
फास्टैग यूजर्स के लिए बैंक बदलना अब पहले से आसान होगा। मोबाइल सिम की तरह FASTag भी पोर्ट किया जा सकेगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के दौरान OneTag सर्विस लॉन्च की। इस सुविधा के बाद यूजर को बैंक बदलने के लिए गाड़ी की विंडशील्ड पर लगा पुराना फास्टैग स्टिकर हटाने या नया फिजिकल टैग लगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
FASTag Portability का सबसे बड़ा फायदा उन वाहन मालिकों को मिलेगा, जो अपने मौजूदा बैंक की सर्विस से संतुष्ट नहीं हैं या किसी दूसरे बैंक से फास्टैग मैनेज करना चाहते हैं। नई व्यवस्था में एक ही फास्टैग स्टिकर अलग-अलग बैंकों के बीच पोर्टेबल होगा। टोल प्लाजा पर टैक्स कटने की प्रक्रिया पहले जैसी ही रहेगी। बदलाव बैकएंड सिस्टम में होगा, जिसे नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन नेटवर्क संभालेगा।
VIDEO | Mumbai: Speaking at Global Fintech Fest 2026, Union Minister Nitin Gadkari, says, “FASTag is one of the success stories. I do not want to tell you about the past before FASTag, because it is better not to talk about it. Who used to collect the toll, how they behaved, and… pic.twitter.com/m61hh9PWBE
— Press Trust of India (@PTI_News) September 11, 2026
Table of Contents
- OneTag से बड़ा बदलाव
- FASTag Portability का सीधा फायदा
- टोल प्लाजा पर प्रक्रिया पहले जैसी
- री-इश्यू का खर्च और कचरा घटेगा
- NETC और RFID कैसे काम करते हैं
- यूजर के लिए क्या बदलेगा
- डिजिटल टोल सिस्टम की नई दिशा
- FASTag में गाड़ी नंबर गलत हुआ तो फौरन कार्रवाई, यात्रियों के लिए क्या बदलने वाला है
- FASTag Cashless Toll: 1 अप्रैल से टोल पर कैश नहीं चलेगा
OneTag से बड़ा बदलाव
अब तक फास्टैग यूजर को बैंक बदलने के लिए पुराना टैग अकाउंट बंद करना पड़ता था। इसके बाद नए बैंक से दोबारा ऑनबोर्डिंग करनी होती थी और नया फिजिकल स्टिकर लेना पड़ता था।
इस प्रक्रिया में समय भी लगता था और कई बार यूजर को परेशानी भी होती थी। पुराने टैग को हटाना, नया टैग लगवाना और अकाउंट एक्टिवेशन जैसी प्रक्रिया आम वाहन मालिकों के लिए झंझट भरी रहती थी।
OneTag सर्विस इसी परेशानी को कम करने के लिए लाई गई है। अब यूजर एक ही फास्टैग स्टिकर को नए बैंक से जोड़ सकेगा। यानी गाड़ी पर लगा टैग वही रहेगा, लेकिन उससे जुड़ा बैंक बदल जाएगा।
![]()
FASTag Portability का सीधा फायदा
FASTag Portability से सबसे बड़ी राहत वाहन मालिकों को मिलेगी। अगर किसी यूजर को अपने बैंक की फास्टैग सर्विस, रिचार्ज अनुभव, सपोर्ट या अकाउंट मैनेजमेंट में समस्या है, तो वह बैंक बदल सकेगा।
नई व्यवस्था में पुराना अकाउंट बंद करने और नया टैग बनवाने की जरूरत नहीं होगी। इससे समय बचेगा और फिजिकल री-इश्यू की प्रक्रिया भी कम होगी।
यह सुविधा उन लोगों के लिए भी उपयोगी होगी, जिनके पास कई वाहन हैं या जो फास्टैग को अपने पसंदीदा बैंकिंग ऐप से मैनेज करना चाहते हैं। बैंक बदलने के बाद भी टोल प्लाजा पर वाहन की आवाजाही सामान्य रहेगी।
टोल प्लाजा पर प्रक्रिया पहले जैसी
वनटैग के बाद टोल प्लाजा पर वाहन चालक को कोई अलग काम नहीं करना होगा। टोल टैक्स कटने का तरीका पहले जैसा ही रहेगा।
वाहन चालक को न टोल पर रुकना होगा, न कोई नया स्कैन कराना होगा और न ही अलग कागजी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। बदलाव सिस्टम के बैकएंड में होगा।
नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम नए बैंक की जानकारी अपने-आप अपडेट करेगा। यानी जब वाहन टोल प्लाजा से गुजरेगा, तो टैग वही पढ़ा जाएगा, लेकिन भुगतान नए बैंक से जुड़ी जानकारी के आधार पर प्रोसेस होगा।
