राघव चड्ढा पुराने फॉर्म में वापस लौटे, राज्यसभा में उठाया डॉक्टर और लैब की 'कट-मनी' का मुद्दा
Aug 06, 2026 10:25 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
Raghav Chadha: राघव चड्ढा ने राज्यसभा में डॉक्टर और लैब्स के बीच चलने वाले गठजोड़ पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यह गठजोड़ मरीज के ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का काम करता है। सरकार को इस पर कड़े कानून बनाने चाहिए।

राघव चड्ढा ने राज्यसभा में डॉक्टर्स और लैब्स का मुद्दा उठाया
Raghav Chadha: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में इस बार डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक लैबस् के बीच जारी गठजोड़ के मुद्दे पर अपनी राय रखी है। उन्होंने इन दोनों के बीच चल रहे 'कट मनी' को मरीजों के साथ धोखा करार दिया। उन्होंने सरकार से मांग की इसको लेकर कड़े कानून बनाए जाएं ताकि मरीजों के हितों की रक्षा की जा सके। बता दें, भाजपा में शामिल होने के पहले चड्ढा ने कुछ समय पहले तक ऐसे ही मुद्दे उठाए थे, इसकी वजह से वह जनता के बीच काफी पॉपुलर हो गए थे। लेकिन सत्ताधारी पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
गुरुवार को राज्यसभा में उन सभी आलोचनाओं को पीछे छोड़ते हुए राघव चड्ढा एक बार फिर से अपने पुराने फॉर्म में नजर आए। उन्होंने शून्यकाल में डॉक्टरों और लैब्स के बीच जारी गठजोड़ पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में मरीज डॉक्टरों की सलाह पर विभिन्न पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं और डायग्नोस्टिक केंद्रों में जांच कराते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में मरीजों को ऐसे केंद्रों पर भेजा जाता है, जहां से डॉक्टरों को कमीशन या 'कट मनी' मिलती है। इससे न केवल चिकित्सा व्यवस्था की पारदर्शिता प्रभावित होती है, बल्कि मरीजों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
अगर पैसे कमाने के लिए जांच की जा रही है, तो यह डॉक्टरी पेशे के विपरीत-राघव चड्ढा
भाजपा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि एक मरीज जब डॉक्टर के पास जाता है, तो वह उस पर पूरा भरोसा करता है। इसके बाद जैिसे डॉक्टर कहता है, वह जांच करवाता है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मरीज डॉक्टर पर भरोसा रखता है, लेकिन यदि जांच केंद्र के चयन के पीछे आर्थिक लाभ की मंशा हो तो यह चिकित्सा पेशे की नैतिकता के विपरीत है।
उन्होंने कहा, "मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की आचार संहिता में 2002 से ही फीस बांटने पर रोक लगी हुई है। इसके अलावा नेशनल मेडिकल कमीशन के रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर रेगुलेशंस, 2023 में भी रेफरल कमीशन पर रोक है और नियमों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों के सस्पेंशन समेत अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। गंभीर उल्लंघन के मामलों में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट से जुड़े प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।" राघव ने यहां स्पष्ट किया कि उनका बयान डॉक्टरों या मेडीकल समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ है, जो पैसा कमाने के लिए मरीजों को लूटने का काम करते हैं।
कड़े कानून बनाए सरकार- राघव चड्ढा
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि सरकार को इस मामले में गंभीरता से विचार करना चाहिए। इसके अलावा डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक केंद्रों के बीच कथित कमीशन की व्यवस्था पर रोक लगाने तथा ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रभावी गाइडलाइन व्यवस्था आवश्यक है, ताकि मरीजों के हितों की रक्षा की जा सके।
बता दें, आम आदमी पार्टी में रहते जब उनकी पार्टी लीडरशिप से अनबन चल रही थी, तो राघव चड्ढा ने लगातार जनसरोकार से जुड़े हुए मुद्दों को उठाना शुरू कर दिया था। इसमें एयरपोर्ट कैंटीन से लेकर गिग इकॉनॉमी वर्कर्स के मुद्दे तक शामिल थे। इन बयानों की वजह से वह यूथ के बीच में लगातार पॉपुलर भी हो रहे थे। लेकिन जब आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के नेता के पद से हटाया, तो कुछ गड़बड़ लगा। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए, तो कई लोगों ने उनकी आलोचना करनी शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर भी उनके लाखों फॉलोअर्स एक झटके में कम हो गए। इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान भी राघव की चुप्पी को लेकर उनकी आलोचना की गई। हाल ही में राज्यसभा के दौरान उन्होंने अपनी बात रखी थी। अब उन्होंने डॉक्टरों और लैब्स के मुद्दे पर बात की है।
