Amroha Assembly Caste Equations: अमरोहा विधानसभा के जातिगत समीकरण 2027

Published on 1 अग॰ 2026

अमरोहा जिले की अमरोहा विधानसभा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ऐसी महत्वपूर्ण सीट है, जहां मुस्लिम मतदाता सबसे प्रभावशाली सामाजिक समूह माने जाते हैं। Amroha Assembly Caste Equations को समझें तो मुस्लिम मतदाताओं के साथ अनुसूचित जाति, सैनी, जाट, प्रजापति, वैश्य, ब्राह्मण, गुर्जर, कश्यप और दूसरे पिछड़े वर्ग भी चुनावी परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 2026 की अंतिम SIR मतदाता सूची के अनुसार अमरोहा विधानसभा में कुल 2,88,976 मतदाता हैं। इनमें 1,53,506 पुरुष, 1,35,466 महिला और चार अन्य मतदाता शामिल हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 राज्य के भविष्य के सियासी रुख को दिशा देने में एक अहम पड़ाव साबित होगा।

अमरोहा विधानसभा का हालिया राजनीतिक इतिहास समाजवादी पार्टी और उसके विधायक महबूब अली की मजबूत पकड़ दिखाता है। महबूब अली 2002 से लगातार पांच विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। 2022 में उन्होंने भाजपा के राम सिंह को 71,036 वोट के बड़े अंतर से हराया था। 2024 लोकसभा चुनाव में भी अमरोहा विधानसभा सेगमेंट में कांग्रेस-सपा गठबंधन को भाजपा पर 74,417 वोट की बढ़त मिली। इन परिणामों के कारण यह सीट फिलहाल समाजवादी पार्टी के सबसे मजबूत क्षेत्रों में गिनी जाती है।

अमरोहा विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभाअमरोहा
विधानसभा संख्या41
जिलाअमरोहा
लोकसभा क्षेत्रअमरोहा
आरक्षणसामान्य
वर्तमान विधायकमहबूब अली
पार्टीसमाजवादी पार्टी
2022 जीत का अंतर71,036 वोट
2026 कुल मतदाता2,88,976
पुरुष मतदाता1,53,506
महिला मतदाता1,35,466
अन्य मतदाता4
मतदान केंद्र156
मतदेय स्थल368
प्रमुख सामाजिक समूहमुस्लिम, अनुसूचित जाति, सैनी, जाट, प्रजापति, वैश्य और अन्य OBC
क्षेत्रीय चरित्रशहरी और ग्रामीण मिश्रित
प्रमुख मुद्देरोजगार, ढोलक उद्योग, व्यापार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि

अमरोहा विधानसभा सामान्य श्रेणी की सीट है। इसका गठन 1957 में हुआ था और यह अमरोहा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। निर्वाचन क्षेत्र में अमरोहा शहर के साथ ग्रामीण इलाके भी आते हैं, इसलिए इसका सामाजिक और राजनीतिक चरित्र पूरी तरह शहरी या पूरी तरह ग्रामीण नहीं है।

Amroha Assembly Caste Equations में मुस्लिम मतदाता सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक समूह माने जाते हैं। उपलब्ध पुराने विधानसभा प्रोफाइल में मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव करीब 35 से 40 प्रतिशत के बीच आंका गया है। शहरी अमरोहा के कई इलाकों में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी विधानसभा के औसत से अधिक मानी जाती है। अनुसूचित जाति का पुराना जनसांख्यिकीय अनुपात करीब 12.48 प्रतिशत बताया गया है।

इसके अलावा सैनी, जाट, प्रजापति, वैश्य, ब्राह्मण, गुर्जर, कश्यप और दूसरे पिछड़े वर्ग अलग-अलग मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभाव रखते हैं। अमरोहा में मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा चुनावी आधार जरूर हैं, लेकिन किसी भी पार्टी को जीत के लिए दलित और OBC मतदाताओं का अतिरिक्त समर्थन भी चाहिए होता है।

