'झगड़ा नहीं सुलझा तो हम...', करिश्मा कपूर के एक्स हसबैंड संजय कपूर के प्रॉपर्टी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात

Published on 6 अग॰ 2026

'झगड़ा नहीं सुलझा तो हम...', करिश्मा कपूर के एक्स हसबैंड संजय कपूर के प्रॉपर्टी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात

Sunjay Kapur Family Property: संजय कपूर के परिवार में चल रहे प्रॉपर्टी विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है. चलिए आपको बताते हैं कोर्ट ने क्या कहा?

Sunjay Kapur Family Property: संजय कपूर के परिवार में चल रहे प्रॉपर्टी विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है. चलिए आपको बताते हैं कोर्ट ने क्या कहा?

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Sunjay Kapur Family Property: दिवंगत बिजनेसमैन और करिश्मा कपूर के एक्स पति संजय कपूर के परिवार में चल रहे प्रॉपर्टी विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है. अदालत ने इस मामले में दोनों पक्षों से कानूनी लड़ाई को लंबा खींचने के बजाय आपसी सहमति से समाधान निकालने की अपील की है. सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई कि परिवार के सदस्य सौहार्दपूर्ण तरीके से इस विवाद का अंत करेंगे और किसी व्यापक समझौते तक पहुंचेंगे.

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि फिलहाल चल रही मेडिएशन की प्रक्रिया संतोषजनक ढंग से आगे बढ़ रही है. ऐसे में इसे 2 नवंबर तक जारी रखा जाएगा. कोर्ट ने साफ किया कि अगर मेडिएशन सफल नहीं होती है, तभी दोनों पक्षों को कानून के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई करने की अनुमति दी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने जताई समझौते की उम्मीद

इस मामले की सुनवाई जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने की. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उसे पूरी उम्मीद है कि परिवार के सदस्य आपसी बातचीत के जरिए इस विवाद का स्थायी समाधान निकाल लेंगे. कोर्ट ने कहा, "हमें उम्मीद है कि एक व्यापक और संपूर्ण समझौता हो सकेगा. दोनों पक्षों के सहयोग से ये विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ जाएगा." अदालत ने ये भी साफ किया कि फिलहाल उसकी प्राथमिकता परिवार को कानूनी लड़ाई से बचाकर समझौते की दिशा में आगे बढ़ाना है.

"खुले मन और खुले दिल से आगे बढ़ें"

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को एक बार फिर अपनी पिछली सलाह याद दिलाई. अदालत ने कहा कि सालों तक अदालतों में चलने वाले विवाद किसी भी परिवार के लिए नुकसानदायक साबित होते हैं. कोर्ट ने दोनों पक्षों से कहा, "लंबे समय तक चलने वाले कानूनी विवाद में उलझने के बजाय खुले मन और खुले दिल से आगे बढ़ें." अदालत ने ये भी कहा कि दोनों पक्ष अपने-अपने अधिकारों और दावों पर विस्तार से चर्चा कर चुके हैं. अब समय आ गया है कि परिवार के हितों को प्राथमिकता देते हुए समझौते की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाएं.

2 नवंबर तक जारी रहेगी मेडिएशन

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में चल रही मेडिएशन की प्रक्रिया को 2 नवंबर तक जारी रखने की अनुमति दी है. अदालत ने कहा कि मध्यस्थ को बिना किसी दबाव के अपना काम करने दिया जाए और इस अवधि के दौरान इस विषय पर किसी तरह की अतिरिक्त बहस नहीं होगी. जस्टिस पारदीवाला ने कहा, "अगर मेडिएशन अनसक्सेसफुल होती है, तो हम दोनों पक्षों को कानून के मुताबिक आगे बढ़ने की अनुमति देंगे. लेकिन हमारी उम्मीद है कि ऐसा दिन कभी न आए." कोर्ट की इस टिप्पणी को मामले में समझौते की दिशा में पॉजिटिव हिंट माना जा रहा है.

अदालत ने समाधान को दी प्राथमिकता

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ये भी कहा कि वो इस बात को लेकर काफी आशावान है कि परिवार के भीतर चल रहा ये विवाद अदालत के फैसले से पहले ही आपसी सहमति से समाप्त हो सकता है. कोर्ट ने सभी पक्षों से अपील करते हुए कहा कि वो मेडिएशन प्रक्रिया को गंभीरता से लें और ऐसा माहौल बनाएं जिससे विवाद का स्थायी समाधान निकल सके. अदालत ने कहा, "उस दिन को आने मत दीजिए जब मेडिएशन असफल घोषित करनी पड़े."

मध्यस्थ की फीस को लेकर भी दिया निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेडिएशन से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं पर भी निर्देश दिए. अदालत ने आदेश दिया कि मध्यस्थ की फीस का भुगतान आरके फैमिली ट्रस्ट (RK Family Trust) की ओर से किया जाएगा. कोर्ट का मानना है कि मेडिएशन की प्रक्रिया स्मूथ तरीके से चलनी चाहिए ताकि सभी पक्ष निष्पक्ष माहौल में बातचीत कर सकें.

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