राजस्थान में ऑनलाइन बाइक बुक कर ड्रग्स की सप्लाई: रैपिडो-पोर्टर जैसी एप का इस्तेमाल; स्मगलर की एक लाइन से बड़ा खुलासा - Rajasthan News

Published on 13 सित॰ 2026

राजस्थान में रैपिडो–पोर्टर जैसे डिलीवरी एप से ड्रग्स सप्लाई की जा रही है। तस्कर न ग्राहक से मिलता है, न डिलीवरी के लिए अपना आदमी भेजता है। वॉट्सएप पर लोकेशन और क्वांटिटी तय होती है।

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इसके बाद डिलीवरी के लिए रैपिडो-पोर्टर जैसे एप से राइड बुक की जाती और अमेजन-फ्लिपकार्ट के पुराने पार्सल बैग में पैक कर ड्रग्स ग्राहक तक पहुंचा दी जाती है।

पूरा नेटवर्क बाड़मेर में बैठा एक शख्स चला रहा है। मास्टरमाइंड का नाम RDX है, जिसे किसी ने नहीं देखा।

इस नए ऑनलाइन नेटवर्क की परत तब खुली, जब सामान्य डिलीवरी के लिए 200 रुपए के बजाय राइडर को 2000 रुपए देकर कहा- ‘जा, ऐश कर’।

राइडर को शक हुआ और उसने इसकी सूचना एएनटीएफ को दी। सूचना के बाद टीम ने करीब 3 महीने तक निगरानी रखी और जयपुर के मानसरोवर में सिटी पार्क के पास किराए के कमरे में रह रहे दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।

आरोपियों के पास से 439 ग्राम एमडी और 466 ग्राम अफीम बरामद हुई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

राइडर्स को शक हुआ, फिर खुला ड्रग्स नेटवर्क

  • केस 1 : आरोपी ने पोर्टर एप पर बुकिंग की। राइडर बताए गए पते पर पहुंचा, लेकिन आरोपी ने बिना भुगतान किए उसे लौटा दिया। अगले दिन वही राइडर दोबारा पहुंचा तो आरोपी के साथ मौजूद एक व्यक्ति ने महज 200 के काम के बदले उसे 2,000 दे दिए और कहा- जाओ, ऐश करो। अचानक मिले इतने ज्यादा पैसों से राइडर को शक हुआ।
  • केस 2 : एक रैपिडो राइडर ने आरोपी को उसके ठिकाने से पिक किया। रास्ते में आरोपी ने एक सुनसान जगह पर जाकर एक डिब्बा रखा और वापस आकर राइड पूरी कर ली। इस हरकत से रैपिडो राइडर को उसपर शक हो गया।

ऐसे ही चार-पांच अलग-अलग मामलों में राइडर्स को आरोपियों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस तक पहुंचाई।

3 महीने रैपिडो-पोर्टर के राइडर बने पुलिसवाले

राइडर्स के जरिए जैसे ही सूचना मिली, पुलिस ने मामले में इंवेस्टिगेशन शुरू कर दिया। तीन महीने तक पुलिसकर्मी रैपिडो और पोर्टर के राइडर बनकर आरोपियों के आसपास मंडराते रहे।

ताकि आरोपी डिलीवरी के लिए बुकिंग करें और उन्हें रंगे हाथों पकड़ा जा सके। दूसरी ओर्र एएनटीएफ ने रैपिडो और पोर्टर कंपनियों से संपर्क कर संदिग्ध इलाकों में डिलीवरी करने वाले कई राइडर्स की डिटेल खंगाली। इन राइडर से पूछताछ की गई तो आरोपियों की आवाजाही और डिलीवरी के नेटवर्क का पता लगा।

ड्रग्स की डिलीवरी में इस तरह की पैकिंग का इस्तेमाल करते थे, ताकि किसी को शक न हो।

ड्रग्स की डिलीवरी में इस तरह की पैकिंग का इस्तेमाल करते थे, ताकि किसी को शक न हो।

