PSC पास डॉक्टर ने हाईकोर्ट में उठाया सीनियरिटी का मुद्दा: प्रमोशन में भेदभाव का आरोप, राज्य सरकार और पीएससी से मांगा जवाब - Jabalpur News

Published on 30 जुल॰ 2026

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पदस्थ डॉ. सोमपाल सिंह ने सीनियरिटी और प्रमोशन में भेदभाव का आरोप लगाते हुए एमपी हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने के बाद भी उन्हें नियमितीकरण और पदोन्नति में पीछ

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बुधवार को मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक कुमार सिंह की सिंगल बेंच ने केस को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार, पीएससी व अन्य को नोटिस कर जवाब तलब किया है।

नियमित सेवा की गणना से वरिष्ठता प्रभावित हुई

खंडवा निवासी याचिकाकर्ता डॉ. सोमपाल सिंह ने कोर्ट के समक्ष दावा किया है कि उन्होंने साल 1991 में PSC परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बावजूद विभाग ने उनकी नियमित सेवा की गणना साल 1994 से की। उनका कहना है कि इससे उनकी वरिष्ठता प्रभावित हुई और इसका सीधा असर आगे मिलने वाली पदोन्नति पर पड़ा।

याचिका में डॉ. अविनाश दुबे का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया गया है कि उन्होंने PSC परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी, इसके बावजूद विभाग ने उन्हें उनकी जॉइनिंग की तारीख से यानी वर्ष 1989 से नियमित सेवा का लाभ दिया। डॉ. सोमपाल सिंह का कहना था कि जब समान परिस्थितियों में दूसरे डॉक्टर को साल 1989 से नियमित मानकर वरिष्ठता का लाभ दिया गया तो उन्हें उससे वंचित रखना भेदभाव पूर्ण है।

समानता के आधार पर हो व्यवहार

याचिकाकर्ता डॉ सोमपाल सिंह के मुताबिक सीनियरिटी में आए इसी अंतर का प्रभाव प्रमोशन पर भी पड़ा। याचिका में दावा किया गया है कि डॉ. अविनाश दुबे को वरिष्ठता का लाभ मिलने के कारण साल 2006 में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति मिल गई, जबकि PSC परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद डॉ. सोमपाल सिंह को समान लाभ नहीं दिया गया। इसी कथित विसंगति को चुनौती देते हुए मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा है।

डॉ. सोमपाल सिंह ने विभाग की कार्रवाई को भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 के विपरीत बताया है। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानून के समान संरक्षण की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 16 सरकारी रोजगार के मामलों में अवसर की समानता से संबंधित है। याचिकाकर्ता का दावा है कि समान परिस्थितियों में अलग-अलग व्यवहार किए जाने से उनके इन संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

डॉ. सोमपाल सिंह ने हाईकोर्ट से मांग की है कि उनकी नियमित सेवा भी साल 1989 से मानते हुए वरिष्ठता का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने डॉ. अविनाश दुबे को दिए गए लाभ के अनुरूप वर्ष 2006 से प्रोफेसर पद का लाभ दिए जाने की मांग की है। मामले पर हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता डॉ. सोमपाल सिंह की ओर से अधिवक्ता आयुष प्रजापति ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने सीनियरिटी, नियमितीकरण और प्रमोशन में कथित भेदभाव से जुड़े तथ्यों को अदालत के समक्ष रखा।