'मैं चाहता था कि राहुल गांधी',सोनम वांगचुक ने अनशन को लेकर किया बड़ा खुलासा, अभिजीत दीपके की भी खोली पोल

Published on 30 अग॰ 2026

'मैं चाहता था कि राहुल गांधी',सोनम वांगचुक ने अनशन को लेकर किया बड़ा खुलासा, अभिजीत दीपके की भी खोली पोल

Time Published: Sunday, August 30, 2026, 9:15 [IST]

NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन और अपनी लंबी भूख हड़ताल को लेकर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अब कई ऐसे दावे किए हैं, जिनसे उस आंदोलन की अंदरूनी कहानी पर बहस तेज हो सकती है।

प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में वांगचुक ने बताया कि वह आंदोलन को किस तरह खत्म करना चाहते थे, संसद मार्च का क्या प्लान था और उस दौरान अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की भूमिका को वह किस नजर से देखते हैं।

Sonam Wangchuk Rahul Gandhi

राहुल गांधी से अनशन तुड़वाना चाहते थे सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक के मुताबिक आंदोलन खत्म करने की उनकी योजना अचानक नहीं बनी थी। उनका इरादा था कि 20 जुलाई को संसद तक मार्च किया जाए और इसके बाद आंदोलन की कमान विपक्ष को सौंप दी जाए। उन्हें उम्मीद थी कि बड़ी संख्या में लोग इस मार्च में पहुंचेंगे।

उन्होंने बताया कि आशुतोष रांका ने करीब 10 हजार लोगों के मार्च में शामिल होने की बात कही थी। वहीं सौरव दास का अनुमान इससे ज्यादा था। उनके मुताबिक यह संख्या 15 हजार तक पहुंच सकती थी। सोनम वांगचुक ने कहा कि मार्च के लिए उन्हें व्हीलचेयर देने की पेशकश भी की गई थी। लेकिन उनकी इच्छा कुछ और थी।

सोनम वांगचुक ने कहा ,

"मैं चाहता था कि संसद तक जाऊं और राहुल गांधी जी के हाथों अपना अनशन खत्म करूं। मेरी सोच थी कि आंदोलन को सम्मानजनक तरीके से खत्म किया जाए और मुद्दा विपक्ष को सौंप दिया जाए।"

सोनम वांगचुक ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि आंदोलन में एक-दो लाख लोग जुट सकते हैं। लेकिन उन्हें मिले अनुमानों के मुताबिक संख्या काफी कम रहने वाली थी।

वांगचुक ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि आंदोलन में एक-दो लाख लोग जुट सकते हैं। लेकिन उन्हें मिले अनुमानों के मुताबिक संख्या काफी कम रहने वाली थी। उनका दावा है कि इसके बावजूद उन्हें अपनी योजना के मुताबिक आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला और उन्हें जल्द ही आंदोलन से हटा दिया गया।

जब छात्रों पर पुलिस कार्रवाई हो रही थी, तब कहां थे अभिजीत दीपके?

प्रखर गुप्ता ने बातचीत में आंदोलन के दौरान नेतृत्व को लेकर उठे सवाल पर भी वांगचुक से बात की। खासकर उस वक्त, जब छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आ रही थीं और वांगचुक हिरासत में थे।

सोनम वांगचुक ने बताया कि सौरव दास और आशुतोष रांका मंत्रियों के साथ बैठकों में व्यस्त थे, जबकि अभिजीत दीपके उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जिसमें अभिनेत्री शबाना आजमी समेत कई लोग शामिल थे। यह स्पष्टीकरण अपनी जगह है, लेकिन इससे आंदोलन के नेतृत्व को लेकर उठे सवाल खत्म नहीं होते। ऐसे आंदोलनों में सिर्फ मुद्दा ही नहीं, बल्कि संकट के वक्त नेतृत्व कौन संभालता है, यह भी लोगों की नजर में रहता है।

