टिहरी गढ़वाल के मांगला गांव में ₹75.68 लाख की लागत से हेलीपैड बनेगा। उत्तराखंड शासन ने ₹45.40 लाख की पहली किस्त जारी करते हुए कड़े वित्तीय दिशा-निर्देश दिए हैं।
दून हॉराइज़न, देहरादून (21 सितंबर) : विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले टिहरी गढ़वाल के सीमांत ग्रामीणों के लिए सोमवार का दिन एक बड़ी राहत लेकर आया। काबीना मंत्री सुबोध उनियाल के प्रयासों के बाद शासन ने नरेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पट्टी डोवी स्थित मांगला गांव में हेलीपैड (Helipad Construction) के लिए वित्तीय स्वीकृति की मुहर लगा दी है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत पहली किस्त के तौर पर ₹45,40,800 की रकम तत्काल प्रभाव से अवमुक्त करने का शासनादेश जारी कर दिया गया है।
यह केवल एक कंक्रीट का चबूतरा नहीं। असल में, बरसात और भूस्खलन के दौरान जब मुख्य सड़कें कट जाती हैं, तब यह एयरस्ट्रिप मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए जीवनरेखा साबित होगी।
₹75.68 लाख का प्रोजेक्ट, सख्त वित्तीय पाबंदियों के साथ बंधी कार्यदायी संस्था
मांगला गांव में बनने वाले इस हेलीपैड की कुल लागत ₹75.68 लाख आंकी गई है। शासन ने साफ किया है कि जारी की गई धनराशि का उपयोग सिर्फ और सिर्फ निर्धारित तकनीकी खाके के तहत ही किया जा सकेगा। अफसर अपनी मर्जी से किसी अतिरिक्त मद में पैसा खर्च नहीं कर पाएंगे—अगर कोई अतिरिक्त व्यय अपरिहार्य हुआ, तो उसके लिए पहले सचिवालय से बाकायदा अनुमति लेनी होगी।
इतना ही नहीं, सरकारी आदेश में एक और अहम पेंच है। अगर टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण लागत में कोई बचत होती है, तो संबंधित विभाग उस पैसे को दबाकर नहीं बैठ सकेगा, बल्कि पाई-पाई राज्य के सरकारी खजाने में तुरंत जमा करानी होगी।
समयसीमा और क्वालिटी पर जीरो टॉलरेंस, लापरवाही पर नपेंगे जिम्मेदार
उत्तराखंड के सुदूरवर्ती पहाड़ी इलाकों में अक्सर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लटकने की शिकायतें आम रहती हैं। शासन ने इस बार पहले ही पेच कस दिए हैं। जारी आदेश के मुताबिक, संबंधित कार्यदायी संस्था को तयशुदा समयसीमा के भीतर ही टेंडरिंग और एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूरी कर काम धरातल पर उतारना होगा।
सामग्री की जांच थर्ड-पार्टी या अधिकृत लैब्स से कराने पर जोर दिया गया है। मानकों में जरा सी भी कोताही मिली, तो सीधे फील्ड इंजीनियरों और अफसरों की जवाबदेही तय होगी।
‘दूरस्थ अंचलों तक हवाई संपर्क पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता’
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने इस वित्तीय मंजूरी पर खुशी जताते हुए कहा कि पहाड़ के अंतिम छोर तक जरूरी बुनियादी ढांचा खड़ा करना सरकार का मूल संकल्प है। उनका कहना था कि हेलीपैड बनने से न सिर्फ आपदा प्रबंधन और आपातकालीन मेडिकल रेस्क्यू को नई ताकत मिलेगी, बल्कि आने वाले समय में क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। विभागीय अधिकारियों को बिना वक्त गंवाए जमीन पर काम शुरू करने की हिदायत दी गई है।