( कारिन सोवादा, मैक्वायर यूनिवर्सिटी )
सिडनी, 15 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) पुरातत्वविदों की एक टीम का मानना है कि तुर्किये के तट पर मिला जहाज का मलबा दुनिया में अब तक खोजा गया सबसे पुराना मलबा है।
जहाज का बहुत कम हिस्सा बचा है, लेकिन उसमें मिले मिट्टी के बर्तनों सहित अन्य सुरागों के आधार पर शोधकर्ताओं की टीम ने अनुमान लगाया है कि यह मलबा करीब 2700 से 2400 ईसा पूर्व का है।
यह लगभग 4,500 साल पुराना है। इस खोज से पहले दुनिया का सबसे पुराना ज्ञात जहाज का मलबा यूनान के डोकोस तट के पास मिला था, जिसे करीब 4,200 साल पुराना माना जाता था।
हालांकि, इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए अभी काफी काम किया जाना बाकी है। इसके बावजूद, यह खोज कांस्य युग के शुरुआती दौर में प्राचीन भूमध्यसागरीय क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्कों को समझने के हमारे नजरिये को बदल सकती है।
यह भी संभव है कि इससे भी पहले, आज के व्यापक व्यापार मार्गों की नींव पड़ी हो।
----- सुरागों की तलाश -----
अंताल्या स्थित अकदेनिज विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर हाकान ओनिज दशकों से तुर्किये के इस तट पर प्राचीन जहाजों के मलबे की खोज और खुदाई कर रहे हैं।
स्थानीय नाविकों से मिले सुरागों के आधार पर ओनिज ने 2024 में तुर्किये में अंताल्या के पश्चिम में केकोवा के पास उथले पानी में एक जहाज का मलबा खोजा। इस साल की शुरुआत में उन्होंने मुझसे संपर्क किया और मलबे में मिले मिट्टी के कुछ बर्तनों की उम्र का पता लगाने में मदद मांगी।
पानी के भीतर लंबे समय तक रहने के कारण जहाज का कोई हिस्सा अब दिखाई नहीं देता। शोधकर्ताओं की टीम ने अनुमान लगाया है कि जहाज और उसमें लदा माल 2700 से 2400 ईसा पूर्व के बीच का है। इसकी सटीक उम्र पर अभी विचार किया जा रहा है और यह अवधि से कुछ पहले या बाद का भी हो सकता है।
----- प्राचीन व्यापार की झलक दिखाने वाला कालखंड का साक्ष्य -----
यह खोज करीब 4,500 साल पहले के शुरुआती व्यापार नेटवर्क के बारे में हमारी समझ को नए सिरे से गढ़ सकती है।
यह जहाज पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में व्यापार, वस्तुओं के आदान-प्रदान और संपर्कों के इतिहास की एक अहम कड़ी है। यह वही दौर था, जब मिस्र में गीजा के पिरामिडों का निर्माण हुआ और शक्तिशाली फराओ का शासन था।
समुद्र के नीचे मौजूद यह अवशेष प्राचीन व्यापार की कहानी बताने वाले एक कालखंड के साक्ष्य की तरह है।
जहाज किस दिशा में जा रहा था, यह पता नहीं है, लेकिन इतना स्पष्ट है कि वह तुर्किये के दक्षिणी तट के साथ यात्रा कर रहा था।
अब यह दो द्वीपों के बीच समुद्र तल पर पड़ा है। ऐसा लगता है कि तूफान के दौरान जहाज ने द्वीपों की आड़ में अपेक्षाकृत शांत पानी में शरण लेने की कोशिश की होगी। कल्पना की जा सकती है कि चट्टानों से टकराते जहाज पर सवार नाविक कितने भयभीत हुए होंगे। संभव है कि वे लेवंत क्षेत्र के तटीय इलाकों के निवासी रहे हों।
जहाज की लकड़ी बहुत पहले नष्ट हो गई, लेकिन उसमें लदे कीमती माल के अवशेष केकोवा तट के पास चट्टानी ढलान में धंसे रह गए। गोताखोरों ने पिछले चार महीनों में पानी के भीतर चट्टानों से चिपके बार्नेकल यानी छोटे समुद्री जीवों के बीच से मिट्टी के बर्तनों को निकालने का काम किया।
