नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों गुटों के बीच मचे घमासान के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों पक्षों को नए नाम और नए चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। आयोग के फैसले के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को अब ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम से जाना जाएगा और उन्हें चुनाव चिह्न के रूप में ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ मिला है। वहीं, बागी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है और इस गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
सिंबल फ्रीज होने के बाद मिला नया निशान
इससे पहले चुनाव आयोग ने पार्टी के दोनों गुटों को करारा झटका देते हुए टीएमसी के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ (दो फूल और घास) को फ्रीज कर दिया था। दोनों गुटों की ओर से आयोग के समक्ष तीन-तीन प्राथमिक विकल्प पेश किए गए थे। गहन समीक्षा के बाद आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों धड़ों को आगामी उपचुनावों के लिए नए नाम और सिंबल के इस्तेमाल की आधिकारिक अनुमति दे दी है।
क्या था चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश?
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968’ के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत ठोस फैसला लिए जाने की आवश्यकता है। आयोग ने साफ किया कि जब तक विवाद पर कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक दोनों में से कोई भी खेमा ‘तृणमूल कांग्रेस’ के मूल नाम या ‘जोड़ा फूल’ सिंबल का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।
ममता बनर्जी के लिए बड़ा सियासी झटका
साल 1998 में पार्टी की स्थापना के बाद से ‘जोड़ा फूल’ तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान रहा है। ऐसे में इस निशान का छिनना ममता बनर्जी के लिए एक बड़े रणनीतिक और भावनात्मक झटके के तौर पर देखा जा रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी में शुरू हुई अंदरूनी कलह ने तब विकराल रूप ले लिया जब दो-तिहाई से अधिक विधायकों ने बगावत कर दी।
विधानसभा में 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के सोवनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुन लिया, जिसे स्पीकर से मान्यता भी मिल गई थी। इसके बाद टीएमसी की पूर्व वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 सांसदों ने बगावत करते हुए एक अलग दल का दामन थामा और एनडीए को समर्थन दे दिया। अब दोनों गुटों की असली सियासी ताकत आगामी उपचुनावों में नए चुनावी निशानों के साथ परखी जाएगी।
You Might Be Interested In
- पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की दवा क्वालिटी टेस्ट में फेल, अस्पतालों ने लगाई रोक
- बिजनेस जगत में ऐतिहासिक युग का अंत, वॉरेन बफे ने दिया इस्तीफा; अब बेटा संभालेगा कंपनी की कमान
- आईफोन 18 प्रो का गजब क्रेज, पत्नी के लिए फोन खरीदने के लिए शख्स ने बेचा सोना, बोला-‘आज पैसा है, कल हो न हो’
- पठानकोट से ‘नशामुक्त पंजाब यात्रा’ का आगाज, BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
- पेपर लीक मामला: एनटीए में सुधारों की प्रगति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जज ने दिया ऑफिस के दौरे का संकेत
- जुमे की नमाज के दौरान पाकिस्तान में भीषण धमाका, 16 लोगों की मौत; 50 से अधिक घायल