पिता की याद में प्रतिभाओं को सम्मानित कर रहे बेटे: एक बेटा उज्जैन में एसपी, खुरई के बेटों की हो रही सराहना - Bina News

Published on 10 अक्टू॰ 2026

खुरई के शासकीय नवीन प्रताप माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक रहे बालकृष्ण अहिरवार की 2015 में मृत्यु हो गई थी। उनके तीन बेटों ने पिता की याद में 2016 से 'स्व. बालकृष्ण अहिरवार स्मृति शिक्षा पुरस्कार' शुरू किया। वे 10 साल से स्कूल के प्रतिभाशाली विद्यार्थि

.

यह पहल पिता की यादों को सहेजने के साथ विद्यार्थियों को प्रेरणा दे रही है। तीनों बेटों में से एक एचएन अहिरवार उज्जैन में पुलिस अधीक्षक रेडियो के पद पर हैं।

हाल ही में स्कूल परिसर में हुए कार्यक्रम में सत्र 2025-26 के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। स्व. बालकृष्ण अहिरवार की पत्नी सरजू अहिरवार और नगर पालिका अध्यक्ष नन्नी बाई अहिरवार मुख्य अतिथि थीं।

बेटों इंजीनियर एलडी रोहित, पुलिस अधीक्षक एचएन अहिरवार और मलेरिया इंस्पेक्टर पीएल रोहित ने विद्यार्थियों को नकद राशि और प्रमाण पत्र दिए। शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। इस पहल की सराहना हो रही है।

पिता से मिली प्रेरणा, इसलिए जारी रखी परंपरा पुलिस अधीक्षक रेडियो उज्जैन एचएन अहिरवार ने बताया कि उनके पिता ने इसी स्कूल में अपना पूरा जीवन शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया था। वे सभी विद्यार्थियों को समान दृष्टि से देखते थे। पिता के इसी व्यवहार और शिक्षा के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेकर तीनों भाइयों ने उनकी स्मृति में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया। इसी उद्देश्य से हर साल मेधावी छात्र-छात्राओं को नकद पुरस्कार और प्रमाण पत्र दिए जाते हैं, ताकि वे आगे भी मेहनत कर बेहतर उपलब्धियां हासिल कर सकें।'

बड़े पद से पहले संस्कार जरूरी' नगर पालिका अध्यक्ष नन्नी बाई अहिरवार ने तीनों बेटों की पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में ऐसे पुत्र होना गर्व की बात है। पिता के निधन के बाद भी उनकी याद में शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह का कार्य करना समाज के लिए मिसाल है। हर व्यक्ति को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी हैं। व्यक्ति चाहे कितने ही बड़े पद पर पहुंच जाए, लेकिन उसके जीवन में संस्कारों का महत्व सबसे पहले होना चाहिए। इसमें शिक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि शिक्षक का व्यवहार और मार्गदर्शन कई बच्चों का भविष्य संवार सकता है। उन्होंने कहा कि उनका सपना भी शिक्षक बनने का था, लेकिन ईश्वर को कुछ और मंजूर था। समाज में कोई भी बच्चा या बच्ची पढ़ना चाहता है, तो उसे शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए। शिक्षा से ही जीवन में आगे बढ़ने के रास्ते खुलते हैं। कार्यक्रम का संचालन एचएन अहिरवार ने किया। पिता की स्मृति में पिछले एक दशक से जारी यह पहल विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के साथ ही शिक्षा और संस्कारों के महत्व का संदेश भी दे रही है।