अमरोहा विधानसभा का अनुमानित सामाजिक प्रभाव

सामाजिक समूहचुनावी प्रभाव
मुस्लिमसबसे बड़ा और निर्णायक सामाजिक समूह
अनुसूचित जातिपुराने प्रोफाइल में करीब 12.48%
सैनीप्रमुख गैर-यादव OBC समूह
जाटग्रामीण और किसान राजनीति में प्रभाव
प्रजापति-कुम्हारकस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण
वैश्यशहर और व्यापारिक क्षेत्रों में प्रभावशाली
कश्यपOBC समीकरण में महत्वपूर्ण
गुर्जरकुछ ग्रामीण क्षेत्रों में असर
ब्राह्मण और अन्य सवर्णकरीबी मुकाबले में महत्वपूर्ण
अन्य पिछड़े वर्गपार्टी के व्यापक सामाजिक गठबंधन का हिस्सा

ये जातिवार संख्या 2026 की आधिकारिक मतदाता गणना नहीं हैं। निर्वाचन आयोग विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की जाति और धर्म के आधार पर सूची प्रकाशित नहीं करता। इसलिए सामाजिक समूहों की भूमिका पुराने राजनीतिक आकलनों, जनगणना आधारित प्रोफाइल और चुनावी परिणामों से समझी जाती है।

2026 में अमरोहा विधानसभा में 2,88,976 मतदाता

10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में अमरोहा विधानसभा के कुल 2,88,976 मतदाता दर्ज किए गए। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1,53,506 और महिला मतदाताओं की संख्या 1,35,466 है। चार मतदाता अन्य श्रेणी में दर्ज हैं। विधानसभा में 156 मतदान केंद्र और 368 मतदेय स्थल बनाए गए हैं।

मतदाता वर्गसंख्या
पुरुष1,53,506
महिला1,35,466
अन्य4
कुल मतदाता2,88,976

2026 की अंतिम सूची से पहले अमरोहा विधानसभा का मतदाता आधार करीब 3,15,199 था। SIR के बाद कुल संख्या में 26,223 मतदाताओं की शुद्ध कमी दर्ज हुई। यह लगभग 8.32 प्रतिशत की गिरावट है।

मतदाता सूची का चरणमतदाता
प्री-SIR मतदाता आधारलगभग 3,15,199
2026 अंतिम मतदाता2,88,976
शुद्ध कमी26,223
अनुमानित कमीलगभग 8.32%

अमरोहा जिले की चारों विधानसभा सीटों में मतदाता संख्या घटी है। धनौरा में 39,706, हसनपुर में 33,760, अमरोहा में 26,223 और नौगावां सादात में 22,574 मतदाताओं की शुद्ध कमी हुई। हालांकि उपलब्ध कुल आंकड़ों से यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि किस जाति या धर्म के मतदाताओं पर इसका कितना प्रभाव पड़ा।

2022 के मुकाबले घटा मतदाता आधार

2022 विधानसभा चुनाव के समय अमरोहा विधानसभा में लगभग 3,13,755 मतदाता थे। 2024 लोकसभा चुनाव में संख्या 3,12,678 दर्ज की गई। 2026 की अंतिम सूची में कुल मतदाता घटकर 2,88,976 रह गए हैं।

चुनाव या वर्षमतदाता संख्या
20122,65,381
20172,92,320
2019 लोकसभा3,04,922
2022 विधानसभा3,13,755
2024 लोकसभा3,12,678
2026 अंतिम सूची2,88,976

2012 से 2022 तक अमरोहा में मतदाता संख्या लगातार बढ़ी, लेकिन 2026 के विशेष पुनरीक्षण के बाद इसमें बड़ा बदलाव आया। इसका अर्थ है कि राजनीतिक दल 2022 के बूथवार वोटों और पुराने सामाजिक अनुमानों को नई सूची पर सीधे लागू नहीं कर सकते।

मुस्लिम मतदाता अमरोहा में क्यों हैं निर्णायक?

अमरोहा विधानसभा में मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव सीट के चुनावी इतिहास में साफ दिखाई देता है। अब तक हुए 17 विधानसभा चुनावों में मुस्लिम उम्मीदवारों ने 12 बार जीत दर्ज की है। हाल के पांच चुनावों में भी लगातार मुस्लिम उम्मीदवार महबूब अली विजयी हुए हैं।

मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा लंबे समय से समाजवादी पार्टी के साथ दिखाई देता रहा है। हालांकि यह मानना सही नहीं होगा कि पूरे समुदाय का वोट हर चुनाव में एक ही पार्टी को मिलता है।

2017 में सपा के अलावा बसपा, राष्ट्रीय लोकदल और AIMIM ने भी मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। इसके बावजूद सपा जीतने में सफल रही। उस चुनाव में बसपा के नौशाद अली को करीब 60 हजार और रालोद के सलीम खान को 14 हजार से अधिक वोट मिले थे।

2022 में स्थिति बदली और महबूब अली को 1.28 लाख से अधिक वोट मिले। इससे संकेत मिलता है कि सपा मुस्लिम मतों के बड़े हिस्से के साथ दूसरे समुदायों का समर्थन भी जोड़ने में सफल रही।

मुस्लिम मतों का विभाजन भाजपा के लिए खोल सकता है रास्ता

अमरोहा में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या है। यदि यह वोट किसी एक विपक्षी उम्मीदवार के पक्ष में एकजुट रहता है तो भाजपा के लिए जीत का रास्ता कठिन हो जाता है।

2017 में मुस्लिम मत कई उम्मीदवारों में बंटा था। सपा को 74,713 और बसपा को 59,671 वोट मिले। रालोद को भी 14,132 वोट हासिल हुए। भाजपा के उम्मीदवार 45,420 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022 में बसपा का वोट घटकर 34,585 रह गया और सपा का वोट बढ़कर 1,28,735 पहुंच गया। भाजपा को 57,699 वोट मिले। यानी विपक्षी मुस्लिम वोटों की अधिक एकजुटता के साथ सपा की जीत का अंतर तेजी से बढ़ गया।

2027 में बसपा, कांग्रेस, AIMIM या किसी मजबूत निर्दलीय मुस्लिम प्रत्याशी की मौजूदगी इसलिए महत्वपूर्ण होगी। मुस्लिम वोटों में बड़ा विभाजन होता है तो भाजपा मुकाबले में वापसी कर सकती है। वोट एकजुट रहता है तो सपा को मजबूत शुरुआती बढ़त मिल सकती है।

अनुसूचित जाति वोट किसके साथ जाएगा?

अमरोहा विधानसभा में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी पुराने जनसांख्यिकीय प्रोफाइल में करीब 12.48 प्रतिशत बताई गई है। 2026 की मतदाता संख्या पर पुराने अनुपात को सीधे लागू करना उचित नहीं होगा, लेकिन दलित मतदाता सीट के महत्वपूर्ण चुनावी समूहों में शामिल हैं।

बसपा के लिए दलित वोट उसका पारंपरिक आधार रहा है। हालांकि अमरोहा में बसपा को केवल दलित मतों से नहीं, बल्कि मुस्लिम उम्मीदवारों और मुस्लिम-दलित समीकरण के जरिए भी बड़ी संख्या में वोट मिलते रहे हैं।

2017 में बसपा प्रत्याशी नौशाद अली को 59,671 वोट मिले थे और वह दूसरे स्थान पर रहे। 2022 में पार्टी के मोहम्मद नावेद अयाज को 34,585 वोट मिले। इस गिरावट का लाभ सपा को मिलने की संभावना चुनावी परिणामों में दिखाई देती है।

2027 में बसपा दलित वोट कितना बचा पाती है, यह भाजपा और सपा दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा। यदि दलित मतदाता बसपा से भाजपा की ओर जाते हैं तो भाजपा का गैर-मुस्लिम गठबंधन मजबूत होगा। सपा को इस वोट का हिस्सा मिलता है तो उसका मौजूदा आधार और बड़ा हो सकता है।

