लद्दाख में एक साल बाद फिर गूंजा स्वायत्तता का मुद्दा, प्रार्थना सभा और पदयात्रा के बीच शांति कायम

Published on 24 सित॰ 2026

लद्दाख में एक साल बाद फिर गूंजा स्वायत्तता का मुद्दा, प्रार्थना सभा और पदयात्रा के बीच शांति कायम

Leh-ladakh Shutdown Anniversary: लद्दाख में पिछले साल 24 सितंबर को हुई हिंसा की पहली बरसी पर लेह में शांतिपूर्ण बंद रहा. बाजार बंद रहे और सड़कों पर आवाजाही बेहद कम रही.

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Leh-ladakh Shutdown Anniversary

Leh-ladakh Shutdown Anniversary Photograph: (NN)

Leh-ladakh Shutdown Anniversary: पिछले साल 24 सितंबर 2025 को हुए हिंसक प्रदर्शन और पुलिस फायरिंग की पहली बरसी पर गुरुवार को लेह में व्यापक बंद का आह्वान किया गया. स्थानीय लोगों के अनुसार शहर की अधिकांश दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम आवाजाही देखने को मिली.

शांतिपूर्ण बंद और सीमित भागीदारी

लद्दाख में क्षेत्रीय स्वायत्तता की मांग को लेकर यह बंद आयोजित किया गया. हालांकि इस दौरान जिस भारी भीड़ की उम्मीद थी वह नहीं उमड़ी और इस दौरान हिंसा की आशंका भी निराधार साबित हुई. कुल मिलाकर बंद और प्रदर्शन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ. इस दौरान एपेक्स बॉडी और लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन (LBA) ने पदयात्रा और प्रार्थना सभा का आयोजन किया.

70 से अधिक नहीं रही प्रतिभागियों की संख्या

लद्दाख पुलिस के अनुसार, 23 सितंबर की पदयात्रा में किसी भी समय प्रतिभागियों की संख्या 70 से अधिक नहीं रही. पुलिस का कहना है कि 20 किलोमीटर की प्रस्तावित पदयात्रा केवल 4 किलोमीटर तक ही चली, जिसके बाद प्रदर्शनकारी वाहनों से सिंधु घाट पहुंचे और वहां से एनडीएस मेमोरियल पार्क तक पैदल मार्च किया.

24 सितंबर को एनडीएस स्टेडियम में आयोजित प्रार्थना सभा में भी पुलिस के अनुसार अधिकतम 500  लोगों के  शामिल होने की जानकारी सामने आई. सभा को सोनम वांगचुक, सांसद मोहम्मद हनीफा जान, चेयरिंग दोरजे लाकरूक, थुपस्तान छेवांग, असगर करबलाई और सज्जाद करगिली समेत कई नेताओं ने संबोधित किया.

प्रशासन और पुलिस का रुख

हालांकि, प्रदर्शनकारी नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बैरिकेड लगाकर लोगों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोका. लद्दाख पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को सभा में शामिल होने से नहीं रोका गया. पुलिस के मुताबिक बैरिकेड केवल ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन के लिए लगाए गए थे और नेताओं के आरोप "पूरी तरह निराधार और भ्रामक" हैं.

मुकदमों की वापसी से राहत की पहल

बरसी से एक दिन पहले लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पिछले वर्ष के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में राहत की घोषणा की. उन्होंने कहा कि शांति, सामाजिक सौहार्द और जनहित को ध्यान में रखते हुए 20 लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लेने को मंजूरी दी गई है.

संवैधानिक अधिकारों और छठी अनुसूची की मांग

हालांकि केंद्र सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच गृह मंत्रालय के स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन स्थानीय संगठनों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगें अब भी अधूरी हैं. सरकार ने स्थानीय लोगों के लिए 85 प्रतिशत सरकारी नौकरियां आरक्षित करने और वर्ष 2036 तक बाहरी लोगों को लद्दाख का डोमिसाइल नहीं देने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी संविधान की छठी अनुसूची  के तहत व्यापक संवैधानिक संरक्षण और स्वायत्तता की मांग पर कायम हैं.

उनका कहना है कि इससे भूमि, रोजगार, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक आजीविका से जुड़े मामलों पर स्थानीय स्तर पर कानून बनाने का अधिकार मिलेगा. भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण लद्दाख की सीमाएं चीन और पाकिस्तान से लगती हैं. ऐसे में यहां का राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्र की स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.