी मुकाबले की स्थिति में यह वोट बैंक निर्णायक बन सकता है।

भाजपा की उत्तर प्रदेश रणनीति में गैर-यादव OBC समुदाय महत्वपूर्ण रहे हैं। दूसरी तरफ सपा PDA राजनीति के जरिए पिछड़े वर्गों में अपने आधार का विस्तार करने की कोशिश करती रही है।

अगर सैनी-मौर्य और दूसरे छोटे OBC समूह एक तरफ बड़ी संख्या में जाते हैं तो वे वैश्य-लोधी या मुस्लिम वोट के बड़े ब्लॉक के साथ मिलकर चुनावी संतुलन बदल सकते हैं।

दलित मतदाता किस तरफ जाएंगे?

पुराने सामाजिक आकलनों में अनुसूचित जाति मतदाताओं की संख्या करीब 12 से 20 हजार बताई गई है। दूसरे व्यापक निर्वाचन प्रोफाइल में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी लगभग 13 प्रतिशत के आसपास बताई गई है, हालांकि यह अलग आधार का अनुमान है।

रामपुर में दलित वोट बसपा, भाजपा और सपा तीनों के लिए महत्वपूर्ण है।

बसपा का परंपरागत आधार दलित समाज रहा है। यदि पार्टी मजबूत प्रत्याशी उतारती है तो वह इस वोट को अपने साथ रखने की कोशिश करेगी। भाजपा गैर-जाटव दलित मतदाताओं में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहेगी, जबकि सपा PDA के जरिए दलित समर्थन बढ़ाने का प्रयास कर सकती है।

2022 आम विधानसभा चुनाव में भाजपा और सपा के बीच 55 हजार से ज्यादा वोट का अंतर था, लेकिन उपचुनाव में समीकरण पूरी तरह बदल गया। ऐसे में दलित और OBC वोटों के छोटे बदलाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

रामपुर मुख्य रूप से शहरी विधानसभा

रामपुर विधानसभा का चुनावी चरित्र जिले की स्वार, चमरौआ या बिलासपुर जैसी कृषि प्रधान सीटों से अलग है। यह मुख्य रूप से शहरी विधानसभा है और रामपुर नगर व पनवड़िया नगर निकाय क्षेत्र इसके अहम हिस्से हैं।

यही कारण है कि यहां रोजगार, उद्योग, व्यापार, सड़क, ट्रैफिक, बिजली, जलनिकासी, शिक्षा और शहरी बुनियादी ढांचे के मुद्दे महत्वपूर्ण रहते हैं।

रामपुर की अर्थव्यवस्था में परंपरागत उद्योग, व्यापार और छोटे कारोबार का पुराना स्थान रहा है। शहर की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत भी स्थानीय राजनीति का हिस्सा बनती रही है।

शहरी सीट होने के कारण मतदान प्रतिशत भी खास महत्व रखता है। 2022 आम चुनाव में मतदान लगभग 56.65 प्रतिशत था, जबकि दिसंबर 2022 उपचुनाव में मतदान बहुत नीचे चला गया था। यही अंतर चुनावी परिणाम बदलने वाले बड़े कारकों में शामिल रहा।

2022 में आजम खान ने 55,141 वोट से जीती थी सीट

2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के मोहम्मद आजम खान को 1,31,225 वोट मिले। भाजपा के आकाश सक्सेना को 76,084 वोट हासिल हुए।

आजम खान ने चुनाव 55,141 वोटों के अंतर से जीता था।

उम्मीदवारपार्टीवोट
मोहम्मद आजम खानसपा1,31,225
आकाश सक्सेनाभाजपा76,084
अन्य प्रत्याशीविभिन्नशेष
जीत का अंतर55,141

इस नतीजे में सपा ने बड़े अंतर से सीट जीती और आजम खान ने एक बार फिर रामपुर में अपनी मजबूत व्यक्तिगत पकड़ साबित की।

लेकिन कुछ महीने बाद हुए उपचुनाव में परिणाम बिल्कुल उलट गया।

दिसंबर 2022 उपचुनाव में भाजपा ने पलट दिया परिणाम

आजम खान की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद दिसंबर 2022 में रामपुर विधानसभा उपचुनाव हुआ।

भाजपा के आकाश सक्सेना को 81,432 वोट, जबकि समाजवादी पार्टी के आसिम राजा को 47,296 वोट मिले।

आकाश सक्सेना ने 34,136 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

उम्मीदवारपार्टीवोट
आकाश सक्सेनाभाजपा81,432
आसिम राजासपा47,296
जीत का अंतर34,136

यह जीत इसलिए ऐतिहासिक रही क्योंकि रामपुर विधानसभा में भाजपा ने पहली बार सीट जीती। इससे पहले सीट पर लंबे समय तक मुस्लिम उम्मीदवारों का वर्चस्व रहा था।

