अलवर नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण से पहले भाजपा और कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट चाहने वाले बन गए है। शहर के 65 वार्डों में के लिए बीजेपी के पास 800 से ज्यादा आवेदन आए हैं। वहीं, कांग्रेस में 550 आवेदन आए हैं।
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राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो इस बार दोनों पार्टियों के सामने मुकाबला सिर्फ कांग्रेस बनाम भाजपा का नहीं रहने वाला है। कई वार्डों में मुकाबला पार्टी प्रत्याशी बनाम बागी दावेदार का भी बन सकता है।
इसीलिए टिकट वितरण से पहले ही दोनों दलों ने अपने स्तर पर डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू कर दी है। नाराज दावेदारों को मनाने, मजबूत दावेदारों को पार्टी के साथ बनाए रखने और संभावित निर्दलीय उम्मीदवारों को रोकने की रणनीति पर भी काम चल रहा है।
भाजपा के हर वार्ड मे 10 से ज्यादा आवेदन
भाजपा में हर वार्ड के लिए लगभग 10 या उससे ज्यादा दावेदारों ने टिकट के लिए आवेदन किया है। पार्टी ने सभी वार्डों में लगाए गए प्रभारियों के जरिए दावेदारों का सर्वे कराया। प्रभारियों ने अपना सर्वे पूरा कर प्रत्येक वार्ड से तीन-तीन नामों का पैनल तैयार कर पार्टी कार्यालय में जमा करा दिया है।
अब इन पैनलों पर भाजपा की कोर कमेटी मंथन करेगी। इसके बाद प्रत्येक वार्ड के तीन नामों का पैनल जयपुर भेजा जाएगा। पार्टी की उच्च स्तरीय कमेटी इन नामों पर अंतिम चर्चा करेगी। इसके बाद टिकट की घोषणा होगी।
पहली सूची में 'सेफ वार्ड', दूसरी में बगावत वाले वार्ड
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा की पहली सूची गुरुवार को आने की संभावना है। इसमें करीब आधे वार्डों के प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जा सकते हैं। पहली सूची में ऐसे वार्डों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां पार्टी को टिकट बदलने या किसी दावेदार के बगावत करने से ज्यादा नुकसान की आशंका नहीं है।
वहीं, जिन वार्डों में दावेदारों के बीच कड़ा मुकाबला है और टिकट कटने के बाद खुली बगावत, खिलाफत या निर्दलीय प्रत्याशी उतरने की संभावना ज्यादा है। उनके नाम दूसरी सूची के लिए रोके जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार दूसरी सूची पहली सूची के करीब दो दिन बाद जारी हो सकती है।
कांग्रेस में भी 550 से ज्यादा आवेदन, हर वार्ड में कई दावेदार
65 वार्डों के लिए कांग्रेस के पास करीब 550 आवेदन पहुंचे हैं। पार्टी की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षकों ने दावेदारों का सर्वे कर प्रत्येक वार्ड से तीन-तीन नामों का पैनल तैयार कर पार्टी को सौंप दिया है। अब कांग्रेस कमेटी इन पैनलों पर चर्चा कर अंतिम नाम तय करेगी। कांग्रेस की भी पहली सूची 27 अगस्त को आने की संभावना है।
पार्टी भी पहली सूची में उन वार्डों के प्रत्याशियों के नाम घोषित करने की रणनीति बना रही है, जहां टिकट को लेकर ज्यादा खिलाफत की संभावना नहीं है।
असली परीक्षा टिकट घोषणा के बाद
भाजपा और कांग्रेस के सामने असली चुनौती टिकट घोषित होने के बाद शुरू होगी। एक वार्ड में कई दावेदार होने के कारण टिकट मिलने की संभावना सिर्फ एक की है। ऐसे में बाकी दावेदारों को मनाना दोनों दलों के लिए आसान नहीं होगा।
टिकट कटने के बाद कुछ दावेदार पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं तो कुछ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर सकते हैं। यही निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी समीकरण बिगाड़ने में दोनों दलों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन सकते हैं।