साइको पति ने सुहागरात में ही रखी थी शर्त! प्रज्ञा मिश्रा को सब पता था, फिर भी क्यों नहीं बचा पाईं बहन की जान?
Published: Friday, August 21, 2026, 11:24 [IST]
लखनऊ में दिव्या मिश्रा हत्याकांड ने पति-पत्नी के रिश्ते के पीछे छिपे तनाव की एक बेहद डरावनी तस्वीर सामने रखी है। ICICI बैंक में काम करने वाली दिव्या मिश्रा की 21 अगस्त को गोमतीनगर में बैंक के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद उनके पति मानस वाजपेयी घर पहुंचे, जहां उनकी बहन की भी गोली लगने से मौत हुई। इसके बाद मानस ने खुदकुशी कर ली। मामले की जांच जारी है और पुलिस हत्या के पीछे की पूरी वजह समझने में जुटी है।
मामला तब और उलझ गया, जब मानस के व्हाट्सऐप स्टेटस में पत्नी पर धोखा देने का आरोप लगाया गया और दिव्या की बहन पत्रकार व मशहूर यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा और उनके पति भरत यादव का नाम लेकर कहा गया कि उन्हें सब कुछ पता था। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर प्रज्ञा से सवाल होने लगे।
करीब 15 घंटे बाद प्रज्ञा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपना पक्ष रखा। उन्होंने मानस पर गंभीर आरोप लगाए और बताया कि दिव्या ने शादी के बाद अपने रिश्ते को लेकर उनसे कई बातें साझा की थीं। प्रज्ञा ने कहा कि उनकी बहन का पति साइको था। शादी के पहले दिन से ही बहन को परेशान कर रहा था।
सुहागरात पर ही खर्च की शर्त, यहीं से शुरू हुआ विवाद?
प्रज्ञा मिश्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि हत्यारे मानस ने शादी की पहली ही रात यानी सुहागरात पर ही अपना असली रंग दिखा दिया था। उसने दिव्या के सामने घर के खर्चों की एक लिस्ट थमाई और शर्त रखी कि आधा खर्च उसे ही उठाना होगा। दिव्या ने उस वक्त तो शांति के लिए यह बात मान ली थी।
लेकिन जब विवाद हद से ज्यादा बढ़ गया, तो दिव्या ने पिछले एक साल से घर के खर्चों में अपना हिस्सा देना बंद कर दिया था। प्रज्ञा का कहना है कि इसी बात को वह साइको पति 'चीटिंग' समझ बैठा था। वह छोटी-छोटी बातों पर क्रूरता करता था। अगर ऑनलाइन सामान मंगाने में कोई टमाटर भी खराब निकल आता, तो वह दिव्या को पीटता था कि खराब सामान क्यों मंगाया।
प्रज्ञा ने अपने पोस्ट में मानस पर छोटी-छोटी बातों पर दिव्या के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि ऑनलाइन किराना सेवा से मंगाए गए टमाटर में कोई टमाटर खराब निकलने पर भी दिव्या को दोष दिया जाता था।
प्रज्ञा के मुताबिक, दिव्या पति से अलग होना चाहती थी और तलाक की कानूनी प्रक्रिया भी चल रही थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों के बीच वैवाहिक विवाद था और तलाक की कार्यवाही आगे बढ़ रही थी। पुलिस ने भी दोनों के बीच विवाद की बात कही है।
बीमार मां को पीटने का आरोप और फैमिली कोर्ट की झड़प
प्रज्ञा ने एक और खौफनाक दावा करते हुए लिखा कि मानस और उसकी बहन ने मिलकर अपनी ही बीमार मां को इस कदर पीटा था कि उनकी मौत हो गई थी। दिव्या इस दरिंदगी से तंग आ चुकी थी और उससे अलग होना चाहती थी।
फैमिली कोर्ट में काउंसलिंग के दौरान भी आरोपी ने काउंसलर से हाथापाई और झड़प की थी। प्रज्ञा का कहना है कि उनकी बहन मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना सह रही थी। कुछ समय पहले भारी तनाव के कारण दिव्या का एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें उसके हाथ-पैर टूट गए थे। डेढ़-दो महीने बाद वह लंगड़ाकर ऑफिस जाने लगी थी। हत्या वाले दिन भी वह लंगड़ाते हुए ही घर से निकली थी।
पीछा करने का आरोप, हादसे के बाद भी चलती थीं लंगड़ाकर
प्रज्ञा ने दावा किया कि मानस पहले भी दिव्या का पीछा कर चुका था। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले तनाव के बीच दिव्या का एक्सीडेंट हुआ था। उनके हाथ और पैर में चोट आई थी। करीब डेढ़ से दो महीने बाद उन्होंने दोबारा ऑफिस जाना शुरू किया था। प्रज्ञा के मुताबिक, घटना वाले दिन भी दिव्या ठीक से नहीं चल पा रही थीं।
प्रज्ञा ने यह भी कहा कि उनके पास घटना से जुड़े तीन सीसीटीवी फुटेज होने की जानकारी है। उनके मुताबिक, एक फुटेज में दिव्या घर से निकलती दिख रही हैं और दूसरे में बैंक के पास उनका पति से सामना होता दिखाई देता है। सामने आए वीडियो और घटनाक्रम की जांच पुलिस कर रही है।
प्रज्ञा ने पुलिस जांच को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि मानस के पास तीन हथियार कैसे पहुंचे। उनका कहना है कि मानस कार नहीं चला पाता था, इसलिए ऑटो से आने-जाने की बात सामने आती है तो पुलिस को यह भी देखना चाहिए कि उसे ऑटो में कौन लेकर आया और कौन उसे लेकर गया। मीडिया रिपोर्टों में घटनास्थल से कई हथियार बरामद होने की बात सामने आई है। पुलिस इन हथियारों और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ रही है।
'मुझे पता था पति साइको था', फिर भी प्रज्ञा क्यों नहीं रोक पाईं त्रासदी?
