नवभारत संपादकीय: उमर अब्दुल्ला ने ट्रंप से गुहार की बात क्यों कही ?
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Written By:
अंकिता पटेल
Updated On: Jul 15, 2026 | 10:20 AM IST
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सार
Statehood Restoration Demand: जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे।

जम्मू-कश्मीर, उमर अब्दुल्ला,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
विस्तार
Jammu Kashmir Statehood Protest: जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की ज मांग को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके वादे की याद दिलाई है। उन्होंने कहा है कि वह संसद के मानसून सत्र के प्रथम दिन 20 जुलाई को दिल्ली के जंतरमंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे। 2019 में संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त कर राज्य को 2 केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटा गया था।
मुख्यमंत्री तथा नेशनल कांफ्रेंस ने इंडिया गठबंधन सहित 50 राष्ट्रीय व क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं को धरना आंदोलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह सभी मिलकर केंद्र सरकार पर दबाव डालेंगे कि वह बिल पास कर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करे।
2019 के फैसले के विरोध में आंदोलन
उमर अब्दुल्ला का आरोप है कि अगस्त 2019 में केंद्र की बीजेपी नेतृत्व की एनडीए सरकार ने अपने बहुमत के जोर से संसद में 2 विवादास्पद विधेयक पारित कर जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक भूगोल व कानूनी दर्जा बदल डाला। इसके पहले जम्मू-कश्मीर को स्वायत्त राज्य के रूप में विशेष दर्जा हासिल था।
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जम्मू-कश्मीर में सख्त क्षेत्रीय लॉकडाउन लगाकर केंद्रीय गृहमंत्री ने राज्य का दर्जा छीन लिया और उसे विभाजित कर अधिकृत रूप से जम्मू-कश्मीर को विधानसभा सहित तथा लद्दाख को बगैर विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया।
इसी के विरोध में यह आंदोलन है। 2015 में किए गए इस परिवर्तन के बाद विधानसभा चुनाव कराए गए, लेकिन पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने में विलंब किया जाता रहा। विधानसभा चुनाव में कश्मीरी जनता ने नेशनल कांफ्रेंस को सत्ता प्रदान की।
370 हटाने के फैसले पर उमर का हमला
उमर अब्दुल्ला का आरोप है कि विकास करने की बजाय क्षेत्र को शक्तिविहीन करने के लिए अनुच्छेद 370 को समाप्त किया गया, बीजेपी को लाभपहुंचाने के उद्देश्य से जम्मू संभाग में विधानसभा सीटों को बढ़ाया गया। केंद्र सरकार का दावा है कि कश्मीर में पर्यटकों की तादाद बढ़ी तथा बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ।
इसे वह नया कश्मीर का नाम दे रही है। दूसरी ओर मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कड़ी डिजिटल निगरानी और भय की वजह से नागरिक आंदोलनों में गिरावट आई। राजनीतिक दूरियां बढ़ीं तथा नागरिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगा। जनता का विश्वास बहाल करने के लिए जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत मिलना चाहिए।
वादा निभाने में देरी पर उमर नाराज
उमर अब्दुल्ला का यह कथन उनकी हताशा और गुस्से को दर्शाता है कि बीजेपी हमें बताए कि क्या हम राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के पास जाएं? उमर अब्दुल्ला ने कभी भी उपराज्यपाल से टकराव का रास्ता नहीं अपनाया था।
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जब पाकिस्तानी आतंकियों ने पहलगाम में पर्यटकों की हत्या की थी, तब भी उमर ने केंद्र सरकार का समर्थन करते हुए इस कांड को देश पर हमला बताया था। वह इसलिए नाराज हैं कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा नहीं निभा रही है और इस मामले में अनावश्यक विलंब कर रही है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
