पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजर की राजधानी नियामे में सैन्य विद्रोह की कोशिश ने सत्तारूढ़ सैन्य शासन के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया। राज्य टेलीविजन की रिपोर्ट के मुताबिक, विद्रोह की कोशिश के दौरान कई सैनिक मारे गए या गिरफ्तार किए गए। करीब 24 घंटे तक चली इस उथल-पुथल के दौरान राजधानी में गोलीबारी और धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं।
क्या नाइजर में फिर तख्ता पलट की कोशिश हुई?
युवा सैनिकों के एक समूह ने राजधानी के मुख्य एयरपोर्ट परिसर में स्थित अहम सैन्य अड्डे पर विद्रोह का प्रयास किया। रिपोर्ट के मुताबिक, ये सैनिक देश में लगातार बढ़ती उग्रवादी हिंसा और सुरक्षा बलों में हो रही मौतों से नाराज थे। राज्य प्रसारक आरटीएन ने कई दर्जन, ज्यादातर युवा सैनिकों को सार्वजनिक रूप से पेश किए जाने की तस्वीरें प्रसारित कीं। रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों ने कई जगहों पर हुई लड़ाई के बाद हालात पर धीरे-धीरे काबू पाया और विद्रोही सैनिकों को गिरफ्तार किया। हालांकि, अभी तक इस बात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी कि सुरक्षा बलों ने सैन्य अड्डे पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया है।
विज्ञापन
एयरपोर्ट के सैन्य अड्डे में क्या हुआ?
नाइजर के रक्षा मंत्री जनरल सलीफू मोदी के मुताबिक, विद्रोही सैनिकों के एक समूह ने सैन्य अड्डे पर कुछ अधिकारियों को बंधक बना लिया था। इसके बाद उन्होंने कुछ संवेदनशील स्थानों पर गोलीबारी की। सरकार ने इसे सैन्य अनुशासन और नियमों का उल्लंघन बताया। यह सैन्य अड्डा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां नाइजर की वायुसेना का बेस होने के साथ-साथ नाइजर, बुर्किना फासो और माली की संयुक्त सैन्य टुकड़ी का मुख्यालय भी है।
विज्ञापन
रूस के अफ्रीका कॉर्प्स ने जुंटा की मदद की?
विश्लेषकों और राजनयिकों के अनुसार, विद्रोह को दबाने में रूस के अफ्रीका कॉर्प्स ने स्थानीय सुरक्षा बलों को हवाई और जमीनी सहायता दी। रूसी मीडिया ने नाइजर में रूस के राजदूत विक्टर वोरोपायेव के हवाले से बताया कि वरिष्ठ नाइजर सैन्य अधिकारियों ने एयरपोर्ट स्थित अफ्रीका कॉर्प्स के बेस का दौरा किया और विद्रोह दबाने में मदद के लिए उसके सैनिकों का आभार जताया। इस बीच, सैन्य शासन के प्रमुख अब्दुरहामाने त्चियानी के ठिकाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
नाइजर में क्यों बढ़ रहा है सेना के भीतर असंतोष?
नाइजर में सैन्य शासन 2023 के तख्ता पलट के बाद सत्ता में आया था। उस समय जुंटा ने दावा किया था कि निर्वाचित सरकार देश में बढ़ती सशस्त्र हिंसा को रोकने में विफल रही है। सत्ता संभालने के बाद नाइजर ने अपने पुराने पश्चिमी सुरक्षा साझेदारों से दूरी बनाई और रूस के साथ संबंध मजबूत किए। इसके बावजूद देश में उग्रवादी हिंसा और सुरक्षा बलों पर हमले जारी रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि लगातार बिगड़ती सुरक्षा स्थिति अब सेना के भीतर भी असंतोष को बढ़ावा दे रही है।
इस साल एयरपोर्ट बेस पर तीसरी बार हमला
नियामे के डियोरी हामानी इंटरनेशनल एयरपोर्ट स्थित सैन्य अड्डे पर इस साल यह तीसरा हमला बताया जा रहा है। इससे पहले भी जिहादी विद्रोहियों ने यहां दो बार हमला किया था। लगातार हो रहे हमलों से सेना के भीतर तनाव और बढ़ सकता है। नाइजर के अलावा पड़ोसी बुर्किना फासो और माली में भी सैन्य शासन है और तीनों देश क्षेत्र में बढ़ती असुरक्षा से जूझ रहे हैं।
नाइजर की जुंटा ने क्या कहा?
सत्तारूढ़ सैन्य परिषद ने लोगों से एकजुट रहने की अपील की है। परिषद ने कहा कि देश की रक्षा और सुरक्षा के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह सक्रिय हैं तथा लोगों को एकजुट, सतर्क और सहयोगी बने रहना चाहिए। अल्जीरिया के विदेश मंत्रालय ने भी नाइजर के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि वह इस मुश्किल स्थिति से बाहर निकलने और जल्द स्थिरता बहाल करने के प्रयासों में उसके साथ खड़ा है।