सैनी वोट भाजपा की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा

अमरोहा विधानसभा के गैर-मुस्लिम OBC समीकरण में सैनी समाज को महत्वपूर्ण माना जाता है। 2017 में भाजपा ने डॉ. कुंवर सेन सैनी को उम्मीदवार बनाया था और उन्हें 45,420 वोट मिले थे। हालांकि वह तीसरे स्थान पर रहे, लेकिन पार्टी का यह प्रदर्शन उसके गैर-मुस्लिम सामाजिक आधार की मौजूदगी दिखाता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सैनी समाज गैर-यादव OBC राजनीति का अहम हिस्सा है। अमरोहा में भाजपा के लिए सैनी मतदाताओं के साथ प्रजापति, कश्यप, गुर्जर, दलित, वैश्य और दूसरे समुदायों को जोड़ना जरूरी है।

सपा भी PDA रणनीति के माध्यम से गैर-यादव OBC मतदाताओं में अपनी पहुंच बढ़ाने का प्रयास कर सकती है। यदि सपा अपने मुस्लिम आधार के साथ सैनी और दूसरे OBC मतदाताओं में पर्याप्त हिस्सेदारी हासिल करती है तो भाजपा के लिए मुकाबला और कठिन हो सकता है।

जाट और किसान वोट की भूमिका

अमरोहा विधानसभा का क्षेत्रीय स्वरूप लगभग बराबर ग्रामीण और शहरी है। पुराने निर्वाचन प्रोफाइल में करीब 48.73 प्रतिशत ग्रामीण और 51.27 प्रतिशत शहरी मतदाता बताए गए हैं।

क्षेत्रीय स्वरूपपुराना अनुमान
ग्रामीण मतदातालगभग 48.73%
शहरी मतदातालगभग 51.27%

ग्रामीण क्षेत्रों में जाट और दूसरे किसान समुदायों की राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। गन्ना भुगतान, फसल मूल्य, सिंचाई, बिजली, खाद-बीज, आवारा पशु और ग्रामीण सड़क जैसे मुद्दे मतदान व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

अमरोहा में जाट मतदाता संख्या के साथ किसान संगठनों और स्थानीय पंचायत नेटवर्क के कारण भी प्रभाव रखते हैं। हालांकि यह प्रभाव नौगावां सादात या धनौरा की तुलना में अलग हो सकता है, क्योंकि अमरोहा सीट में शहरी मतदाताओं की हिस्सेदारी भी लगभग आधी है।

वैश्य और कारोबारी मतदाता शहर में प्रभावशाली

अमरोहा शहर ढोलक निर्माण, आम, छोटे उद्योग और व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। शहर के बाजार और कारोबारी क्षेत्रों में वैश्य मतदाताओं का राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है।

भाजपा का शहरी व्यापारी और वैश्य समाज में परंपरागत आधार रहा है। रोजगार, छोटे उद्योगों के लिए सहायता, बिजली, सड़क, बाजार की व्यवस्था, कर प्रणाली और नगरीय सुविधाएं इस वर्ग के महत्वपूर्ण मुद्दे हो सकते हैं।

अमरोहा के ढोलक उद्योग और अन्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों में बड़ी संख्या मुस्लिम और पिछड़े वर्गों की भी है। इसलिए रोजगार और स्थानीय उद्योग का सवाल धार्मिक तथा जातीय सीमाओं से बाहर जाकर अलग-अलग समुदायों को प्रभावित करता है।

2022 में महबूब अली ने 71,036 वोट से जीती सीट

2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के महबूब अली ने 1,28,735 वोट हासिल किए। उनका वोट शेयर 57.43 प्रतिशत रहा।

भाजपा के राम सिंह को 57,699 वोट और बसपा के मोहम्मद नावेद अयाज को 34,585 वोट मिले। महबूब अली ने भाजपा उम्मीदवार को 71,036 वोटों से हराया।

उम्मीदवारपार्टीवोटवोट शेयर
महबूब अलीसमाजवादी पार्टी1,28,73557.43%
राम सिंहभाजपा57,69925.74%
मोहम्मद नावेद अयाजबसपा34,58515.43%
NOTA9710.43%
जीत का अंतर71,03631.69%

यह अमरोहा विधानसभा के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में शामिल है। सपा ने अकेले कुल पड़े वोटों का 57 प्रतिशत से अधिक हासिल किया और भाजपा तथा बसपा के संयुक्त वोटों से भी आगे रही।

