
ईरान में अमेरिका के हमले की रिपोर्टImage Credit source: getty image
ईरान में अमेरिकी हमलों को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. संयुक्त राष्ट्र (UN) के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में हुए दो हमलों को लेकर यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि युद्ध अपराध हुआ हो सकता है. इन हमलों में कम से कम 177 नागरिकों के मारे जाने की बात कही गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें बच्चों का भी बड़ा हिस्सा था.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इन हमलों की जिम्मेदारी अमेरिका की साबित होती है, तो क्या ट्रंप या अमेरिकी अधिकारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई हो सकती है? रिपोर्ट में ईरान के मीनाब और लामर्द में हुए दो हमलों की जांच की गई है. मीनाब में एक प्राथमिक स्कूल पर हमला हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई. विशेषज्ञों के मुताबिक, स्कूल साफ तौर पर एक नागरिक जगह थी और उसे सैन्य ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के सबूत नहीं मिले.
पहला हमला स्कूल पर हुआ था
पहला हमला मीनाब में शजारेह तैयबेह प्राथमिक स्कूल में हुआ था, जिसमें 156 लोगों की मौत हुई थी जिसमें 120 संख्या बच्चों की थी. विशेषज्ञों ने मीडिया रिपोर्टों और हथियारों से जुड़े सबूतों के आधार पर कहा कि हमला अमेरिका ने किया हो सकता है. उनका कहना है कि टोमाहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ और उस समय संघर्ष में अमेरिका ही ऐसा पक्ष था जिसके पास ये मिसाइलें थीं. हालांकि, अमेरिकी सेना ने अभी अपनी जांच के नतीजे सार्वजनिक नहीं किए हैं.
अमेरिका ने हमले से किया इनकार
दूसरा हमला उसी दिन ईरान के लामर्द शहर में एक खेल परिसर और उसके आसपास के रिहायशी इलाके पर हुआ. स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इसमें कम से कम 21 नागरिक मारे गए, जिनमें 7 बच्चे थे. यूएन विशेषज्ञों ने कहा कि खेल परिसर भी स्पष्ट रूप से नागरिक जगह थी और उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि वहां सैन्य गतिविधि हो रही थी. अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने उस दिन लामर्ड पर कोई हमला नहीं किया, साथ ही हमले में इस्तेमाल हुए हथियार पीआरएसएम(PRSM) के तौर पर पहचान किए गए रिपोर्ट को भी मानने इनकार कर दिया है.
युद्ध अपराध क्यों कहा जा रहा है?
विशेषज्ञों ने उपलब्ध सबूतों के आधार पर इन दोनों घटनाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. विशेषज्ञों ने कहा, ‘यह मानने के लिए उचित आधार थे कि अमेरिका ने अंधाधुंध हमला करने का युद्ध अपराध किया जिसके परिणामस्वरूप नागरिकों की जान गई या उन्हें चोट आई या नागरिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा.’
युद्ध के दौरान भी आम नागरिकों और नागरिक इमारतों को निशाना बनाने पर अंतरराष्ट्रीय कानून में कड़े नियम हैं. अगर किसी हमले में जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाया गया या बिना पर्याप्त सैन्य लक्ष्य के अंधाधुंध हमला किया गया, तो वह युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है.
इस मामले में यूएन आगे क्या करेगा?
इस मामले में यूएन प्रस्ताव तैयार करेगा और उसको संयुक्त राष्ट्र सिक्योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) को भेजेगा. हालांकि, इस मामले पर अमेरिका वीटो लगा देगा. लेकिन इस मामले में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ट्रंप के खिलाफ फैसला सुना सकता है. अब सवाल है कि ट्रंप को सजा क्यों मिलेगी, तो इसकी वजह ये है कि अमेरिका में सेना के सर्वोच्च अधिकारी राष्ट्रपति होते हैं. ICC इस मामले में 30 साल जेल की सजा सुना सकता है, लेकिन यह लागू नहीं होगा.
युद्ध अपराध ममले में क्या सजा होती है?
युद्ध अपराध साबित होने पर सजा मामले और अदालत के अधिकार क्षेत्र पर निर्भर करती है. अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) दोषी व्यक्ति को जेल की सजा दे सकता है. आम तौर पर अधिकतम सजा 30 साल तक की कैद हो सकती है. अगर अपराध बेहद गंभीर हो, तो अदालत आजीवन कारावास भी दे सकती है. इसके अलावा जुर्माना लगाया जा सकता है और अपराध से हासिल की गई आय, संपत्ति जब्त की जा सकती हैं.

अंकिता पाण्डेय
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
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