----- मिट्टी के बर्तनों से मिली जानकारी -----
मिट्टी के बर्तन प्लास्टिक की तरह होते हैं। वे पूरी तरह गायब नहीं होते, बल्कि टूटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाते हैं।
इसके बावजूद, साधारण दिखने वाले मिट्टी के बर्तन अतीत के बारे में कई अहम सुराग देते हैं।
इस जहाज के माल में मिट्टी के बड़े भंडारण पात्र या एम्फोरा शामिल थे। इनमें कभी पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से लाई गई वस्तुएं रखी जाती थीं।
इन बर्तनों से उनके संभावित उद्गम स्थल और उस क्षेत्र में किन वस्तुओं का आदान-प्रदान होता था, इसकी जानकारी मिली। खास बात यह है कि बर्तनों के आकार और उन्हें बनाने की तकनीक के आधार पर उनके माल की उम्र का अनुमान लगाया जा सकता है। इससे अन्य बर्तनों और जहाज की उम्र का पता लगाने में भी मदद मिलती है।
----- व्यापक तस्वीर -----
बाद के दौर की तुलना में, तीसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व (3000 से 2000 ईसा पूर्व) के दौरान पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में व्यापार और वस्तुओं के आदान-प्रदान के बारे में जानकारी सीमित है।
उस दौर में समुद्री यात्राओं के प्रमाण मिस्र के ग्रंथों, मिट्टी के बर्तनों और प्राचीन कब्रों में मिली कच्ची सामग्रियों से मिलते हैं।
जिस समय यह जहाज चट्टानों से टकराया होगा, लगभग उसी दौर में प्राचीन मिस्र के लोग लेबनान के बाइब्लोस बंदरगाह के रास्ते पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में व्यापार कर रहे थे।
मिस्र में उपलब्ध नहीं होने वाली देवदार की लकड़ी, टिन और सीसा, तेल, पेड़ों से मिलने वाले रेजिन, लाजवर्द और चांदी जैसी वस्तुओं का आयात मिस्र का शासन करता था।
हाल के वैज्ञानिक शोध से यह भी पता चला है कि करीब 2600 ईसा पूर्व मिस्र के शासक चांदी प्राप्त कर रहे थे। विश्लेषण से संकेत मिला कि यह चांदी आधुनिक एथेंस के पूर्व में स्थित लाव्रियो की खदानों से लाई गई थी।
हालांकि, यह संभावना कम है कि मिस्र के जहाज इतनी लंबी यात्रा करते थे। लेकिन केकोवा के पास डूबे जहाज जैसे पोत विस्तृत अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार नेटवर्क के तहत इस मार्ग का इस्तेमाल करते रहे होंगे।
और उन मटकों में क्या था? हैरानी की बात है कि उनमें कुछ पदार्थों के अवशेष अब भी नग्न आंखों से दिखाई देते हैं। इनके वैज्ञानिक विश्लेषण के नतीजे आने बाकी हैं, लेकिन संभव है कि इनमें मिस्र के प्राचीन ग्रंथों में उल्लिखित वस्तुओं में से कुछ हों, जैसे जैतून का तेल, शराब या पेड़ों से मिलने वाला रेजिन।
संभव है कि जहाज ने अपनी यात्रा के दौरान कई बंदरगाहों से मिट्टी के बर्तन लिए हों। शोध के मौजूदा चरण में हमारा सबसे बेहतर अनुमान है कि पट्टीदार बर्तनों में से कुछ, या उन्हें बनाने में इस्तेमाल की गई मिट्टी, मध्य जॉर्डन घाटी से आई हो सकती है।
तुर्किये का दक्षिणी तट प्राचीन जहाजों के मलबे से भरा पड़ा है। समुद्री पुरातत्व भले ही अपेक्षाकृत नया क्षेत्र हो, लेकिन दुनिया के कुछ सबसे प्रसिद्ध जहाजों के मलबे इसी इलाके में मिले हैं। इन समुद्री जलक्षेत्रों में अतीत के और कितने रहस्य छिपे हैं, यह कहना मुश्किल है।
द कन्वरसेशन मनीषा पवनेश
पवनेश