हालांकि उपचुनाव में मतदान आम विधानसभा चुनाव के मुकाबले बेहद कम था। इसलिए 2027 की रणनीति में 2022 आम चुनाव और 2022 उपचुनाव—दोनों को अलग परिस्थितियों के चुनाव के रूप में देखना जरूरी होगा।

2017 में भी आजम खान ने भाजपा को बड़े अंतर से हराया

2017 विधानसभा चुनाव में आजम खान को 1,02,100 वोट मिले थे। भाजपा के शिव बहादुर सक्सेना को 55,258 वोट मिले।

सपा ने चुनाव 46,842 वोट से जीता।

चुनावविजेतापार्टीजीत का अंतर
2012मोहम्मद आजम खानसपा63,269
2017मोहम्मद आजम खानसपा46,842
2019 उपचुनावतजीन फातमासपा7,716
2022 आम चुनावमोहम्मद आजम खानसपा55,141
2022 उपचुनावआकाश सक्सेनाभाजपा34,136

रामपुर के हालिया चुनावी इतिहास में सपा का दबदबा साफ दिखाई देता है, लेकिन दिसंबर 2022 की भाजपा जीत ने इस सीट को अब पूरी तरह एकतरफा राजनीतिक क्षेत्र मानने की पुरानी धारणा बदल दी है।

2024 लोकसभा चुनाव में सपा फिर 37,820 वोट आगे

2024 लोकसभा चुनाव में रामपुर विधानसभा सेगमेंट में समाजवादी पार्टी ने भाजपा पर फिर बड़ी बढ़त हासिल की।

सपा उम्मीदवार को यहां 1,03,095 वोट मिले, जबकि भाजपा को 65,275 वोट मिले। सपा की बढ़त 37,820 वोट रही।

2024 लोकसभा: रामपुर विधानसभा सेगमेंटवोट
समाजवादी पार्टी1,03,095
भाजपा65,275
सपा की बढ़त37,820

यह परिणाम दिसंबर 2022 के विधानसभा उपचुनाव से बिल्कुल अलग था। उपचुनाव में भाजपा 34 हजार से अधिक वोट से आगे थी, जबकि लगभग डेढ़ साल बाद लोकसभा चुनाव में सपा करीब 38 हजार वोट आगे निकल गई।

इससे साफ है कि रामपुर में मतदान व्यवहार प्रत्याशी, चुनाव के स्तर, मतदान प्रतिशत और राजनीतिक माहौल के हिसाब से तेजी से बदल सकता है।

2026 SIR ने सबसे ज्यादा बदला रामपुर का बूथ गणित

2027 चुनाव की दृष्टि से रामपुर का सबसे बड़ा नया फैक्टर मतदाता सूची में आया बदलाव है।

2024 में रामपुर विधानसभा में करीब 3,91,993 मतदाता दर्ज थे। अक्टूबर 2025 की सूची में संख्या 3,92,948 थी, लेकिन अप्रैल 2026 की अंतिम सूची में केवल 3,20,090 मतदाता रह गए।

वर्ष/चरणकुल मतदाता
20173,81,861
20223,88,175
20243,91,993
अक्टूबर 20253,92,948
अप्रैल 20263,20,090

यानी 2022 या 2024 की बूथवार रणनीति को सीधे 2027 पर लागू करना जोखिम भरा होगा।

यह भी जरूरी है कि मतदाता सूची में कमी को किसी जाति या धर्म से जोड़कर न देखा जाए, जब तक बूथवार आधिकारिक डेटा इसकी पुष्टि न करे। उपलब्ध आंकड़े सिर्फ कुल मतदाता संख्या में बदलाव बताते हैं।

भाजपा के लिए क्या है 2027 का सामाजिक गणित?

भाजपा के लिए रामपुर में सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष यह है कि वह दिसंबर 2022 में उस सीट को जीत चुकी है जिसे लंबे समय तक पार्टी की मुश्किल सीट माना जाता था।

2027 में पार्टी के लिए वैश्य, लोधी, सैनी-मौर्य, दलित, कायस्थ, ब्राह्मण और दूसरे गैर-मुस्लिम समूहों के वोटों का अधिकतम एकीकरण महत्वपूर्ण होगा।

इसके साथ पसमांदा और दूसरे मुस्लिम मतदाताओं में सीमित लेकिन अतिरिक्त समर्थन हासिल करने की कोशिश भी उसके चुनावी गणित का हिस्सा हो सकती है।

आकाश सक्सेना की वर्तमान विधायक के रूप में व्यक्तिगत पहचान भी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण होगी।

हालांकि 2024 लोकसभा सेगमेंट में 37 हजार से अधिक वोट से पीछे रहना बताता है कि पार्टी के सामने अभी भी बड़ा सामाजिक अंतर भरने की चुनौती है।

सपा के लिए क्या है जीत का रास्ता?

