जबलपुर के अहिंसा चौक शेल्बी हॉस्पिटल में रविवार तड़के उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब सेमी-प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर 315 में अचानक आग भड़क उठी।
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देखते ही देखते पूरे फ्लोर पर जहरीला काला धुआं फैल गया, जिससे वहां भर्ती मरीजों, उनके परिजनों और मेडिकल स्टाफ के बीच भगदड़ मच गई।
इलाज और जीवन की आस लेकर आए असहाय मरीजों को अपनी जान बचाने के लिए बदहवासी में इधर-उधर भागना पड़ा।
देखिए आग की तस्वीरें…

आग के बाद दमकल और सुरक्षाकर्मी हॉस्पिटल पहुंच गए।

आग के बाद इस तरह जली हुई राख सामने आई।

इस तरह ऊपरी मंजिल पर आग भड़कते हुए दिखाई दी।

परिजन ने लगाया आरोप
आग लगने की घटना के बाद मरीजों के परिजनों ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। परिजनों ने प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मोबाइल, हियरिंग एड और कार की चाबी सहित करीब 5 से 6 लाख रुपए के सामान के नुकसान का मुआवजा मांगा।

परिजनों ने इस तरह से कार हॉस्पिटल के गेट पर अड़ा दी।
अस्पताल के गेट पर खड़ी कर दी कार
गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के अंदर वाले गेट पर कार खड़ी कर दी। प्रबंधन की समझाइश के बाद कार को गेट से हटा लिया गया, लेकिन घटना को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। परिजनों का आरोप है कि आग के दौरान उनके सामान को नुकसान पहुंचा और प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय मरीजों पर ही आग लगाने का आरोप लगा रहा था।
इससे परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए नुकसान का आकलन कराने के बाद नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है।
प्रबंधन बोला- हॉज रील्स और दमकल से आग पर पाया काबू
अस्पताल प्रबंधन के प्रतिनिधि अंकित जैन के मुताबिक, बेडशीट और लकड़ी के कारण आग फैली थी। अस्पताल की हॉज रील्स और दमकल की मदद से सुबह 5:10 बजे तक स्थिति पर काबू पा लिया गया था। उन्होंने लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अस्पताल एनएबीएच (NABH) गाइडलाइंस के तहत संचालित है।
प्रबंधन के अनुसार, अस्पताल में आग से बचाव के लिए चार लिफ्ट, दो फायर एग्जिट और स्प्रिंकलर की व्यवस्था है। परिजनों के सामान को हुए नुकसान का आकलन करने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गंभीर मरीजों को गोद और कंधों पर उठाकर निकालना पड़ा
रविवार तड़के सेमी-प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर 315 में आग लगी थी। प्रारंभिक जानकारी में शॉर्ट सर्किट को इसकी वजह बताया गया। देखते ही देखते फ्लोर पर काला धुआं फैल गया, जिससे मरीजों, परिजनों और मेडिकल स्टाफ के बीच अफरा-तफरी मच गई।
नगर निगम की तीन दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। रैंप की व्यवस्था नहीं होने के कारण वेंटिलेटर और आईसीयू में भर्ती करीब 10 गंभीर मरीजों को तीमारदारों और कर्मचारियों ने गोद और कंधों पर उठाकर तीसरी मंजिल से सीढ़ियों के रास्ते नीचे उतारा।
बाद में मरीजों को पास के दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। राहत की बात यह रही कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।
मरीज के परिजन का सामान जला
हादसे के समय कमरा नंबर 315 में दो मरीज मौजूद थे। 83 वर्षीय जोगिंदर सिंह नारंग के पौत्र सुखनाम ने धुआं उठते ही अस्पताल प्रबंधन को सतर्क किया और कई मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। इस दौरान उनके दो मोबाइल, एयरपॉड्स और दादाजी की सुनने की मशीन जल गई।
घटना के बाद फायर अलार्म सिस्टम के काम नहीं करने और आपात स्थिति में मरीजों को नीचे उतारने की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। अब एक तरफ परिजन नुकसान के मुआवजे की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रबंधन आकलन के बाद कार्रवाई की बात कह रहा है।