अब क्या करेगा चीन? अमेरिका ने ताइवान को दिए घातक फाइटर जेट

Published on 2 अक्टू॰ 2026

ताइवान ने शुक्रवार को अमेरिका से बने एडवांस F-16V ब्लॉक 70 लड़ाकू विमानों की पहली खेप प्राप्त की. कुल 66 विमानों के इस बड़े सौदे में से दो विमान ताइवान पहुंचे. ये विमान हवाई और गुआम होते हुए आए. यह डिलीवरी 2019 में मंजूर हुए लगभग 8 अरब डॉलर के अमेरिकी रक्षा सौदे का हिस्सा है. उत्पादन संबंधी समस्याओं के कारण इसमें देरी हुई थी. 

1997 के बाद यह ताइवान को विदेश से मिले नए लड़ाकू विमानों का पहला जत्था है. पूरा होने पर ताइवान का F-16 बेड़ा 200 से अधिक विमानों तक पहुंच जाएगा. इन विमानों के आने का समय बहुत महत्वपूर्ण है. उसी दिन चीनी वायुसेना के छह विमानों ने स्ट्रेट ऑफ ताइवान की मध्य रेखा पार की. 

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चीन नियमित रूप से ताइवान के आसपास सैन्य उड़ानें भरता रहता है. इन विमानों से ताइवान अपनी हवाई क्षेत्र की निगरानी बेहतर तरीके से कर सकेगा. रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख जोसेफ वू ने इस डिलीवरी का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि ये विमान ताइवान के आसमान की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं. 

Taiwan receives first 2 F-16V Block 70 fighter jets

Taiwan took delivery Friday of the first two of 66 F-16V Block 70 fighter jets purchased from the United States, with the aircraft landing at Chihhang Air Base in the eastern county of Taitung at around noon. pic.twitter.com/hbqdV6io26

— Focus Taiwan (CNA English News) (@Focus_Taiwan) October 2, 2026

F-16V ब्लॉक 70 की खासियत और सैन्य महत्व  

F-16V ब्लॉक 70 दुनिया के सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स में से एक है. इसमें बेहतर रडार, हथियार सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता है. पुराने F-16 विमानों की तुलना में यह ज्यादा प्रभावी है. ताइवान पहले से ही F-16 का बड़ा बेड़ा रखता है. नए विमानों से उसकी वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी. 

ये विमान चीन की संभावित आक्रामकता के खिलाफ प्रतिरोध क्षमता बढ़ाएंगे. स्ट्रेट ऑफ ताइवान में तनाव लगातार बना हुआ है. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है. जबकि ताइवान अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है.  

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यह डिलीवरी अमेरिका की ताइवान के प्रति सुरक्षा प्रतिबद्धता को दर्शाती है. अमेरिका आधिकारिक रूप से ताइवान को मान्यता नहीं देता, लेकिन हथियार बेचकर उसकी रक्षा क्षमता बढ़ाता रहता है. 2019 का यह सौदा ट्रंप प्रशासन के दौरान मंजूर हुआ था और बाद में भी जारी रहा. 

उत्पादन देरी के बावजूद पहली खेप का आना दोनों देशों के रक्षा सहयोग को मजबूत करता है. क्षेत्रीय स्तर पर यह घटना इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगी. जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की नजर भी इस पर है. चीन इस कदम का विरोध करता रहा है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताता है.  

Taiwan F-16V delivery

चुनौतियां और आगे की राह  

पूरे 66 विमानों की डिलीवरी में अभी समय लगेगा. उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां बनी हुई हैं. ताइवान को इन विमानों के संचालन और रखरखाव के लिए अमेरिकी प्रशिक्षण और स्पेयर पार्ट्स की जरूरत होगी. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ विमान पर्याप्त नहीं हैं. 

आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल और साइबर क्षमता भी जरूरी है. फिर भी, इन दो विमानों का आना प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है. यह ताइवान की रक्षा तैयारियों को मजबूत संदेश देता है कि वह अकेला नहीं है.  

स्ट्रेट ऑफ ताइवान में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं हैं. चीन की सैन्य गतिविधियां जारी हैं. ऐसे में अमेरिकी F-16V विमानों की यह डिलीवरी ताइवान की सुरक्षा रणनीति का एक अहम हिस्सा बन गई है. आने वाले वर्षों में इन विमानों की भूमिका क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को प्रभावित करेगी.  

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