
कहीं गलत बर्तनों में तो नहीं पका रहे खानाImage Credit source: pexels
खाना बनाने में किस तरह के मसालों, सब्जी, तेल और बाकी फूड्स का इस्तेमाल हो रहा है, यह आपकी सेहत से सीधे तौर पर जुड़ा होता है. इसी वजह से ज्यादातर लोग इसका ध्यान रखते हैं, लेकिन किचन में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों से लेकर बर्तन के मैटेरियल तक से आपकी सेहत पर असर हो सकता है. इस आर्टिकल में जानेंगे कि किस मैटेरियल या धातु के बने बर्तन से स्वास्थ्य पर क्या असर हो सकता है.
नई दिल्ली के जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (Gastroenterologist) और हेपेटोलॉजिस्ट डॉक्टर शुभम वात्स्य ने अलग-अलग मैटेरियल के हिसाब से खाने में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों को रेटिंग दी है. इसी के साथ उन्होंने ये भी बताया कि कौन से बर्तन खाने के लिए सबसे खराब होते हैं.
प्लास्टिक के कंटेनर
खाने में आजकल टिफिन से लेकर बाहर से पैक होकर आने वाले खाने तक में प्लास्टिक के कंटेनर इस्तेमाल किए जाते हैं. डॉक्टर शुभम ने प्लास्टिक के बर्तनों को 10 में से माइनस इनफिनिटी (-∞) रेटिंग दी है. उनका कहना है कि प्लास्टिक के बर्तनों में बार-बार हीट करने से खाने में माइक्रोप्लास्टिक और कुछ केमिकल मिल सकते हैं.
स्टील के बर्तन
खाना बनाने और खाने में स्टील के बर्तनों का काफी ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. इस मैटेरियल से बने यूटेंसिल्स या बर्तनों को डॉक्टर शुभम ने 10 में से 10 नंबर दिए हैं. यह लॉन्ग लास्टिंग (लंबे समय तक चलने वाला) होता है और हर तरह के फूड्स को पकाने, डेली का खाने के लिए बिल्कुल परफेक्ट रहता है.

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शीशे के बर्तन
एक्सपर्ट ने शीशे के बर्तनों को भी 10 में से 10 नंबर दिए हैं. वह कहते हैं कि बोरोसिलिकेट ग्लास (कांच) केमिकली स्टेबल होता है और ये आमतौर पर फूड में केमिकल लीच नहीं करता है. कुकिंग, प्री-हीटिंग और खाने के स्टोरेज के लिए अच्छा ऑप्शन रहता है.
कास्ट आयरन
क्रिस्पी चीला से लेकर आमलेट और डोसा तक के लिए कास्ट आयरन के तवा का इस्तेमाल किया जाता है. इस मैटेरियल से बने बर्तन को 10 में से 9 रेटिंग दी गई है. डॉक्टर शुभम का कहना है कि ये बहुत ड्यूरेबल होता है. फूड में आयरन बढ़ा सकता है, लेकिन एसिडिक (खट्टे) फूड को लंबे समय तक पकाने से आयरन ट्रांसफर ज्यादा हो सकता है .
सेरेमिक के बर्तन
घरों में कप से लेकर प्लेट तक लोग सेरेमिक मैटेरियल (आम बोलचाल में चीनी मिट्टी के बर्तन) के बर्तनों का काफी यूज करते हैं. इसको डॉक्टर शुभम ने 8 रेटिंग दी है. वह कहते हैं कि ये जनरली सेफ होता है, लेकिन इसकी खराब क्वालिटी की वजह से ग्लेज्ड कुकवेयर में कैडमियम या लेड हो सकता है.
एल्युमीनियम के बर्तन
घरों में एल्युमीनियम के बर्तनों का भी खाना पकाने में इस्तेमाल होता है. एक्सपर्ट ने इसे 10 में से महज 5 रेटिंग दी है. उनका कहना है कि इसमें एसिडिक या सॉल्टी फूड्स के साथ एल्युमीनियम खून में माइग्रेट कर सकता है. एनोडाइज्ड एल्युमीनियम में ट्रांसफर काफी कम होता है.
टेफ्लॉन या नॉनस्टिक कुकवेयर
डॉक्टर शुभम ने इन बर्तनों को भी 10 में से 5 रेटिंग दी है. उनका कहना है कि नॉर्मल टेम्परेचर पर इन बर्तनों में कुकिंग करना जनरली सेफ होता है, लेकिन ओवरहीटिंग से हार्मफुल फ्यूम्स (खतरनाक कण) रिलीज हो सकते हैं. अगर कोटिंग बहुत बुरी तरह से डैमेज है तो इन बर्तनों को तुरंत बदल दीजिए.

शशि सिंह
शशि सिंह टीवी9 डिजिटल हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं. उत्तर प्रदेश के बरेली शहर से ताल्लुक रखने वाली शशि ने बरेली कॉलेज (महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय) से आर्ट्स से ग्रेजुएशन किया है और अमर उजाला से संबंद्ध इंस्टीट्यूट 'द आरोहन मीडिया स्कूल' से इंटीग्रेटेड डिजिटल मीडिया में पीजी डिप्लोमा कर चुकी हैं. इसके साथ ही अमर उजाला से ही इन्होंने बतौर जूनियर कंटेंट राइटर पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की. वह रिलीजन, रिलेशनशिप, फूड, हेल्थ, और मनोरंजन जैसे टॉपिक्स पर लिखती हैं. इन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन सालों से ज्यादा का अनुभव है. वहीं मनोरंजन के साथ राजनीति, क्राइम और देश-दुनिया की खबरों के लेखन में भी दिलचस्पी रखती हैं. इसके अलावा इन्होंने 'टेकवन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन' से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री भी ली है. वह किताबें पढ़ने, कविताएं और शायरी लिखने-पढ़ने का शौक रखती हैं और नई-नई चीजों को एक्सप्लोर करना पसंद करती हैं.
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