यही इस पूरे मामले का सबसे भावुक सवाल है। प्रज्ञा खुद कहती हैं कि दिव्या ने उन्हें बताया था कि उसका पति सामान्य व्यवहार नहीं करता था। उन्हें पति की मारपीट, पीछा करने और वैवाहिक विवाद की जानकारी थी। लेकिन उनके मुताबिक, उन्हें अंदाजा नहीं था कि मामला इतनी भयावह हिंसा तक पहुंच जाएगा।
प्रज्ञा ने बताया कि तमाम परेशानियों के बाद भी दिव्या रिश्ते को पूरी तरह खत्म नहीं करना चाहती थीं। वह तीज का व्रत रखने वाली थीं। हाथ पर मानस का टैटू भी उन्होंने नहीं हटाया था। प्रज्ञा के मुताबिक, दिव्या के मन में कहीं न कहीं उम्मीद थी कि उनका पति बदल जाएगा और रिश्ता ठीक हो जाएगा। यही बात इस घटना को और दर्दनाक बनाती है। किसी रिश्ते में परेशानी की जानकारी होना और यह समझ पाना कि सामने वाला व्यक्ति हत्या जैसा कदम उठा सकता है, दोनों बिल्कुल अलग चीजें हैं।
मां को अब भी नहीं बताया गया कि दिव्या की मौत हो चुकी है
प्रज्ञा ने बताया कि उनकी बीमार मां को अभी तक दिव्या की मौत की सच्चाई नहीं बताई गई है। उन्हें केवल यह कहा गया है कि दिव्या की हालत गंभीर है। प्रज्ञा के लिए सबसे मुश्किल पल यही है कि उन्हें अपनी मां के सामने सच बताना है, जबकि दिव्या का शव पोस्टमॉर्टम के लिए रखा गया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि कभी-कभी सच बोलना कितना मुश्किल हो जाता है। परिवार इस वक्त गहरे सदमे में है।
'मेरी बहन की हत्या में राजनीति मत खोजिए', प्रज्ञा का तीखा जवाब
मानस के स्टेटस में नाम आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रज्ञा से कई सवाल पूछे गए। कुछ लोगों ने उनकी पत्रकारिता और भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। प्रज्ञा ने इसका जवाब देते हुए कहा कि वह करीब नौ साल से पत्रकारिता कर रही हैं और जिन लोगों या मुद्दों की आलोचना करती हैं, उनके सामने जाकर भी सवाल पूछने का साहस रखती हैं।
उन्होंने कहा कि विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन निजी दुश्मनी नहीं होनी चाहिए। प्रज्ञा ने साफ किया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में जानबूझकर कोई गलत काम नहीं किया है और आगे भी ऐसा नहीं करेंगी। इस पूरे मामले में अभी सबसे जरूरी बात यही है कि मानस के आरोपों और प्रज्ञा के दावों को जांच के निष्कर्ष से अलग रखा जाए।
पुलिस के सामने अब कई सवाल हैं। हत्या की पूरी योजना कैसे बनी, हथियार कहां से आए, मानस बैंक तक कैसे पहुंचा, घटना के बाद उसका रास्ता क्या था और पूरे घटनाक्रम में कौन-कौन सी कड़ियां जुड़ी थीं। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही साफ होंगे। फिलहाल दिव्या की हत्या, उनकी बहन की मौत और मानस की खुदकुशी ने एक ऐसा सवाल जरूर छोड़ दिया है कि रिश्ते में बढ़ती हिंसा के संकेत आखिर किस मोड़ पर गंभीर खतरे में बदल जाते हैं।
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