Vrindavan News: मथुरा के वृंदावन में रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत के बाद से कई सवाल लोगों के मन में रह-रहकर उठ रहे हैं. वहीं, श्री हित राधा केली कुंज के कोषाध्यक्ष गरबीली शरण उर्फ गौरव के बदले रूप को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. हालांकि गरबीली शरण ने अपना रूप बदलने को लेकर जानकारी साझा की है, लेकिन उनके द्वारा दिया गया बयान संदेह पैदा करता है.
दरअसल, प्रेमानंद महाराज से जुड़े ट्रस्ट श्री हित राधा केली कुंज के कोषाध्यक्ष गरबीली शरण उर्फ गौरव का बदला हुआ रूप इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. कभी लंबे बाल, जटा और दाढ़ी वाले विरक्त वेश में नजर आने वाले गरबीली शरण अब अचानक सामान्य वेशभूषा में दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर उन्होंने अपना वेश क्यों बदला? क्या गरबीली शरण ने विरक्त जीवन को त्यागकर गृहस्थ जीवन को अपनाने का फैसला किया है? क्या आश्रम से जुड़े ड्रेस कोड में बदलाव इसका कारण है? या फिर इसके पीछे कोई और वजह है?
गरबीली शरण ने खुद अपने वेश परिवर्तन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है. उनका कहना है कि पूज्य महाराज श्री की आज्ञा के अनुसार जो साधक पत्नी और बच्चों के साथ गृहस्थ जीवन में रहते हुए अपने पारिवारिक दायित्व निभा रहे हैं, उन्हें विरक्त वेश को विश्राम देकर सामान्य सात्विक वेशभूषा में भजन-साधना करनी चाहिए.
क्या बताई वजह?
गरबीली शरण के मुताबिक, वह स्वयं भी गृहस्थ व्यवस्था में रहते हैं और उनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियां हैं. इसी कारण उन्होंने महाराज श्री की आज्ञा को स्वीकार करते हुए पीत विरक्त वेश को विश्राम देने और सामान्य सात्विक वस्त्र धारण करने का निर्णय लिया है. उन्होंने यह भी बताया कि उनका परिवार पहले ही सामान्य वेशभूषा अपना चुका है.
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वेश बदलने के साथ गरबीली शरण की भूमिका और आश्रम से उनका जुड़ाव भी बदलेगा? इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी वेशभूषा में बदलाव हुआ है, लेकिन उनकी हितोपासना और साधना के प्रति निष्ठा पहले की तरह बनी हुई है. उनका कहना है कि श्रीहित हरिवंश महाप्रभु द्वारा प्रदत्त श्यामा-श्याम की निकुंज उपासना में उनकी आस्था और साधना जारी रहेगी. साथ ही श्रीराधा केली कुंज ट्रस्ट की सेवा, कुंज निवासी संतों की सेवा और श्रीधाम वृंदावन में निवास को वह आगे भी जारी रखेंगे.
रसिक दुलारी की मौत पर क्या बोले?
वहीं, रसिक दुलारी शरण की मौत के मामले को लेकर भी गरबीली शरण ने ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि आखिर घटना में क्या हुआ और रसिक दुलारी शरण ने अपने साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया. अब सवाल यह है कि गरबीली शरण का यह वेश परिवर्तन क्या केवल गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों से जुड़ा सामान्य बदलाव है, या इसके पीछे आश्रम की व्यवस्था में हुए किसी बड़े बदलाव की भी कहानी है? फिलहाल गरबीली शरण ने अपने बयान में इसे महाराज श्री की आज्ञा और गृहस्थ जिम्मेदारियों से जोड़कर स्पष्ट किया है.

कान्हा अग्रवाल, मथुरा
पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता कर रहा हूं, इस दौरान कई संस्थानों के साथ मिलकर कार्य किया है. फिलहाल TV9 भारतवर्ष के साथ जुड़ा हुआ हूं.
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