धमतरी के किसान बंसी लाल सोढ़ी के पीढ़ियों से संरक्षित ‘चिरपोटी टमाटर’ को PPV&FRA में कृषक किस्म के रूप में कानूनी पहचान मिली, किसान सम्मानित।
चिरपोटी टमाटर
- Published: 01 Sep 2026, 06:12 PM IST
- Last Updated: 01 Sep 2026, 06:12 PM IST
यशवंत गंजीर- धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में पीढ़ियों से संरक्षित एक पारंपरिक टमाटर की किस्म को अब कानूनी पहचान मिल गई है। नगरी विकासखंड के ग्राम गुहनानाला के किसान बंसी लाल सोरी द्वारा संरक्षित ‘चिरपोटी टमाटर’ का पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) के अंतर्गत कृषक किस्म के रूप में पंजीयन हुआ है।
इस उपलब्धि पर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने किसान बंसी लाल सोरी को साल एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने पारंपरिक बीज के संरक्षण और उसे आधिकारिक पहचान दिलाने के लिए किए गए प्रयास की सराहना की।
पिता से मिली परंपरा, बेटे ने संभाली विरासत
‘चिरपोटी टमाटर’ के संरक्षण की परंपरा किसान बंसी लाल सोरी के परिवार में लंबे समय से चली आ रही है। बताया गया कि उनके स्वर्गीय पिता मंगलू राम सोरी इस पारंपरिक किस्म को संरक्षित करते थे। पिता के निधन के बाद बंसी लाल सोरी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पारंपरिक बीज को सुरक्षित रखा और लगातार इसका उत्पादन करते रहे। इस तरह ‘चिरपोटी टमाटर’ केवल एक कृषि किस्म नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों के पारंपरिक कृषि ज्ञान और क्षेत्र की जैव-विविधता से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर बन गया है।

कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से हुआ दस्तावेजीकरण
इस स्थानीय किस्म के संरक्षण और पंजीयन की प्रक्रिया में कृषि विज्ञान केंद्र धमतरी ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। संस्थान के सहयोग से ‘चिरपोटी टमाटर’ का आवश्यक दस्तावेजीकरण कर पंजीयन प्रक्रिया पूरी कराई गई। पंजीयन प्रमाण-पत्र के अनुसार ‘चिरपोटी टमाटर’ का रजिस्ट्रेशन नंबर REG/2016/1380 है। इसके लिए आवेदन 7 सितंबर 2016 को किया गया था, जबकि पंजीयन 8 जनवरी 2024 को प्रदान किया गया।
किसानों के पारंपरिक अधिकारों को मिलेगा संरक्षण
PPV&FRA के तहत पंजीयन होने से स्थानीय कृषक किस्मों को आधिकारिक और कानूनी पहचान मिलती है। साथ ही किसानों द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित पारंपरिक बीजों और उनके कृषि ज्ञान के संरक्षण का आधार मजबूत होता है। ‘चिरपोटी टमाटर’ का पंजीयन स्थानीय बीजों के संरक्षण और कृषि जैव-विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
किसानों से पारंपरिक किस्मों के संरक्षण की अपील
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. ईश्वर सिंह, सहायक संचालक कृषि मनोज सागर, PPV&FRA प्रभारी प्रेमलाल साहू एवं डॉ. दीपिका चंद्रवंशी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र में प्रचलित पारंपरिक कृषि किस्मों और स्थानीय बीजों को संरक्षित करें तथा उन्हें कानूनी पहचान दिलाने के लिए पंजीयन की प्रक्रिया में आगे आएं।
स्थानीय बीजों के संरक्षण की बनी मिसाल
बंसी लाल सोरी का प्रयास यह बताता है कि किसानों द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित पारंपरिक बीज केवल खेती की विरासत नहीं, बल्कि क्षेत्र की जैव-विविधता और पारंपरिक कृषि ज्ञान की पहचान भी हैं। ‘चिरपोटी टमाटर’ को मिली कानूनी पहचान से जहां किसान की वर्षों की मेहनत को सम्मान मिला है, वहीं स्थानीय पारंपरिक किस्मों के संरक्षण की दिशा में अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।
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