2017 में त्रिकोणीय मुकाबले के बावजूद जीती सपा

2017 विधानसभा चुनाव में मुकाबला अधिक प्रतिस्पर्धी था। सपा के महबूब अली को 74,713 वोट, बसपा के नौशाद अली को 59,671 और भाजपा के डॉ. कुंवर सेन सैनी को 45,420 वोट मिले।

महबूब अली ने बसपा प्रत्याशी को 15,042 वोट से हराया।

उम्मीदवारपार्टीवोटवोट शेयर
महबूब अलीसपा74,71337.10%
नौशाद अलीबसपा59,67129.63%
डॉ. कुंवर सेन सैनीभाजपा45,42022.55%
सलीम खानरालोद14,1327.02%
शमीम अहमदAIMIM2,8611.42%
जीत का अंतर15,0427.47%

इस चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशियों के बीच वोटों का बड़ा विभाजन हुआ था। इसके बावजूद भाजपा तीसरे स्थान पर रही। परिणाम बताता है कि भाजपा को केवल मुस्लिम मतों के विभाजन से ही जीत नहीं मिल सकती, बल्कि उसे गैर-मुस्लिम सामाजिक समूहों में भी अधिक व्यापक समर्थन चाहिए।

2012 में सपा ने 21,805 वोट से जीती सीट

2012 में महबूब अली को 60,807 वोट मिले थे। भाजपा के राम सिंह करीब 39 हजार वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। सपा की जीत का अंतर 21,805 वोट था।

चुनावविजेतापार्टीविजेता के वोटजीत का अंतर
2012महबूब अलीसपा60,80721,805
2017महबूब अलीसपा74,71315,042
2022महबूब अलीसपा1,28,73571,036

2012 से 2017 के बीच सपा की जीत का अंतर कुछ कम हुआ था, लेकिन 2022 में पार्टी ने अपना वोट लगभग दोगुना कर लिया और जीत का अंतर 71 हजार से अधिक पहुंच गया।

2002 से लगातार पांच बार जीते महबूब अली

अमरोहा विधानसभा का चुनावी इतिहास किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं रहा है। कांग्रेस, भाजपा, जनता दल, वाम दलों और क्षेत्रीय पार्टियों के प्रत्याशी भी यहां जीत चुके हैं। लेकिन 2002 के बाद महबूब अली ने लगातार पांच चुनाव जीतकर व्यक्तिगत और राजनीतिक वर्चस्व स्थापित किया।

चुनाव वर्षविजेतापार्टी
2002महबूब अलीराष्ट्रीय परिवर्तन दल
2007महबूब अलीसमाजवादी पार्टी
2012महबूब अलीसमाजवादी पार्टी
2017महबूब अलीसमाजवादी पार्टी
2022महबूब अलीसमाजवादी पार्टी

2002 में महबूब अली ने राष्ट्रीय परिवर्तन दल से चुनाव जीता था। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और लगातार चार विधानसभा चुनाव पार्टी के टिकट पर जीत चुके हैं।

इस लंबे राजनीतिक रिकॉर्ड के कारण अमरोहा में सपा का संगठनात्मक आधार विधायक की व्यक्तिगत पकड़ से भी जुड़ा हुआ है। प्रत्याशी बदलने की स्थिति में यही वोट ट्रांसफर 2027 में पार्टी की सबसे बड़ी परीक्षा हो सकता है।

2024 लोकसभा चुनाव में गठबंधन को 74,417 वोट की बढ़त

2024 लोकसभा चुनाव में अमरोहा विधानसभा सेगमेंट ने कांग्रेस-सपा गठबंधन को बड़ी बढ़त दी।

कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर दानिश अली को अमरोहा विधानसभा क्षेत्र से 1,32,003 वोट मिले। भाजपा के कंवर सिंह तंवर को 57,586 वोट प्राप्त हुए। इस तरह गठबंधन को इस विधानसभा सेगमेंट में 74,417 वोट की बढ़त मिली।

2024 लोकसभा: अमरोहा सेगमेंटवोट
कांग्रेस-सपा गठबंधन1,32,003
भाजपा57,586
गठबंधन की बढ़त74,417

