संघ की नजर परकोटे पर: कोठारी-कर्णावट के बीच विजय अग्रवाल की एंट्री विधायक क्षेत्र से मेयर नहीं चाहते, ढूंढाड़ी बोली का पेंच भी फंसाया - Jaipur News

Published on 17 सित॰ 2026

नगर निगम के 150 में से 146 वार्डों के नतीजे आ चुके हैं। भाजपा 78 सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार कर चुकी है, कांग्रेस के 53 और निर्दलीयों के 15 पार्षद जीते हैं। अब सवाल एक ही है- जयपुर का अगला महापौर कौन होगा? लेकिन अब मेयर की दौड़ एक-दो नामों तक सीम

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परकोटे और वैश्य समाज के समीकरण से शुरू हुई चर्चा में अब अनुभव, संगठन, विधानसभा क्षेत्र और ‘जयपुर लोकल’ का नया पैमाना भी जुड़ गया है। इसी बीच वार्ड-31 से जीते सीए विजय अग्रवाल का नाम सामने आने के बाद विधायक गोपाल शर्मा ने तर्क दिया है- ‘जो ढूंढाड़ी बोलेगा, जयपुर की नब्ज भी पहचाने वही मेयर बने।’ ऐसे में अब परकोटा बनाम नया जयपुर का समीकरण भी बन गया है।

नया कार्ड; मेयर ऐसा हो, जिसे जयपुर की गलियां और भाषा दोनों पता हों

टिकट वितरण से पहले से कोठारी चर्चा में

वैश्य समाज के समीकरण में सबसे मजबूत नाम वार्ड-112 से जीते सुनील कोठारी का है। इनका नाम लॉटरी खुलने के बाद से चर्चा में है। उन्हें टिकट देकर संकेत भी दिया था और अब वे चुनाव जीत भी गए हैं।

कोठारी क्यों? जिलाध्यक्ष रह चुके, संगठन पर पकड़। संघ परिवार के करीबी। वैश्य समाज का बड़ा नाम। कांग्रेस सरकार का जयपुर को दो हिस्सों में बांटने का विरोध सफल रहा।

पुनीत भी शुरू से ही मेयर के दावेदार

मेयर की दौड़ में पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट का नाम पहले से है। भाजपा की सूची में मालवीय नगर के वार्ड-76 से कर्णावट को टिकट मिला था और वे चुनाव जीत गए हैं।

कर्णावट क्यों? उदयपुर मॉडल का तर्क देकर जयपुर में डिप्टी मेयर रह चुके चेहरे को ही मेयर बनाने की संभावना। कामकाज, प्रशासनिक तंत्र व पार्षदों की राजनीति समझते हैं।

विजय अग्रवाल ने दो दिन में बदले समीकरण

पिछले दो दिनों में सामने आए एक नए नाम ने समीकरण बदल दिए हैं। यह नाम झोटवाड़ा विधानसभा के वार्ड-31 से जीते सीए विजय अग्रवाल का है। हालांकि इस लॉबिंग की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अग्रवाल क्यों?- दिल्ली स्तर पर एक केंद्रीय मंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सीए विजय अग्रवाल के पक्ष में हैं। वैश्य समाज का युवा चेहरा। सीधा राजनीतिक विरोध नहीं।

माहेश्वरी समाज ने बढ़ाया सिंगी का नाम

सिविल लाइंस के वार्ड-98 से सुभाष सिंगी का नाम माहेश्वरी समाज ने बढ़ाया है। इस विधानसभा से अशोक लाहोटी का टिकट काटने से समाज नाराज है। पार्टी इसे दूर करना चाहती है।

सुभाष सिंगी क्यों? शहर में बड़ा व्यापारिक नाम है। भाजपा के कई प्रकोष्ठों की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। संघ से जुड़े हुए हैं।

25 में से 21 वैश्य जीते, वैश्य महापौर की मांग

चुनाव में वैश्य समाज के 25 प्रत्याशियों में से 21 की जीत के बाद समाज ने वैश्य महापौर की मांग उठाई है। अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन का प्रतिनिधिमंडल राज्य प्रभारी ध्रुवदास अग्रवाल के नेतृत्व में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से मिला। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री गोपाल गुप्ता, कार्यकारी अध्यक्ष सुरेश पाटोदिया, महिला अध्यक्ष चारू गुप्ता व अशोक पांड्या शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने समाज को 25 टिकट दिए जाने पर मदन राठौड़ का आभार जताया। अग्रवाल ने बताया कि वैश्य प्रत्याशियों के जीत का प्रतिशत 84 रहा है।

मेयर के साथ दो डिप्टी मेयर से सामाजिक संतुलन

भाजपा राज्य की तरह दो डिप्टी मेयर के पद पर ओबीसी और राजपूत चेहरे को आगे लाकर सामाजिक संतुलन बनाने का फार्मूला भी ला सकती है। इस तरह भाजपा के सामने मेयर चयन का पूरा गणित अब परकोटा बनाम बाहरी जयपुर, वैश्य बनाम अन्य सामाजिक समीकरण, स्थानीय बनाम सर्व स्वीकार्य चेहरा और विधायक बनाम संगठन के बीच घूम रहा है।

विधायकों को चिंता- नया ‘प्रतिद्वंद्वी’ न बन जाए: मेयर चयन को लेकर एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि भाजपा के कई विधायक नहीं चाहते कि उनके विधानसभा क्षेत्र का पार्षद महापौर बने। इसका कारण दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव है। इस दौरान कद बढ़ने से महापौर भी विधायक टिकट का स्वाभाविक दावेदार बन सकता है।