री-इश्यू का खर्च और कचरा घटेगा
सरकार को उम्मीद है कि FASTag Portability से बार-बार नए फिजिकल टैग बनाने की जरूरत कम होगी। अभी बैंक बदलने या टैग बदलने पर नया स्टिकर जारी करना पड़ता था।
नया फास्टैग बनाने, पैक करने, भेजने और एक्टिव करने में संसाधन खर्च होते हैं। बड़ी संख्या में टैग री-इश्यू होने से प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक कचरे की समस्या भी बढ़ती है।
OneTag सर्विस से एक ही स्टिकर का इस्तेमाल लंबे समय तक हो सकेगा। इससे री-इश्यू का खर्च घटेगा और पर्यावरण पर भी दबाव कम होगा। यह डिजिटल सिस्टम को ज्यादा आसान और संसाधन-कुशल बनाने की दिशा में कदम माना जा सकता है।
![]()
NETC और RFID कैसे काम करते हैं
फास्टैग सिस्टम RFID तकनीक पर काम करता है। RFID यानी रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन। यह एक वायरलेस तकनीक है, जिसमें रेडियो तरंगों की मदद से फास्टैग स्टिकर में लगी चिप से डेटा पढ़ा जाता है।
जब वाहन टोल प्लाजा से गुजरता है, तो वहां लगा रीडर फास्टैग को स्कैन करता है। इसके बाद सिस्टम वाहन से जुड़े फास्टैग अकाउंट से टोल राशि काट लेता है। इस प्रक्रिया में गाड़ी को लंबे समय तक रोकने की जरूरत नहीं पड़ती।
NETC यानी नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन NPCI का इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म है। यह देशभर के टोल प्लाजा, बैंकों और वाहन मालिकों को एक डिजिटल नेटवर्क से जोड़ता है। OneTag सर्विस इसी नेटवर्क के जरिए बैंक जानकारी अपडेट करने में मदद करेगी।
यूजर के लिए क्या बदलेगा
वाहन मालिकों के लिए सबसे अहम बदलाव बैंक स्विच करने की सुविधा है। अगर यूजर को अपना फास्टैग किसी दूसरे बैंक से जोड़ना है, तो वह स्टिकर बदले बिना पोर्टेबिलिटी का लाभ ले सकेगा।
टोल प्लाजा पर ड्राइविंग अनुभव पहले जैसा रहेगा। वाहन चालक को टोल से गुजरते समय कोई अलग प्रक्रिया नहीं अपनानी होगी। टैक्स पहले की तरह ऑटोमैटिक कटेगा।
इस सुविधा से बैंकिंग विकल्प बढ़ेंगे। यूजर अपनी सुविधा, ऐप अनुभव, सर्विस क्वालिटी या सपोर्ट के आधार पर बैंक चुन सकेगा। इससे फास्टैग सर्विस देने वाले बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है।
डिजिटल टोल सिस्टम की नई दिशा
OneTag सर्विस फास्टैग सिस्टम को और लचीला बनाती है। पहले फास्टैग स्टिकर बैंक से मजबूती से जुड़ा रहता था। बैंक बदलना मतलब नया टैग। अब टैग वाहन से जुड़ा रहेगा और बैंक बैकएंड में बदला जा सकेगा।
यह बदलाव वाहन मालिकों के लिए छोटा लग सकता है, लेकिन बड़े स्तर पर इसका असर महत्वपूर्ण है। करोड़ों वाहनों के लिए बार-बार नए टैग जारी करने की जरूरत कम होगी। बैंक स्विचिंग आसान होगी और टोल सिस्टम में डिजिटल इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ेगी।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि OneTag सर्विस आम यूजर्स तक कितनी तेजी से पहुंचती है और बैंक स्विच करने की ऐप-प्रक्रिया कितनी सरल रहती है। अगर पोर्टेबिलिटी सहज रही, तो फास्टैग यूजर्स के लिए यह मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी जैसी बड़ी सुविधा साबित हो सकती है।
ये भी पढ़ें :
FASTag में गाड़ी नंबर गलत हुआ तो फौरन कार्रवाई, यात्रियों के लिए क्या बदलने वाला है
FASTag Cashless Toll: 1 अप्रैल से टोल पर कैश नहीं चलेगा
Like and follow us on :
| Telegram | Facebook | Instagram | Twitter | Pinterest| Linkedin
Post Views: 28
सांवरिया सेठ सिंह
थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।