समाजवादी पार्टी के लिए रामपुर में सबसे बड़ा आधार मुस्लिम मतदाता हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्र से मिली 37,820 वोट की बढ़त पार्टी के लिए मजबूत संकेत है।

सपा की रणनीति मुस्लिम वोटों को बड़े स्तर पर एकजुट रखने के साथ दलित, यादव और दूसरे OBC समुदायों से अतिरिक्त समर्थन जुटाने की हो सकती है।

रामपुर में उम्मीदवार चयन भी बेहद अहम रहेगा। पिछले दशकों में आजम खान की व्यक्तिगत पकड़ सपा के वोट बैंक से अलग एक बड़ा राजनीतिक फैक्टर रही है।

2027 में पार्टी प्रत्याशी के नाम और स्थानीय स्वीकार्यता से यह तय हो सकता है कि 2024 वाला वोट ट्रांसफर विधानसभा चुनाव में किस हद तक दोहराया जाता है।

बसपा का दलित वोट बना सकता है मुकाबला त्रिकोणीय

रामपुर में बसपा मुख्य मुकाबले से पिछले वर्षों में पीछे रही है, लेकिन दलित मतदाताओं के कारण उसकी भूमिका समाप्त नहीं होती।

यदि बसपा अपने परंपरागत दलित वोट के साथ मुस्लिम मतदाताओं का कुछ हिस्सा जोड़ती है तो इसका सीधा असर सपा के सामाजिक समीकरण पर पड़ सकता है।

दूसरी तरफ अगर दलित वोट बसपा से भाजपा की ओर जाता है तो भाजपा का गैर-मुस्लिम गठजोड़ मजबूत होगा।

2027 में बसपा के उम्मीदवार की जातीय पहचान और स्थानीय पकड़ इसलिए भाजपा-सपा मुकाबले के लिए भी अहम होगी।

2027 में इन सात समीकरणों पर रहेगी नजर

2027 के विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट का फैसला कई सामाजिक और राजनीतिक कारकों से प्रभावित हो सकता है।

सबसे बड़ा सवाल मुस्लिम वोटों की एकजुटता का होगा। अगर मुस्लिम वोट 2024 जैसी दिशा में एक प्रमुख विपक्षी उम्मीदवार के साथ जाता है तो सपा को मजबूत आधार मिल सकता है।

दूसरा, भाजपा वैश्य और लोधी मतदाताओं को किस हद तक अपने साथ रखती है।

तीसरा, सैनी-मौर्य और दूसरे गैर-यादव OBC मतदाताओं का रुख महत्वपूर्ण होगा।

चौथा, दलित वोट बसपा, भाजपा और सपा में किस अनुपात में बंटता है।

पांचवां, प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ होगी। रामपुर में उम्मीदवार का व्यक्तित्व कई बार पार्टी के सामान्य वोट से ज्यादा असरदार रहा है।

छठा, मतदान प्रतिशत बेहद महत्वपूर्ण होगा। 2022 आम चुनाव और उसी वर्ष उपचुनाव के नतीजों में बड़ा अंतर कम मतदान के साथ दिखाई दिया था।

सातवां और सबसे नया फैक्टर 2026 की 3,20,090 मतदाताओं वाली नई सूची है। प्री-SIR आधार से 72,858 मतदाताओं की शुद्ध कमी के बाद राजनीतिक दलों को बूथ स्तर पर अपना पूरा सामाजिक गणित दोबारा तैयार करना होगा।

2022 के आम चुनाव में सपा की 55,141 वोट की जीत, कुछ महीने बाद भाजपा की 34,136 वोट की उपचुनाव जीत और 2024 लोकसभा चुनाव में सपा की 37,820 वोट की बढ़त—इन तीन नतीजों से साफ है कि रामपुर अब ऐसा क्षेत्र है जहां किसी एक चुनाव के परिणाम से 2027 की तस्वीर तय नहीं की जा सकती।

उत्तर प्रदेश की सभी सीटों की सामाजिक संरचना और चुनावी गणित जानने के लिए उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण की विस्तृत कवरेज पढ़ी जा सकती है।

प्रत्याशी, टिकट वितरण, गठबंधन और सीटवार राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े अपडेट के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव की विस्तृत कवरेज पढ़ें।

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