डीआर काँगो: अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस बीमारी से अब तक 2,325 लोगों की मौत हो चुकी है. यह संख्या डीआरसी में 2018-2020 के इबोला प्रकोप में हुई 2,299 मौतों के आँकड़े को पार कर गई है. उस प्रकोप को अब तक देश का सबसे घातक इबोला प्रकोप माना जाता था.
15 मई को राष्ट्रीय प्रशासन द्वारा मौजूदा प्रकोप की घोषणा किए जाने के बाद, जुलाई के अन्त तक पुष्ट मामलों की संख्या के लिहाज़ से भी यह देश का अब तक का सबसे बड़ा इबोला प्रकोप बन गया. ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, अब तक 4,945 मामलों की पुष्टि हो चुकी है.
इस समय 730 मरीज़ पृथकवास में या अस्पताल में हैं, जबकि 1,040 लोग बीमारी से उबर चुके हैं. सरकारी आँकड़ों के अनुसार, मृत्यु दर बढ़कर 46 प्रतिशत हो गई है.
दुनिया में इससे बड़ा इबोला प्रकोप केवल पश्चिम अफ़्रीका में 2014-2016 के दौरान दर्ज किया गया था. WHO के अनुसार, उस प्रकोप में 28,616 मामले सामने आए और 11,310 लोगों की मौत हुई. हालाँकि, मौजूदा बुंडिबुग्यो प्रकोप में मौतें कहीं अधिक तेज़ी से हो रही हैं.
बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए अभी कोई स्वीकृत उपचार उपलब्ध नहीं है. ब्रिटेन और कैनेडा में वैक्सीन के परीक्षण चल रहे हैं.
कमज़ोर स्वास्थ्य ढाँचा, प्रकोप से प्रभावित क्षेत्र में पहले से जारी हिंसक टकराव और स्वास्थ्य अधिकारियों के प्रति अविश्वास, इससे निपटने के प्रयासों में बड़ी बाधा बने हुए हैं. WHO ने चेतावनी दी है कि बीमारी जिस तेज़ी से फैल रही है, उससे निपटने के प्रयास पीछे छूटते जा रहे हैं.
पड़ोसी देश सतर्क
संयुक्त राष्ट्र और उसके वैश्विक स्वास्थ्य साझीदार, इबोला को दक्षिण सूडान और मध्य अफ़्रीकी गणराज्य जैसे पड़ोसी देशों में फैलने से रोकने के लिए प्रयास कर रहे हैं.
जून की शुरुआत में, WHO और अफ़्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्रों ने एक संयुक्त कार्रवाई योजना शुरू की थी. इसका उद्देश्य पूरे महाद्वीप में आपातकालीन समन्वय, बीमारी की निगरानी, प्रयोगशाला जाँच, संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण, उपचार, सामुदायिक भागेदारी, शोध, रसद और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सहायता को मज़बूत करना है.
संयुक्त राष्ट्र मानवीय राहत समन्वय कार्यालय (OCHA) ने डीआरसी में कार्रवाई तेज़ करने, पड़ोसी देशों को बीमारी के सम्भावित प्रसार के लिए तैयार करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के प्रति भरोसा बढ़ाने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ काम करने हेतु 5.45 करोड़ डॉलर आवंटित किए हैं.
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा मिशन, MINUSCAकई यूएन एजेंसियों के साथ मिलकर स्थानीय प्रशासन को तकनीकी सहायता देने के साथ-साथ निगरानी और तैयारी के उपायों, संचार, सामुदायिक जागरूकता एवं क्षमता निर्माण में सहयोग दे रहा है.
उन्होंने कहा, “देश में हमारे शान्तिरक्षा सहयोगी तकनीकी और संचालन सहायता मुहैया करा रहे हैं. इसके तहत स्वास्थ्य विशेषज्ञों को मध्य अफ़्रीकी गणराज्य के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँचाने और वहाँ आवश्यक उपकरण व सामग्री पहुँचाने में मदद दी जा रही है.”
कार्रवाई का दायरा बढ़ा
WHO के प्रवक्ता तारिक याशारेविच ने यूएन न्यूज़ को बताया कि इबोला पर क़ाबू पाने के लिए एजेंसी ने अपनी कार्रवाई का दायरा तेज़ी से बढ़ाया है.
शुक्रवार को WHO ने बांगुई में मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, डीआरसी, काँगो गणराज्य, दक्षिण सूडान और युगांडा के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई.
इन देशों ने बीमारी की निगरानी और महामारी से निपटने की तैयारियों में आपसी सहयोग मज़बूत करने पर सहमति जताई.
WHO ने पिछले सप्ताह कहा था कि उसका लक्ष्य संक्रमण पर क़ाबू पाकर तीन महीनों के भीतर इबोला के तेज़ फैलाव को रोकना है.
एजेंसी के अनुसार, प्रकोप से निपटने के लिए हर स्तर पर अब भी अतिरिक्त सहायता की ज़रूरत है.
WHO ने कहा, “इस प्रकोप को समाप्त करने और ज़िन्दगियाँ बचाने के लिए राहतकर्मियों को प्रभावित समुदायों तक सुरक्षित पहुँच और ज़रूरी संसाधनों की आवश्यकता है.”