छत्तीसगढ़ धान खरीदी बड़ा में बदलाव: अब मठ-मंदिर रजिस्ट्रेशन भी एग्रीस्टेक पोर्टल होगा, बेच सकेंगे धान, फैसले पर सियासत तेज

Published on 4 अग॰ 2026

 CG Dhan Kharadi New rule: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-27 में मठ मंदिरों का पंजीयन भी एग्रीस्टेक पोर्टल में किया जा सकेगा। इससे मठ मंदिरों का पंजीयन संस्थागत कृषक के रूप में होगा। नई व्यवस्था से कृषक उन्नति योजना के तहत मठ मंदिरों को सीधे लाभ मिल सकेगा, लेकिन इस फैसले पर सवाल भी उठ रहे हैं। जमकर सियासत भी हो रही है। 

पहली बार मठ-मंदिरों का होगा पंजीयन

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के लिए अब तक किसानों के व्यक्तिगत खातों का पंजीयन होता रहा है। प्रदेश में पहली बार मठ, मंदिरों, न्यासों की जमीनों का भी संस्थागत पंजीयन हो सकेगा। इस तरह मठ, मंदिरों, न्यास की जमीनों पर होने वाली खेती के धान भी सहकारी समितियों में बेचे जा सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने आधिकारिक निर्देश जारी कर दिया है।

राजीव लोचन महाराज ने किया स्वागत

 राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा की मानें तो मठ, मंदिरों को अपना धान बेचने के लिए कोई समस्या न हो, इसलिए यह निर्णय किया गया है। दक्षिण कोशल पीठाधीश्वर राजीव लोचन महाराज ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में बीते दिनों मुख्यमंत्री से चर्चा भी हुई थी।

फैसले पर सियासत शुरू

राज्य सरकार ने यूं तो यह फैसला मठ, मंदिरों, न्यास की जमीनों पर होने वाले धान की खरीदी सुव्यवस्थित ढंग से करने के लिए लिया है, लेकिन अब इस पर सियासत भी खूब हो रही है। कांग्रेस ने सीधा आरोप लगाया है कि सरकार की नजर अब मठ मंदिरों की जमीनों पर है।

आरोप- सरकार की मठ-मंदिरों पर नजर

कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने कि कहा हमारी सरकार में पंजीयन की जरूरत नहीं थी। राम मंदिर की तरह सरकार कहीं मठ, मंदिर की जमीन पर तो नजर नहीं डाल रही है। दूसरी ओर कांग्रेस के आरोपों पर डिप्टी सीएम अरुण साव ने तीखा पलटवार किया है।

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यह भी जानें...

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की प्रक्रिया पर सियासत नई नहीं है, लेकिन मठ, मंदिरों को संस्थागत पंजीयन के दायरे में लाए जाने पर अब नई बहस छिड़ गई है। सरकार का दावा है कि फैसले से संस्थाओं को धान बेचने में आसानी होगी। कांग्रेस इस फैसले से मठ मंदिरों की जमीनों पर सरकार का नजर पड़ने की बात कह रही है। ऐसे में देखना होगा कि धान खरीदी के लिए किए गए फैसले का संस्थाओं पर दूरगामी असर क्या होता है।

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