दिलचस्प बात यह है कि भाजपा ने अमरोहा लोकसभा सीट 28,670 वोट से जीती, लेकिन अमरोहा विधानसभा सेगमेंट में वह बड़े अंतर से पीछे रही। भाजपा को धनौरा, नौगावां सादात और हसनपुर जैसे क्षेत्रों से मिली बढ़त ने लोकसभा का अंतिम परिणाम उसके पक्ष में किया।

2022 और 2024 में लगभग समान रहा सपा-गठबंधन का दबदबा

2022 विधानसभा चुनाव में सपा की बढ़त 71,036 वोट थी। 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन की बढ़त 74,417 वोट रही।

चुनावविपक्षी गठबंधन का वोटभाजपा का वोटबढ़त
विधानसभा 2022सपा 1,28,73557,699सपा +71,036
लोकसभा 2024कांग्रेस 1,32,00357,586गठबंधन +74,417

भाजपा का वोट दोनों चुनावों में लगभग 57 हजार के आसपास स्थिर रहा। दूसरी तरफ सपा या उसके गठबंधन का वोट 1.28 लाख से अधिक बना रहा। यह अमरोहा में दोनों राजनीतिक खेमों के मौजूदा सामाजिक आधार का स्पष्ट संकेत है।

समाजवादी पार्टी का मजबूत चुनावी आधार

अमरोहा में सपा की मजबूती तीन प्रमुख कारणों से दिखाई देती है।

पहला, मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा समर्थन। दूसरा, महबूब अली का दो दशक से अधिक समय में बना व्यक्तिगत राजनीतिक नेटवर्क। तीसरा, दलित और दूसरे पिछड़े वर्गों के मतदाताओं का अतिरिक्त समर्थन।

2022 में सपा को 57.43 प्रतिशत वोट मिलना बताता है कि उसे केवल मुस्लिम वोटों के आधार पर नहीं देखा जा सकता। अगर मुस्लिम हिस्सेदारी 35 से 40 प्रतिशत के पुराने अनुमान के आसपास है तो पार्टी को जीत के लिए बड़ी संख्या में दूसरे समुदायों के वोट भी मिले होंगे। यह चुनावी आंकड़ों पर आधारित तार्किक संकेत है।

2027 में सपा की प्राथमिकता इस व्यापक गठबंधन को बनाए रखने की होगी। हालांकि 2026 की नई मतदाता सूची के बाद बूथ स्तर पर पुराने समर्थन की दोबारा जांच जरूरी होगी।

भाजपा के लिए जीत का रास्ता कहां से निकल सकता है?

भाजपा के लिए अमरोहा विधानसभा जिले की कठिन सीटों में शामिल है। 2022 और 2024 दोनों चुनावों में पार्टी करीब 57 हजार वोट के आसपास रही, जबकि सपा या गठबंधन को 1.28 लाख से अधिक मत मिले।

भाजपा को जीत के लिए सैनी, दलित, जाट, वैश्य, प्रजापति, कश्यप, गुर्जर, ब्राह्मण और दूसरे गैर-मुस्लिम समूहों का अधिकतम एकीकरण करना होगा।

पार्टी को मुस्लिम मतदाताओं के एक सीमित हिस्से तक पहुंच बढ़ाने के साथ विपक्षी मुस्लिम वोटों में विभाजन की भी जरूरत पड़ सकती है।

स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवार भाजपा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा। 2017 में सैनी प्रत्याशी और 2022 में राम सिंह पार्टी के वोट को 45 हजार से बढ़ाकर करीब 58 हजार तक ले गए, लेकिन यह जीत के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।

बसपा 2027 में फिर बन सकती है बड़ा फैक्टर

अमरोहा में बसपा का पुराना मुस्लिम-दलित सामाजिक आधार रहा है। 2017 में पार्टी को करीब 60 हजार वोट मिले और वह मुख्य प्रतिद्वंद्वी रही। 2022 में उसका वोट घटकर करीब 35 हजार रह गया।

