
03 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: रबी फसलों की एमएसपी बढ़ी, अब चुनौती किसानों तक लाभ पहुंचाने की – केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए छह अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। सरकार की ओर से घोषित नई दरों में कुसुम के एमएसपी में 675 रुपये, सरसों में 413 रुपये, मसूर में 390 रुपये, जौ में 136 रुपये, चने में 83 रुपये और गेहूं में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इसके बाद गेहूं का एमएसपी 2610 रुपये, चना 5958 रुपये, मसूर 7390 रुपये, सरसों 6613 रुपये, जौ 2286 रुपये और कुसुम 7215 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।
एमएसपी में वृद्धि का महत्व इसलिए भी है कि यह किसानों को उनकी उपज के लिए एक घोषित न्यूनतम मूल्य उपलब्ध कराने की सरकारी नीति का हिस्सा है। केंद्र के अनुसार नई दरों में अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के मुकाबले 50 से 106 प्रतिशत तक का मार्जिन रखा गया है। गेहूं के लिए यह मार्जिन 106 प्रतिशत, सरसों के लिए 96 प्रतिशत और मसूर के लिए 92 प्रतिशत बताया गया है।
लेकिन एमएसपी घोषित होना और उसका वास्तविक लाभ किसान तक पहुंचना दो अलग-अलग बातें हैं। किसान के लिए महत्वपूर्ण यह है कि उसकी उपज निर्धारित मूल्य पर खरीदने की प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध हो। पर्याप्त खरीद केंद्र, समय पर भुगतान, तौल में पारदर्शिता, भंडारण और परिवहन की व्यवस्था जैसी चीजें एमएसपी की वास्तविक उपयोगिता तय करती हैं। यदि किसान को मजबूरी में घोषित समर्थन मूल्य से कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़े तो बढ़ा हुआ एमएसपी उसके लिए अपेक्षित राहत में पूरी तरह परिवर्तित नहीं हो पाएगा।
सरकार ने रबी फसलों की खरीद में भी वृद्धि के आंकड़े जारी किए हैं। उसके अनुसार 2014-15 से 2025-26 के दौरान छह प्रमुख रबी फसलों की कुल खरीद 3921 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2302 लाख मीट्रिक टन थी। इसी अवधि में इन छह फसलों के लिए एमएसपी भुगतान 8.36 लाख करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि पिछली अवधि में यह 2.65 लाख करोड़ रुपये था। ये सरकारी आंकड़े हैं और इनका संदर्भ संबंधित अवधियों के साथ ही देखा जाना चाहिए।एक महत्वपूर्ण पहलू दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने का भी है। सरकार ने एमएसपी के माध्यम से इन फसलों को प्रोत्साहित करने की नीति पर जोर दिया है। धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में दलहन की खेती बढ़ाने के लिए ‘राइस फेलो एरिया’ पहल का उल्लेख भी किया गया है। इसका उद्देश्य दलहन का रकबा बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना है।
कुल मिलाकर, एमएसपी में वृद्धि कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण नीति निर्णय है, लेकिन इसकी सफलता का वास्तविक पैमाना खेत और मंडी के बीच तय होगा। किसान को घोषित मूल्य, वास्तविक खरीद, समय पर भुगतान और बाजार की पारदर्शी व्यवस्था—इन चारों का लाभ एक साथ मिले, तभी एमएसपी वृद्धि का उद्देश्य जमीन पर दिखाई देगा।
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