भीषण गर्मी में लंदन के मकानों में पड़ने लगीं दरारें, जाम हुए दरवाजे-खिड़कियां; जमीन धंसने के खतरे से मची खलबली

Published on 13 सित॰ 2026

लंदन (उत्तम हिन्दू न्यूज): ब्रिटेन की राजधानी लंदन में असामान्य रूप से पड़ रही भीषण गर्मी और सूखे के हालात ने मकान मालिकों के होश उड़ा दिए हैं। शहर के सैकड़ों मकानों की दीवारों पर अचानक गहरी दरारें उभर आई हैं, खिड़कियां जाम हो रही हैं और दरवाजे चौखट में अटकने लगे हैं। भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार, इस अजीबोगरीब संकट के पीछे की मुख्य वजह जमीन का धंसना यानी ‘सब्सिडेंस’ (Subsidence) है। तापमान में लगातार हो रही वृद्धि और बारिश की भारी कमी के चलते लंदन की धरती तेजी से नीचे की ओर खिसक रही है, जिससे बहुमंजिला और ऐतिहासिक इमारतों के ढांचे चरमराने लगे हैं।

चिकनी मिट्टी का ‘श्रिंक-स्वेल’ चक्र बना नींव का दुश्मन

लंदन और दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड का अधिकांश हिस्सा अत्यधिक चिकनी मिट्टी (Clay) पर बसा हुआ है। इस मिट्टी की खासियत यह है कि यह पानी सोखने पर फूल जाती है और लंबे सूखे व गर्मी के मौसम में नमी खोते ही तेजी से सिकुड़ जाती है। इस भौगोलिक प्रक्रिया को विज्ञान में ‘श्रिंक-स्वेल’ कहा जाता है। जब किसी इमारत के नीचे मौजूद मिट्टी असमान रूप से सिकुड़ती है, तो मकान की नींव पर असंतुलित दबाव बनता है। नतीजा यह होता है कि इमारत का एक हिस्सा धंसने लगता है और दीवारों में दरारें आ जाती हैं। ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे ने इसे ब्रिटेन के सामने मौजूद सबसे गंभीर प्राकृतिक और ढांचागत खतरों में से एक घोषित किया है।

पेड़ों की गहरी जड़ें और 1945 से पहले के पुराने मकान

इस संकट को बढ़ाने में सूखे के साथ-साथ मकानों के आसपास लगे बड़े पेड़ भी जिम्मेदार साबित हो रहे हैं। पानी की किल्लत होने पर इन पेड़ों की जड़ें जमीन की गहराइयों में जाकर नमी चूस लेती हैं, जिससे मकानों की नींव के नीचे की मिट्टी पूरी तरह सूखकर खोखली हो जाती है। यह खतरा खासतौर पर लंदन के पुराने मकानों के लिए कहीं ज्यादा गंभीर है, क्योंकि शहर की आधी से ज्यादा इमारतें 1945 से पहले की बनी हुई हैं और उनकी नींव ज्यादा गहरी नहीं है। जलवायु परिवर्तन के चलते अब यह समस्या केवल लंदन तक सीमित न रहकर ब्रिटेन के अन्य रिहायशी इलाकों में भी पैर पसार रही है।

बीमा कंपनियों के हाथ-पांव फूले, रिकॉर्ड दावों से बिगड़ा बजट

घरों के धंसने और दीवारों के चटकने की घटनाओं ने ब्रिटेन के बीमा सेक्टर की कमर तोड़ दी है। साल 2025 में ब्रिटेन की इंश्योरेंस इंडस्ट्री ने जमीन धंसने से जुड़े दावों के निपटारे के लिए रिकॉर्ड 415 मिलियन डॉलर (करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी) का भुगतान किया। वहीं, साल 2026 की दूसरी तिमाही में ही यह आंकड़ा 97 मिलियन डॉलर के पार निकल गया है, जिसमें प्रति क्लेम का औसत भुगतान 27 हजार डॉलर तक पहुंच गया। बढ़ते जोखिम को देखते हुए बीमा कंपनियों ने प्रीमियम में भारी इजाफा कर दिया है और कई संवेदनशील इलाकों में मकानों का बीमा रिन्यू करने से भी साफ हाथ खड़े कर रही हैं।

You Might Be Interested In

  • भारत ने चीन को घर में घुसकर हराया, महिला जूनियर एशिया कप पर लगातार तीसरी बार कब्जा; वर्ल्ड कप का टिकट भी पक्का
  • प्रियंका गांधी के बनाए छोले-भटूरे की राहुल ने की जमकर तारीफ, सोशल मीडिया पर शेयर की खास तस्वीर
  • पंजाब में बिजली संकट से बड़ी राहत, राजपुरा और तलवंडी साबो प्लांट की सभी यूनिट्स शुरू; उद्योग और खेती के कट बंद
  • सामने बैठे थे चीनी राष्ट्रपति, PM मोदी ने दिया कड़ा संदेश- क्रिटिकल मिनरल्स पर मनमानी बर्दाश्त नहीं
  • बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के काफिले पर भीषण हमला, 23 से ज्यादा जवानों के मारे जाने की खबर
  • जमीन विवाद में न्याय मांगने PM मोदी के पास पहुंचे बचपन के दोस्त, BJP विधायक की कंपनी पर कब्जे का आरोप; मांगी CBI जांच