नशे की ‘होम डिलीवरी’ का नया मॉडल

बाड़मेर से ऑपरेट करता है मास्टरमाइंड RDX

इस पूरे नेटवर्क को बाड़मेर से कंट्रोल किया जाता था और स्टॉक जयपुर के किराए के कमरे में रखा जाता था। डिलीवरी ऑनलाइन राइडर्स के जरिए हो रही थी।

बाड़मेर से RDX नाम का व्यक्ति आरोपियों के संपर्क में था। उसके बताए अनुसार एमडी और अफीम बाड़मेर और दूसरे सीमावर्ती जिलों से जयपुर पहुंचती थी।

इसके बाद वॉटसएप पर मैसेज आता था कि किस ग्राहक को कितना माल देना है और कहां पहुंचाना है।

किसी को नहीं पता कौन है RDX

आरोपियों के पास इसके लिए अलग मोबाइल भी था। RDX ने मनीष को अलग एंड्रॉयड मोबाइल दिया था। उस फोन पर मैसेज आते थे, जिनमें माल की मात्रा और किस्म तक लिखी होती थी-जैसे ‘1 gm white’ और ‘18 gm brown’।

यानी जिस व्यक्ति को माल पहुंचाना है, उसे जरूरी नहीं कि सप्लायर या ग्राहक का पूरा पता भी पता हो। उसे सिर्फ लोकेशन बताई जाती थी। खास बात ये है कि गिरोह में काम कर रहे किसी भी शख्स को RDX की असली पहचान नहीं मालूम थी।

दोनों आरोपियों से बरामद किए गए। पैकेट। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क को लेकर जांच की जा रही है।

दोनों आरोपियों से बरामद किए गए। पैकेट। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क को लेकर जांच की जा रही है।

अमेजन-फ्लिपकार्ट के पुराने पैकेट में डिलीवरी

पूछताछ में सामने आया कि MD और अफीम जिप-लॉक पाउच में पैक करने के बाद पुराने कार्टन और पार्सल बैग में रखा जाता था। इन पैकेटों पर Amazon, Flipkart जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के पुराने लेबल लगे बैग इस्तेमाल किए जाते थे।

पैकेट को इस तरह तैयार किया जाता था कि बाहर से वह सामान्य ऑनलाइन सामान की डिलीवरी जैसा ही नजर आए। तलाशी में पुलिस को 11 खाली कार्टन, जिप-लॉक पाउच, पैकिंग बैग और ई-कॉमर्स कंपनियों के लेबल वाले पार्सल बैग भी मिले। आरोपियों के बयानों के मुताबिक, इन्हीं पैकेटों को आगे अलग-अलग जगहों पर भेजा जाता था।

कभी राइडर के जरिए सप्लाई, कभी खुद रैपिडो से जाकर डिलीवरी

नशे की सप्लाई के लिए आरोपी रैपिडो और पोर्टर जैसे डिलीवरी एप यूज कर रहे थे। तैयार पैकेट को कई बार राइडर के जरिए अलग-अलग लोकेशन पर भेज दिया जाता था। राइडर को पता भी नहीं चलता कि अनजाने में वह ड्रग्स की तस्करी कर रहा है।

कई बार आरोपी खुद रैपिडो बाइक पर बैठकर तय जगह तक जाते और नशे का पैकेट किसी खाली या सुनसान स्थान पर छोड़ आते थे।

इसके बाद उस जगह की फोटो और लोकेशन संबंधित व्यक्ति को भेज दी जाती थी, ताकि वह वहां पहुंचकर पैकेट उठा ले। इस तरह सप्लाई करने वाले और माल लेने वाले के बीच सीधे आमना-सामना भी नहीं होता था।

एएनटीएफ के आईजी विकास कुमार ने बताया कि पूछताछ और जांच के दौरान ऐसे कई ठिकानों और लोगों के बारे में सुराग मिले हैं, जहां इस गिरोह के तार जुड़े होने की आशंका है।

टीम इन जगहों पर आरोपियों की आवाजाही, डिलीवरी नेटवर्क और संपर्कों की जानकारी जुटा रही है। आने वाले दिनों में इन ठिकानों पर दबिश देकर गिरोह से जुड़े कुछ और लोगों की गिरफ्तारी और नशे की खेप बरामद होने की संभावना है।

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