बिना मास्टर प्लान बसा दिया ‘तीसरा भोपाल’: नौकरी, सस्ते मकान और जमीन ने तय की शहर की दिशा; पहले कॉलोनियां बसीं, बाद में पहुंचीं सुविधाएं - Bhopal News

Published on 11 अग॰ 2026

बिना मास्टर प्लान बसा दिया ‘तीसरा भोपाल’:नौकरी, सस्ते मकान और जमीन ने तय की शहर की दिशा; पहले कॉलोनियां बसीं, बाद में पहुंचीं सुविधाएं

भोपाल17 मिनट पहलेलेखक: मनोज जोशी

  • कॉपी लिंक

भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. शीतल शर्मा, टाउन प्लानर

हमारा मास्टर प्लान 1995 में आया था। दस साल बाद 2005 में नया मास्टर प्लान आना था। तब यह अध्ययन होता कि आबादी किस दिशा में बढ़ रही है, रोजगार के नए केंद्र कहां बन रहे हैं और भविष्य में आवासीय-व्यावसायिक लैंडयूज की जरूरत कहां होगी। उसी हिसाब से सड़क, पानी, सीवर और दूसरी नागरिक सुविधाओं की प्लानिंग होती। लेकिन नया प्लान नहीं आया और शहर का बढ़ना नहीं रुका।

नतीजतन- अगले 21 साल में भोपाल की दिशा प्लानिंग के बजाय लोगों की जरूरतों ने तय की। मंडीदीप व आसपास नौकरी करने वालों के लिए नर्मदापुरम रोड से भोजपुर रोड तक का इलाका रहने का विकल्प बना। सस्ते मकान-जमीन की तलाश लोगों को पहले कोलार, फिर नीलबड़-रातीबड़ की ओर ले गई। यहां विकल्प कम हुए तो बसाहट रायसेन रोड की ओर बढ़ने लगी।

इस फैलाव का पैमाना समझिए। आजादी से पहले भोपाल सिर्फ 20.72 वर्ग किमी में था। आज नगर निगम की सीमा 417 वर्ग किमी और प्लानिंग एरिया 1017 वर्ग किमी हो चुका है। यानी करीब 100 साल में प्लानिंग एरिया 50 गुना बढ़ गया। लेकिन पिछले 21 साल में इस बढ़ते शहर को दिशा देने वाला नया मास्टर प्लान नहीं था।

सड़क और उपलब्ध जमीन देखकर पहले कॉलोनियां बसीं, अब उनके पीछे नागरिक सुविधाएं पहुंच रही हैं। यही पुराने और नए के बाद उभरा ‘तीसरा भोपाल’ है- जिसकी दिशा मास्टर प्लान ने नहीं, जरूरतों ने तय की।

नौकरी, सस्ते मकान व जमीन तय करते गए शहर की दिशा; पहले कॉलोनियां बसीं, फिर पहुंची सुविधाएं

कैसे बसा तीसरा भोपाल?

नौकरी ने नर्मदापुरम रोड पहुंचाया... सस्ते घर की तलाश कोलार से नीलबड़-रातीबड़ ले गई

पहला भोपाल : शाहजहांनाबाद और जहांगीराबाद से बैरागढ़ तक बढ़ा शहर

आजादी से पहले करीब 20.72 वर्ग किमी का भोपाल मुख्य रूप से शहर-ए-खास, शाहजहांनाबाद और जहांगीराबाद में बंटा था। शहर को दो परकोटे घेरे हुए थे और पुराने शहर की दीवार में 7 दरवाजे थे। चौक मुख्य व्यापारिक और यातायात केंद्र था। पश्चिम में अहमदाबाद नाम का नया उपनगर भी विकसित किया जा रहा था। विभाजन के बाद सिंध और दूसरी जगहों से आए विस्थापितों को बैरागढ़ की सैन्य बैरकों में बसाया गया। इससे शहर का विस्तार पश्चिम की ओर हुआ।

दूसरा भोपाल : फिर 40 साल में टीटी नगर से भेल तक योजनाबद्ध विस्तार

राजधानी बनने के बाद तालाबों के दक्षिण में टीटी नगर के रूप में नया प्रशासनिक शहर बसा। कॉलोनियों के साथ चौड़ी सड़कें, पार्क, स्कूल और बाजार प्लान किए गए। 1958 में बीएचईएल ने पूर्व में पिपलानी, बरखेड़ा और गोविंदपुरा के आसपास औद्योगिक नगर विकसित किया। उत्तर में पुराना भोपाल, पश्चिम में बैरागढ़, दक्षिण में टीटी नगर और पूर्व में भेल चार सिटी सेंटर बने। बाद में एमपी नगर, कस्तूरबा नगर और रचना नगर ने टीटी नगर और भेल के बीच की दूरी भरी।

तीसरा भोपाल... कोलार से रायसेन-विदिशा रोड तक कॉलोनियां बढ़ीं

2005 से 2018 के बीच भोपाल के विस्तार की दूसरी बड़ी लहर आई। कोलार, होशंगाबाद रोड, रायसेन रोड और अयोध्या बायपास के बाहरी हिस्सों में बड़ी संख्या में आवासीय प्रोजेक्ट आए। सलैया, कटारा, लहारपुर, बागमुगालिया, जाटखेड़ी और बावड़िया कलां का विस्तार हुआ। 2018 के बाद करोंद, भानपुर और विदिशा रोड की ओर शहर बढ़ा। सूखी सेवनिया में टाउनशिप बनीं, कोकता में आरटीओ ऑफिस पहुंचा और गांधी नगर में कॉलेज व नई कॉलोनियां आईं। इस बार बसाहट आगे थी, प्लानिंग पीछे।

.