तीन दिन और बढ़ा सकता है संसद का मानसून सेशन, विपक्ष के भारी हंगामे के बीच क्यों सरकार ले रही ऐसा फैसला
सरकार की तरफ से कांग्रेस समेत विपक्ष को विशेष सत्र का प्रस्ताव दिया गया है. सरकार ने कांग्रेस को कहा है कि सरकार 16,17,18 से संसद का विशेष सत्र परिसीमन बिल पर बुलाना चाहती है.
सरकार की तरफ से कांग्रेस समेत विपक्ष को विशेष सत्र का प्रस्ताव दिया गया है. सरकार ने कांग्रेस को कहा है कि सरकार 16,17,18 से संसद का विशेष सत्र परिसीमन बिल पर बुलाना चाहती है.
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Parliament (File Photo)
केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र को तीन दिन और बढ़ा सकती है. ये जानकारी अभी सूत्रों के हवाले से सामने आई है. परिसीमन बिल और FCRA से जुड़े संशोधन विधेयकों को पारित करवाने के लिए सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने की प्लानिंग कर रही है. मौजूदा मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म होना है लेकिन सत्रावसान नहीं किया जाएगा, जिससे आवश्यकता पड़ने पर जल्द संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है.
संशोधन विधेयकों को पारित करवाने के लिए सरकार दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है. सूत्रों का कहना है कि जैसे ही पर्याप्त समर्थन का भरोसा मिलता है, वैसे ही तीन दिनों का स्पेशल सत्र बुलाया जा सकता है. खास बात है कि सरकार की ओर से अब तक इस बारे में कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
16 अगस्त से विशेष सत्र!
सरकार की ओर से कांग्रेस सहित विपक्ष के सभी सदलों को स्पेशल सेशन का प्रस्ताव दिया गया है. कांग्रेस को सरकार ने कहा है कि वे 16 अगस्त, 17 अगस्त और 18 अगस्त से संसद का स्पेशल सेशन बुलाना चाहते हैं. कांग्रेस ने सरकार के प्रस्ताव पर कहा कि पार्टी और विपक्ष के अन्य दलों से चर्चा करके बताएंगे.
क्या है परिसीमन बिल ?
संसद में बीते सत्र में बिल पेश किया गया था, जिनके जरिए लोकसभा की सीटों में विस्तार होना है. इनका मकसद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण लागू करना और नए सिरे से परिसीमन करवाना है. इस परिसीमन के बाद लोकसभा सीटें 800 से अधिक हो सकती है.
FCRA बिल में क्या प्रस्ताव है
प्रस्तावित कानून FCRA-2010 में संशोधन के लिए संसद में पेश किया गया है. ये कानून तय करता है कि NGO, शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक निकाय, संघ और चैरिटेबल ट्रस्ट कैसे विदेशी चंदा हासिल करेंगे और उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं. मौजूदा नियमों के अनुसार, संगठनों को विदेशी चंदा स्वीकार करने से पहले गृहमंत्रालय से रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होता है. रजिस्ट्रेशन को हर पांच साल में रिन्यू करवाना जरूरी होता है.
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अमेरिकी सासंद ने दी धमकी
अमेरिका के सांसद राइली मूर ने भारत को धमकी दी है. फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट में प्रस्तावित संशोधनों की वजह से उन्होंने ये धमकी दी है. मूर ने इस बिल को ईसाई समुदाय पर सीधा हमला बताया. उन्होंने धमकी दी कि भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में तनाव आ सकता है.
Christians have been in India since St. Thomas the Apostle traveled to the Malabar Coast just decades after the resurrection of our Lord Jesus Christ.
But despite this long Christian history, India’s Parliament is considering amending Foreign Contribution Regulation Amendment…
— Rep. Riley M. Moore (@RepRileyMoore) August 4, 2026
संगठनों को कितना विदेशी चंदा मिला
बिल के नोट में बताया गया है कि 15 जुलाई 2026 तक भारत में 14,449 एक्टिव FCRA पंजीकरण थे. वहीं, 22,498 पंजीकरण रद्द कर दिए गए थे. इसके अलावा, 15,212 की समय-सीमा समाप्त हो गई थी. 2019 से लेकर 2022 के बीच, इस अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड संगठनों को 55,741 करोड़ रुपये का विदेशी चंदा प्राप्त हुआ था.
बिल पर विवाद क्यों है?
FCRA बिल पर बहस जारी है. NGO, सिविल सोसाइटी ग्रुप्स और विपक्षी दलों का तर्क है कि इस बिल से केंद्र सरकार को विदेशी फंडिग पर निर्भर संगठनों पर अधिक कंट्रोल मिल जाएगा. चर्च और धार्मिक संगठनों ने चिंता जताई है कि अगर उनका रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाता है या फिर रद्द कर दिया जाता है, तो विदेशी चंदे से दशकों में बनाए गए स्कूल, अस्पताल, कल्याणकारी संस्थान और दूसरी संपत्तियां सरकार के नियंत्रण में आ सकती हैं.