नवभारत संपादकीय: जंतर-मंतर पर पैलेट गन के इस्तेमाल की होगी पड़ताल, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश| Navbharat Live

Published on 4 अग॰ 2026

नवभारत संपादकीय: जंतर-मंतर पर पैलेट गन के इस्तेमाल की होगी पड़ताल, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

  • Written By:

    अंकिता पटेल

Updated On: Aug 04, 2026 | 10:49 AM IST

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सार

Supreme Court Pellet: सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार करते हुए जंतर-मंतर प्रदर्शन में इसके कथित अत्यधिक इस्तेमाल की जांच के निर्देश दिए और केंद्र से एसओपी मांगी।

Navbharat Editorial: Use of pellet guns at Jantar Mantar to be probed; Supreme Court issues major order.

सुप्रीम कोर्ट (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)

विस्तार

Jantar Mantar Protest Pellet: नीट पेपर लीक के विरोध में गत 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर किए गए युवाओं के प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची व जस्टिस वी। मोहना की पीठ ने पैलेट गन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से इनकार किया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस की मार्गदर्शिका अस्तित्व में रहते अपवादात्मक परिस्थिति में इसके इस्तेमाल का अधिकार सुरक्षा बलों को है। इसके साथ ही अदालत ने इस बात की जांच के लिए स्वीकृति दी कि क्या जंतर-मंतर पर पैलेट गन का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा हुआ था? आईबी के पूर्व विशेष निदेशक व पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद तथा पैलेट से जख्मी 2 युवाओं द्वारा दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार व रैपिड एक्शन फोर्स के महानिरीक्षक को नोटिस देकर पैलेट गन के इस्तेमाल की मानक कार्यपद्धति (एसओपी) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील वृंदा ग्रोवर ने स्पष्ट किया कि आपत्ति आरएएफ के पास पैलेट गन रहने के संबंध में नहीं, बल्कि आंदोलनकारियों पर धातु के पैलेट दागने को लेकर है।

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पैलेट गन पर प्रतिबंध से इनकार, नियमों पर सवाल बरकरार

याचिकाकर्ता के शरीर से धातु के पैलेट निकाले जाने का दावा भी उन्होंने किया। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि ऐसे शस्त्रों के इस्तेमाल की छूट देने वाले नियमों को चुनौती न देते हुए सिर्फ बंदी की मांग करना ‘अस्पष्ट’ है। पैलेट गन का रिवाज देश में नया नहीं है।

बुरहान वानी की मौत के बाद 2016 में कश्मीर घाटी में पैलेट गन का इस्तेमाल करने से 1300 से ज्यादा नागरिक आंशिक या पूर्ण रूप से अंधे हो गए थे। इसके बाद जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने अनियंत्रित जमाव के खिलाफ बल का इस्तेमाल अपरिहार्य बताते हुए पैलेट गन पर प्रतिबंध लगाने से इनकार किया था। सीआरपीएफ की भी दलील यही थी कि यदि पैलेट गन पर रोक लगा दी गई, तो प्रत्यक्ष गोलीबारी का कोई विकल्प नहीं रह जाएगा।

पैलेट गन पर सख्त SOP और जवाबदेही की जरूरत

यह तर्क अपनी जगह रहने पर भी कम घातक अख पैलेट गन से छूटे छरों से लोग अंधे हो जाते हैं तो क्या इसे गंभीर नहीं माना जाए? अमेरिका में राजधानी वॉशिंगटन डीसी व सिएटल जैसे शहरों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कायनेटिक इम्पैक्ट प्रोजेक्टाइल के इस्तेमाल पर बंदी लगाई गई। जर्मनी में भी रबर बुलेट के इस्तेमाल पर रोक है।

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एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने भी लगातार बहुप्रक्षेपक (मल्टिपल प्रोजेक्टाइल) शस्त्रों पर विश्वव्यापी बंदी की मांग की है। लोकतंत्र में सरकार को बलप्रयोग का अधिकार होता है लेकिन उस पर कानून व उत्तरदायित्व का कड़ा बंधन भी होना चाहिए अन्यथा लोकतंत्र व तानाशाही में फर्क नहीं रह जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का यह कहना उचित है कि संपूर्ण प्रतिबंध की बजाय विशिष्ट घटना में दुरुपयोग की जांच होनी चाहिए, इसके लिए स्पष्ट एसओपी तथा दोषी पर कार्रवाई जैसे प्रावधान जरूरी हैं।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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