कच्चे तेल के दाम में लगी आग, ट्रंप की 'नई' मांग से होर्मुज खुलने की उम्मीदों पर फिरा पानी

Published on 11 अग॰ 2026

कच्चे तेल के दाम में लगी आग, ट्रंप की 'नई' मांग से होर्मुज खुलने की उम्मीदों पर फिरा पानी

Aug 11, 2026 05:58 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

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मुख्य बातें

  • Crude Oil Price: ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ईरान से पिछले संघर्षों में मारे गए सभी लोगों का मुआवजा मांगा है
  • यह डिमांड ऐसे समय आई है, जब ईरान ने 300 अरब डॉलर से अधिक की अपनी पुरानी मांग दोहराई है
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कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर उछलने लगी हैं।

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 90 डॉलर प्रति बैरल की ओर चल पड़ी हैं। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत उछलकर 87.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी देखी गई और मंगलवार, 11 अगस्त को शुरुआती एशियाई कारोबार में भी यह बढ़त बरकरार है। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के खिलाफ कड़े रुख को अपनाना है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर उम्मीदों पर पानी फिर गया है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदों को झटका लग रहा है।

ट्रंप की नई मांग और ईरान का जवाब

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ईरान से पिछले संघर्षों में मारे गए सभी लोगों का मुआवजा मांगा है। यह डिमांड ऐसे समय आई है, जब ईरान ने 300 अरब डॉलर से अधिक के युद्ध क्षतिपूर्ति की अपनी पुरानी मांग दोहराई है।

ट्रंप ने आगे लिखा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि भविष्य की सभी बातचीत में इन नई शर्तों को मजबूती से रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली किसी भी बैठक में मुआवजे का मुद्दा कभी नहीं उठा था।

क्या है 300 अरब डॉलर का विवाद?

हालांकि, ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए यह 300 अरब डॉलर का फंड उस 14-सूत्रीय एमओयू का हिस्सा है, जिस पर ट्रंप ने खुद जून में फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए थे। यानी ट्रंप ने खुद उस फंड को स्वीकार किया था, लेकिन अब वे ईरान से मुआवजे की नई मांग कर रहे हैं, जिससे स्थिति और उलझ गई है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट बरकरार

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि हालांकि ईरान और ओमान के बीच इस प्रमुख ऊर्जा मार्ग के भविष्य के प्रबंधन को लेकर द्विपक्षीय वार्ता जारी है, लेकिन जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता, तब तक होर्मुज नहीं खोला जाएगा।

जहाजों की आवाजाही पर बुरा असर

एनर्जी एस्पेक्ट्स की संस्थापक और बाजार खुफिया निदेशक अमृता सेन ने ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि अब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से केवल पांच जहाज गुजर रहे हैं, जबकि जून में एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद यह संख्या बढ़कर 14 के दैनिक औसत पर पहुंच गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक यह बंद रहेगा, वैश्विक भंडार पर दबाव बना रहेगा।

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें