दुर्गा पूजा के बहाने बंगाल में सियासी जमीन मजबूत करेगी बीजेपी, तैयार हुआ मेगा प्लान - Doon Horizon

Published on 1 अक्टू॰ 2026

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान बीजेपी ने बड़े जनसंपर्क की योजना बनाई है। महालया पर पीएम मोदी के ईडन गार्डन्स और अमित शाह के संतोष मित्रा स्क्वायर जाने की तैयारी है।

दून हॉराइज़न, कोलकाता (01 अक्टूबर) : पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सव दुर्गा पूजा (Durga Puja) को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने जमीनी स्तर पर व्यापक जनसंपर्क साधने की बड़ी तैयारी की है। पार्टी की राज्य इकाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक को कोलकाता के प्रमुख पंडालों में आमंत्रित करने का विस्तृत खाका तैयार किया है।

ईडन गार्डन्स में महालया पर पीएम मोदी की मौजूदगी की तैयारी

संगठन स्तर से तैयार किए गए कार्यक्रम के अनुसार, 10 अक्टूबर को महालया के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोलकाता आमंत्रित करने का प्रस्ताव भेजा गया है। महालया से ही देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है और बंगाली जनमानस में इस दिन का गहरा भावनात्मक महत्व है। प्रदेश नेतृत्व ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स परिसर में सजने वाले भव्य पंडाल में प्रधानमंत्री की पूजा-अर्चना और जनसंवाद की रूपरेखा बना रहा है। आधिकारिक हरी झंडी मिलते ही एसपीजी और स्थानीय प्रशासन स्तर पर सुरक्षा समीक्षा शुरू कर दी जाएगी।

संतोष मित्रा स्क्वायर जाएंगे अमित शाह, नितिन नबीन भी संभालेंगे मोर्चा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के ठीक अगले दिन कोलकाता पहुंच सकते हैं। मध्य कोलकाता का संतोष मित्रा स्क्वायर पूजा पंडाल लंबे समय से भाजपा नेता सजल घोष से जुड़ा रहा है और अमित शाह बीते वर्षों में भी यहां पूजा-उद्घाटन के लिए आते रहे हैं। इस बार वे कुछ अतिरिक्त पंडालों का रुख भी कर सकते हैं। इसके साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन को भी जिलों के पंडाल दौरों की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है ताकि शहरी दायरे से बाहर भी उपस्थिति दर्ज कराई जा सके।

पंडाल अनुमति नियमों में ढील और सियासी समीकरण

बीजेपी नेताओं का दावा है कि राज्य में पहले पूजा समितियों को अनुमति लेने के लिए प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अदालती निर्देशों और बदले माहौल के चलते अब सिंगल-विंडो सिस्टम जैसे कदमों से प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हुई है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्षी दलों के स्थानीय पार्षद, विधायक और सांसद भी अपने-अपने प्रभाव वाले इलाकों में खुलकर भव्य पूजा पंडाल सजा रहे हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद से कमजोर पड़े सांगठनिक ढांचे को त्योहारों के जरिए पुनः सक्रिय करने की इस रणनीति को तृणमूल कांग्रेस के सांस्कृतिक वर्चस्व को सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।