डोप टेस्ट कराने से क्या-क्या जानकारी मिलती है, कितने दिन पहले किए नशे को पकड़ लेता है

Published on 14 अग॰ 2026

थाईलैंड के फुकेट से 4 अगस्त 2026 को दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 हवा में अचानक भयंकर टर्बुलेंस की चपेट में आ गई, जिसमें कई यात्री और क्रू मेंबर घायल हो गए. घटना के बाद हुई जरूरी जांच में विमान के पायलट-इन-कमांड का डोप टेस्ट पॉजिटिव पाया गया. शुरुआती जांच के बाद सैंपल को कंफर्मेशन के लिए भेजा गया, जहां कंफर्मेटरी टेस्ट में भी रिजल्ट पॉजिटिव आया. वहीं, को-पायलट की जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली.

मामला सामने आने के बाद एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों के लिए डोप टेस्ट जरूरी कर दिया है. नागर विमानन महानिदेशालय यानी DGCA भी पायलटों की डोप टेस्टिंग सिस्टम की समीक्षा कर रहा है. इस पूरे मामले ने एक बार फिर डोप टेस्ट को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है. आमतौर पर इसका नाम खिलाड़ियों के टेस्ट के तौर पर सुनने को मिलता है. आइए समझते हैं कि डोप टेस्ट कैसे होता है, इसमें किन नशीले पदार्थों का पता चलता है, कितने पुराने नशे को यह पकड़ सकता है, टेस्ट कौन करता है और इसका खर्च कितना आता है.

Kaise Hoti Hai Testing

डोप टेस्ट कैसे होता है?

डोप टेस्ट मुख्य रूप से चार तरीकों से किया जाता है. यूरिन, ब्लड, सलाइवा और हेयर फॉलिकल टेस्ट. एयर इंडिया के मामले में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पायलट का ब्लड और यूरिन सैंपल लिया गया था. शुरुआती जांच में पॉजिटिव रिजल्ट आने के बाद कंफर्मेशन के लिए सैंपल दोबारा लैब भेजा गया.

  1. यूरिन टेस्ट सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला और आमतौर पर सस्ता तरीका है. इसमें पहले इम्यूनोएसे से स्क्रीनिंग की जाती है. अगर रिजल्ट पॉजिटिव आता है तो कंफर्मेशन के लिए GC-MS जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है.
  2. ब्लड टेस्ट ज्यादा सटीक जानकारी दे सकता है और इससे शरीर में किसी पदार्थ की मात्रा का पता लगाया जा सकता है.
  3. सलाइवा टेस्ट यानी मुंह के लार के सैंपल से हाल में लिए गए नशे का पता लगाने में मदद मिलती है.
  4. हेयर फॉलिकल टेस्ट से लंबे समय पहले किए गए नशे की जानकारी मिल सकती है और यह कई महीनों तक पुराने इस्तेमाल का संकेत दे सकता है.

कौन-कौन से नशे का पता चलता है?

एयर इंडिया के मामले में पायलट का टेस्ट गांजा के सेवन के लिए पॉजिटिव पाया गया. DGCA रैंडम आधार पर पायलटों के ब्लड और यूरिन सैंपल लेकर गांजा, कोकीन, अफीम और एम्फेटामाइन जैसे नशीले पदार्थों की जांच करता है. सामान्य तौर पर डोप टेस्ट में गांजा, भांग, अफीम-हेरोइन-मॉर्फिन जैसे ओपिओइड्स, कोकीन, एम्फेटामाइन और मेथएम्फेटामाइन, बेंजोडायजेपिन, बार्बिट्यूरेट्स, शराबऔर स्टेरॉयड्स की मौजूदगी देखी जाती है.

कितने दिन पुराने नशे का पता चलता है?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा टेस्ट किया गया है और कौन-सा नशीला पदार्थ लिया गया था. साथ ही व्यक्ति का मेटाबॉलिज्म, नशे की मात्रा और उसके इस्तेमाल की नियमितता भी रिजल्ट को प्रभावित कर सकती है. अमेरिकन एडिक्शन सेंटर्स के मुताबिक, यूरिन टेस्ट में शराब करीब 12-24 घंटे तक, कभी-कभार गांजा लेने पर करीब 3-7 दिन और नियमित इस्तेमाल में करीब 30 दिन तक पता चल सकता है.

वहीं, कोकीन करीब 2-4 दिन, हेरोइन 2-4 दिन और एम्फेटामाइन 2-4 दिन तक यूरिन टेस्ट में पकड़े जा सकते हैं. बेंजोडायजेपिन आमतौर पर 3-7 दिन तक मिल सकता है, हालांकि लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर यह अवधि बढ़ सकती है. Arcpoint Labs के मुताबिक, हेयर टेस्ट से करीब 90 दिन तक पुराने नशे के इस्तेमाल की जानकारी मिल सकती है. सलाइवा टेस्ट आम तौर पर पिछले 1-2 दिन में किए गए इस्तेमाल का पता लगाने में ज्यादा उपयोगी होता है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर डोप टेस्ट किसी भी नशे को एक तय संख्या में दिनों तक पकड़ सकता है. डिटेक्शन टाइम नशे और टेस्ट दोनों के हिसाब से बदलता है.

Dope Testing

डोप टेस्ट कौन करता है?

एविएशन सेक्टर में पायलटों का रैंडम डोप टेस्ट कराया जाता है और सैंपल अधिकृत लैब में भेजे जाते हैं. इसके अलावा डोप टेस्ट सरकारी और प्राइवेट डायग्नोस्टिक लैब, सरकारी या निजी अस्पताल और NABL-मान्यता प्राप्त पैथोलॉजी लैब में भी कराया जा सकता है. खेलों में NADA जैसी संस्थाएं खिलाड़ियों की डोपिंग जांच करती हैं. नौकरी से जुड़े मामलों में इंडस्ट्रियल मेडिकल सेंटर और कोर्ट के आदेश पर फोरेंसिक साइंस लैब यानी FSL भी ऐसे टेस्ट कर सकती है.

डोप टेस्ट में कितना खर्च आता है?

डोप टेस्ट की कीमत टेस्ट के तरीके, कितने नशीले पदार्थों की जांच हो रही है और लैब पर निर्भर करती है. मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर की जानकारी के मुताबिक, 5-पैनल यूरिन डोप टेस्ट की कीमत करीब 2,500 रुपये और 9 से 12-पैनल वाले विस्तृत टेस्ट की कीमत करीब 4,700 से 6,500 रुपये के बीच हो सकती है. कुछ अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4-पैनल टेस्ट की कीमत करीब 3,500 से 9,000 रुपये और 5-पैनल टेस्ट की कीमत करीब 5,000 से 15,000 रुपये तक हो सकती है.

वहीं, घर पर इस्तेमाल होने वाली रैपिड सेल्फ-टेस्ट किट की कीमत ऑनलाइन मार्केट में करीब 65 रुपये प्रति किट से शुरू हो सकती है. हालांकि, ऐसी किट और प्रोफेशनल लैब टेस्ट को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए. टेस्ट की कीमत शहर, लैब और जांच में शामिल नशीले पदार्थों की संख्या के हिसाब से बदल सकती है.

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है.  साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.

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