दस्तावेजों से इतिहास समझने पर जोर

Published on 31 अग॰ 2026

दस्तावेजों से इतिहास समझने पर जोर

August 31, 2026

दस्तावेजों से इतिहास समझने पर जोर

Emphasis on understanding history through documents : अमृतसर। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक जगतार सिंह की पुस्तक ‘डॉक्यूमेंट्स ऑफ़ सिख स्ट्रगल’ पर चर्चा आयोजित की गई। वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने कहा कि इतिहास को भावनाओं और अनुमानों के बजाय प्रामाणिक दस्तावेजों व भरोसेमंद स्रोतों के आधार पर समझना चाहिए।

कार्यक्रम में करीब एक हजार विद्वानों, शिक्षकों, पत्रकारों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में किताब पर हुई चर्चा के दौरान प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि इस किताब का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि इसने ऐतिहासिक घटनाओं को दस्तावेज़ों और संदर्भों से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि छात्रों और शोधकर्ताओं को किसी भी विषय पर बात करते समय इसके पीछे के भरोसेमंद स्रोतों और संदर्भों को ध्यान में रखना चाहिए। भावनाओं के बजाय तथ्यों के आधार पर इतिहास को समझना आज के समय की बड़ी ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का मकसद सिर्फ़ डिग्री देना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को उनके इतिहास, विरासत, भाषा और सामाजिक सरोकारों से जोड़ना भी है। उन्होंने पंजाबी भाषा को मज़बूत करने और ऐतिहासिक दस्तावेज़ों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा आर्काइव तैयार करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी विद्वानों और शोधकर्ताओं के साथ मिलकर इस दिशा में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।

किताब के लेखक जगतार सिंह ने कहा कि ‘डॉक्यूमेंट्स ऑफ़ सिख स्ट्रगल’ तैयार करने के पीछे उनका मकसद सिख इतिहास और पंजाब के राजनीतिक-सामाजिक सफ़र से जुड़े असली दस्तावेज़ों को इकट्ठा करना और उन्हें पाठकों और शोधकर्ताओं तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि पंजाब और सिख इतिहास को समझने के लिए, पिछली लगभग एक सदी की घटनाओं को उनके ऐतिहासिक संदर्भ में देखना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि किताब में अलग-अलग ऐतिहासिक दौर से जुड़े अहम दस्तावेज़ शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष या आंदोलन की सही समझ उस समय के असली दस्तावेज़ों को पढ़े बिना पूरी नहीं हो सकती। उनके अनुसार, दस्तावेज़ यह समझने में मदद करते हैं कि किसी घटना के समय राजनीतिक और सामाजिक हालात क्या थे और अलग-अलग पक्षों का क्या रुख था।

गुरदर्शन सिंह बहिया ने किताब पर अपने विचार रखते हुए कहा कि लंबी मेहनत के बाद जगतार सिंह ने ऐसा काम किया है, जिसकी ज़रूरत यूनिवर्सिटी और रिसर्च संस्थानों को महसूस हो रही थी। उन्होंने कहा कि किताब में बहुत सारे दस्तावेज़ शामिल हैं और कई दस्तावेज़ पहली बार पाठकों के सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि किताब की खासियत सिर्फ़ दस्तावेज़ों को इकट्ठा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लेखक ने हर दस्तावेज़ के ऐतिहासिक संदर्भ को भी स्पष्ट करने की कोशिश की है। इससे पाठक को यह समझने में मदद मिलती है कि दस्तावेज़ किन हालात में तैयार किया गया था और उस समय राजनीतिक स्थिति क्या थी। उन्होंने कहा कि यह किताब सिख संघर्ष, अकाली राजनीति और पंजाब के इतिहास को समझने वाले शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत साबित हो सकती है। वरिष्ठ पत्रकार आई.पी. सिंह ने कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेज़ सिर्फ़ कागज़ के टुकड़े नहीं होते, बल्कि वे किसी समाज, देश या आंदोलन के इतिहास को समझने का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं।