रूस ने गेरान ड्रोन को बना दिया 'क्रूज मिसाइल', यूक्रेन का एयर डिफेंस बेहाल

Published on 14 सित॰ 2026

रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन तकनीक तेजी से बदल रही है. रूस ने अपने पुराने प्रोपेलर वाले गेरान ड्रोनों को अपग्रेड कर जेट-पावर्ड वर्जन तैयार किए हैं. गेरान-4 और गेरान-5 नाम के ये नए ड्रोन अब पारंपरिक मिसाइलों की तरह व्यवहार कर रहे हैं. इनकी स्पीड 600 KM प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. इनमें 90 किलोग्राम तक का वॉरहेड लगाया जा सकता है और रेंज करीब 1000 किलोमीटर तक है. 

थर्मल कैमरे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित गाइडेंस सिस्टम और जैमिंग रोकने वाले लिंक की वजह से ये ड्रोन पहले से कहीं ज्यादा प्रभावी हो गए हैं. यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली इन नए ड्रोनों को सिर्फ 60% ही मार गिराने में सफल हो पा रही है. पहले पुराने प्रोपेलर वाले वर्जन के खिलाफ यह दर 90 से 95 प्रतिशत तक थी. यह बदलाव युद्ध के हवाई मोर्चे को काफी प्रभावित कर रहा है.

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गेरान ड्रोन मूल रूप से ईरान के शाहेद ड्रोनों से प्रेरित माने जाते हैं लेकिन रूस ने इनमें कई सुधार किए हैं. जेट इंजन लगाने से इनकी गति बहुत बढ़ गई है. अब ये क्रूज मिसाइल की गति से चल रहे हैं. पुराने ड्रोन धीमे चलते थे इसलिए एंटी-ड्रोन सिस्टम आसानी से उन्हें ट्रैक कर लेते थे. अब तेज गति के कारण प्रतिक्रिया का समय बहुत कम रह गया है. 

थर्मल कैमरे रात में या खराब मौसम में भी लक्ष्य पहचानने में मदद करते हैं. एआई गाइडेंस सिस्टम ड्रोन को खुद लक्ष्य चुनने और रास्ता बदलने की क्षमता देता है. जैमिंग रोधी लिंक की वजह से इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम इन पर आसानी से असर नहीं डाल पाते. 

Russia Geran drones

रूस इन ड्रोनों का उत्पादन हजारों की संख्या में हर महीने कर रहा है. कई पार्ट्स चीन से आने की खबरें हैं जिससे लागत कम रखने में मदद मिल रही है. सस्ते और बड़ी संख्या में तैयार होने वाले ये ड्रोन महंगी मिसाइलों का विकल्प बन गए हैं.

यूक्रेन के एयर डिफेंस पर असर

यूक्रेन लंबे समय से ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है. पहले प्रोपेलर वाले गेरान ड्रोन को मोबाइल एंटी-एयरक्राफ्ट गन, मशीन गन और छोटे मिसाइल सिस्टम से आसानी से मार गिराया जा सकता था. लेकिन जेट-पावर्ड वर्जन की तेज गति और एडवांस नेविगेशन ने इस पूरे समीकरण को बदल दिया है. 

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इंटरसेप्शन रेट में भारी गिरावट का मतलब है कि ज्यादा ड्रोन लक्ष्य तक पहुंच रहे हैं. इससे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा सुविधाओं और सैन्य ठिकानों पर खतरा बढ़ गया है. यूक्रेन को अब तेज इंटरसेप्टर ड्रोन या बेहतर मिसाइल सिस्टम विकसित करने की जरूरत पड़ रही है. पश्चिमी देशों से मिलने वाले एयर डिफेंस सिस्टम भी इन नए खतरों के अनुकूल पूरी तरह तैयार नहीं हैं. लगातार हमलों से वायु रक्षा के संसाधन तेजी से खर्च हो रहे हैं.

यह बदलाव सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं है. कम लागत वाले लेकिन मिसाइल जैसी क्षमता वाले ड्रोन युद्ध की प्रकृति बदल रहे हैं. रूस बड़े पैमाने पर उत्पादन कर बड़े हमले कर सकता है जबकि यूक्रेन को महंगे इंटरसेप्टर खर्च करने पड़ रहे हैं. यह आर्थिक रूप से भी दबाव डालता है. ईरान भी इन अपग्रेड्स में रुचि दिखा रहा है. 

Russia Geran drones

वह अपने संघर्षों में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहता है. इससे मध्य पूर्व में भी ड्रोन युद्ध और जटिल हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में ऐसे सस्ते लेकिन घातक ड्रोन आम हो जाएंगे. पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों को नए सिरे से सोचने की जरूरत है. लेजर वेपन, हाई-स्पीड इंटरसेप्टर और बेहतर रडार सिस्टम की मांग बढ़ेगी.

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उत्पादन और सप्लाई चेन की भूमिका

रूस इन ड्रोनों को घरेलू कारखानों में बड़ी संख्या में बना रहा है. चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल लागत कम रखने और आपूर्ति बनाए रखने में मददगार साबित हो रहा है. प्रतिबंधों के बावजूद उत्पादन जारी रखना रूस की रणनीति का हिस्सा है. यूक्रेन और उसके सहयोगी देशों के लिए यह चुनौती और बड़ी हो गई है क्योंकि हर महीने हजारों नए ड्रोन तैयार हो रहे हैं. जवाबी कार्रवाई में यूक्रेन को भी अपने ड्रोन उत्पादन और इंटरसेप्शन क्षमता को तेज करना होगा.

कुल मिलाकर रूस के जेट-पावर्ड गेरान ड्रोन ने हवाई युद्ध को नया मोड़ दे दिया है. तेज गति, लंबी रेंज, स्मार्ट गाइडेंस और सस्ते उत्पादन का संयोजन यूक्रेन की रक्षा व्यवस्था पर भारी दबाव डाल रहा है. यह घटनाक्रम दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में तकनीक कितनी तेजी से बदल सकती है और कैसे कम लागत वाले हथियार बड़े असर डाल सकते हैं. दोनों पक्ष अब इन नई चुनौतियों के अनुकूल अपनी रणनीति बना रहे हैं.

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