Updated: Tuesday, July 14, 2026, 20:00 [IST]
Rahul Gandhi Jantar Mantar Protest: देश की राजनीति में इन दिनों जंतर-मंतर पर चल रहे CJP के प्रोटेस्ट का मुद्दा गरमाया हुआ है। सोनम वांगचुक NEET पेपर लीक और एजुकेशन ट्रांस्पेरेंसी को लेकर लगातार 17वें दिन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
अब तक राजनीतिक रंग से दूर रहे इस प्रदर्शन में धीरे-धीरे AAP, CPI, TMC के नेताओं ने अपनी सॉलिडेरिटी दिखाई है। लेकिन राहुल गांधी उस मंच से कोसों दूर तक कहीं नजर नहीं आ रहे? सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर राहुल गांधी कहां हैं...?
यह सवाल इसलिए भी अहम बन जाता है क्योंकि जिस NEET पेपर लीक, परीक्षा में ट्रांसपेरेंसी और सुधार को लेकर यूथ कांग्रेस महीनों से केंद्र सरकार पर हमलावर है। उसी मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से कांग्रेस की दूरी राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। क्योंकि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सत्ता को जवाबदेह बनाना है।
मुद्दा वही, लेकिन मंच अलग... फिर कांग्रेस की दूरी क्यों?
बता दें कि कांग्रेस लगातार युवाओं का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। लेकिन राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि सिर्फ मुद्दा उठाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसमें खड़े दिखना भी उतना ही जरूरी होता है। यही कारण है कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुकी है।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राहुल गांधी लगातार पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते रहे हैं। उन्होंने कोटा जाकर छात्रों से मुलाकात भी की, कांग्रेस युथ विंग देश भर में 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया। पेपर लिक के बाद से ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई।
यानी मुद्दा वही है, मांग भी लगभग वही है, लेकिन जब हजारों युवा बिना किसी राजनीतिक समर्थन के जंतर-मंतर पर एकजुट हैं, तब राहुल गांधी की गैरमौजूदगी कांग्रेस पर सवाल उठाती है।
राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि कांग्रेस की इस प्रदर्शन से दूरी एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकती है। ऐसे में संभव है कि कांग्रेस किसी दूसरे संगठन के नेतृत्व वाले आंदोलन का हिस्सा बनने से बच रही हो। कांग्रेस का 'छात्रों की गूंज' अभियान इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस अभियान के जरिए पार्टी युवाओं के मुद्दों को भूनाने कोशिश कर रही है।
कांग्रेस की गौरमौजूदगी पर सोनम वांगचुक ने क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में विपक्षी दलों खासतौर पर कांग्रेस की अनुपस्थिति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, युवाओं के इस आंदोलन में शामिल नहीं होता, तो यह उसकी छोटी सोच मानी जाएगी।
वांगचुक ने कहा कि यह मंच किसी राजनीतिक दल का नहीं है। यहां आने का मतलब किसी संगठन का समर्थन करना नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों के साथ खड़ा होना है जिनका भविष्य प्रभावित हुआ है। यदि विपक्ष इस आंदोलन से दूरी बनाए रखता है, तो जनता भविष्य में इसका जवाब दे सकती है।
सवाल सिर्फ राहुल गांधी का नहीं, INDIA गठबंधन की एकजुटता का भी है
सवाल केवल राहुल गांधी की तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि क्या देश के युवाओं से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर विपक्ष एक साझा मंच तैयार कर पाएगा? और क्या सरकार प्रदर्शनकारियों से संवाद शुरू करेगी? सबसे दिलचस्प बात यह है कि AAP, CPI(M), TMC, और अन्य पार्टियों और विपक्षी नेताओं ने CJP को अपना खुला समर्थन दिखाया है।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद सहित कई नेताओं ने आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखाई। यदि विपक्षी दल इस मुद्दे को केवल चुनावी भाषणों तक सीमित रखते हैं और जमीन पर चल रहे आंदोलनों से दूरी बनाए रखते हैं, तो युवाओं का भरोसा कमजोर होगा।विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसी बात की है कि क्या विपक्ष युवाओं के सबसे बड़े आंदोलन पर एकजुट होकर खड़ी हो पाएगी, या फिर हर दल अपनी-अपनी राजनीतिक सीमाओं में ही बंधा रहेगा?