अगर बसपा 2027 में मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी उतारती है और दलित वोटों का बड़ा हिस्सा अपने साथ बनाए रखती है तो सपा के वोट बैंक पर दबाव बढ़ सकता है।

लेकिन बसपा का वोट और कमजोर होता है तो दलित और मुस्लिम मतदाता किस दिशा में जाते हैं, उससे मुख्य मुकाबला प्रभावित होगा।

दलित वोट भाजपा की ओर जाता है तो उसका गैर-मुस्लिम गठबंधन मजबूत होगा। मुस्लिम और दलित मतों का बड़ा हिस्सा सपा को मिलता है तो पार्टी की स्थिति 2022 जैसी मजबूत बनी रह सकती है।

2026 SIR ने बदला बूथवार चुनावी गणित

2027 विधानसभा चुनाव के लिए सबसे नया फैक्टर 2026 की मतदाता सूची है। अमरोहा विधानसभा में प्री-SIR आधार की तुलना में 26,223 मतदाता कम हुए हैं और अंतिम संख्या 2,88,976 रह गई है।

2022 में सपा को 1,28,735 वोट मिले थे। यह 2026 के कुल मतदाताओं का लगभग 44.5 प्रतिशत बैठता है। हालांकि पिछले चुनाव के वोटों की तुलना नई सूची से सीधे करना पूरी तरह सटीक नहीं होगा, क्योंकि हटे और जुड़े मतदाताओं का बूथवार तथा सामाजिक विवरण उपलब्ध नहीं है।

फिर भी संख्या में करीब 26 हजार की कमी इतनी बड़ी है कि राजनीतिक दलों को अपने मतदाता संपर्क, बूथ कमेटियों और सामाजिक समीकरण का दोबारा आकलन करना पड़ेगा।

2027 में इन सात सामाजिक समीकरणों पर रहेगी नजर

2027 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा का परिणाम सात प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक सवालों से प्रभावित हो सकता है।

पहला सवाल मुस्लिम मतों की एकजुटता का होगा। सीट का सबसे बड़ा सामाजिक समूह यदि सपा या किसी एक विपक्षी उम्मीदवार के साथ रहता है तो भाजपा के लिए चुनौती बड़ी होगी।

दूसरा, अनुसूचित जाति वोट का रुख रहेगा। बसपा, भाजपा और सपा तीनों इस वोट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

तीसरा, सैनी और दूसरे गैर-यादव OBC समुदाय होंगे। भाजपा के लिए इनका अधिकतम समर्थन जरूरी है, जबकि सपा अपने वर्तमान सामाजिक आधार को और व्यापक बनाना चाहेगी।

चौथा, वैश्य और शहरी कारोबारी वोट होगा। अमरोहा के लगभग आधे शहरी चरित्र के कारण रोजगार, उद्योग और व्यापारिक सुविधाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।

पांचवां, जाट और किसान मतदाताओं का रुख होगा। ग्रामीण क्षेत्र करीब आधी सीट को प्रभावित करते हैं।

छठा, बसपा और दूसरे दलों के प्रत्याशी होंगे। मुस्लिम तथा दलित मतों में विभाजन मुख्य मुकाबले का अंतर बदल सकता है।

सातवां और सबसे नया फैक्टर 2026 की 2,88,976 मतदाताओं वाली नई सूची है। मतदाता आधार में 26,223 की शुद्ध कमी के बाद 2022 और 2024 का बूथवार गणित नए सिरे से तैयार करना होगा।

2002 से महबूब अली की लगातार पांच जीत, 2022 में सपा का 71,036 वोट का अंतर और 2024 लोकसभा चुनाव में गठबंधन की 74,417 वोट की बढ़त फिलहाल अमरोहा को सपा का मजबूत गढ़ बनाती है। लेकिन नई मतदाता सूची, बसपा की रणनीति, भाजपा का OBC-दलित गठबंधन और प्रत्याशी चयन 2027 में सीट की वास्तविक तस्वीर तय करेंगे।

उत्तर प्रदेश की सभी सीटों की सामाजिक संरचना और चुनावी गणित जानने के लिए उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण की विस्तृत कवरेज पढ़ी जा सकती है।

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