'ये संत नहीं हैं', दीपके-रांका और सौरव दास पर वांगचुक का आकलन

सोनम वांगचुक ने अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने संकेत दिया कि इन लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह दावा नहीं किया कि भविष्य में इनमें से कौन किस पार्टी में जाएगा।

वांगचुक ने कहा,

"इन लोगों में राजनीतिक महत्वाकांक्षा जरूर है। मैं यह गारंटी नहीं दे सकता कि भविष्य में इनमें से कोई भ्रष्ट नहीं होगा। ये ऐसे संत भी नहीं हैं जिनमें निजी स्वार्थ बिल्कुल न हो।"

यानी वांगचुक ने लोगों को इन नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर खुद अपना फैसला करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी आंदोलन का हिस्सा होना अपने आप में किसी व्यक्ति के राजनीतिक भविष्य की गारंटी नहीं देता।

क्या जंतर-मंतर सिर्फ आंदोलन था या राजनीतिक लॉन्चपैड?

अभिजीत दीपके को लेकर वांगचुक की टिप्पणी ने राजनीतिक चर्चा को और दिलचस्प बना दिया है। उनके आकलन में जंतर-मंतर का आंदोलन सिर्फ विरोध का मंच नहीं था। यह आगे की राजनीति के लिए एक संभावित एंट्री पॉइंट भी बन सकता था।

वांगचुक ने कहा,

''जंतर मंतर सिर्फ आंदोलन नहीं था,एंट्री पॉइंट था। अभिजीत दीपके AAP बैकग्राउंड से आते हैं उसमें मुझे कोई खास दिक्कत नहीं है। लेकिन हां उनकी राजनीति में आने की पूरी महत्वाकांक्षाएं हैं। पार्टी कौन सी होगी पता नहीं, लेकिन वो भविष्य में आपको राजनीति में जरूर दिखेंगे।''

वांगचुक ने दीपके की राजनीतिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि उनके भविष्य में राजनीति में आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि किस पार्टी के साथ जाएंगे, इस पर कोई पक्का दावा नहीं किया गया। यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि क्या आंदोलन में सक्रिय कुछ चेहरे आगे चलकर चुनावी राजनीति में उतरने की तैयारी कर रहे थे।

सलमान खान के 'It's done bro' पर क्या बोले वांगचुक?

वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान अभिनेता सलमान खान का एक पोस्ट भी काफी वायरल हुआ था। सलमान ने उनसे अनशन खत्म करने की अपील की थी और अपने अंदाज में लिखा था कि अब इसे खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने जरूरत पड़ने पर अपने घर से खाना भेजने की बात भी कही थी।

वांगचुक ने बताया कि सलमान के उस संदेश के बाद उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला किया। पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई थी और सलमान का 'It's done bro' वाला अंदाज खूब वायरल हुआ।

प्रखर गुप्ता ने जब इस बारे में वांगचुक से पूछा तो उन्होंने कहा,

"हर किसी की अपनी मजबूरियां होती हैं। मैं उन चीजों में नहीं जाना चाहता। हर तरफ की परिस्थितियों को देखना पड़ता है। उन्होंने जो कहा, मैं उसका सम्मान करता हूं। बाकी उनकी मजबूरियों पर मैं कुछ नहीं कहना चाहूंगा।"

3 Idiots और आमिर खान पर भी खुलकर बोले वांगचुक

बातचीत के दौरान आमिर खान का जिक्र भी आया। आमिर खान की फिल्म 3 Idiots को लंबे समय से वांगचुक के काम और विचारों से जोड़कर देखा जाता रहा है। हालांकि आमिर ने पहले कहा था कि फिल्म सीधे वांगचुक की जिंदगी पर आधारित नहीं थी और वह उनसे कभी नहीं मिले थे।

बाद में दोनों का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे एक अवॉर्ड शो में साथ दिखाई दिए। उस वक्त आमिर खान की गजनी की शूटिंग कर रहे थे। इस पर वांगचुक ने हल्के अंदाज में कहा कि शायद आमिर उस समय अपने किरदार में इतने डूबे हुए थे कि उन्हें वह मुलाकात याद नहीं रही।