Ranchi : BAU में अत्याधुनिक प्लांट ब्रीडिंग मॉलेक्यूलर लैब शुरू, जलवायु-अनुकूल फसलों पर होगा शोध

Published on 23 जुल॰ 2026

Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) ने अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक फसल सुधार को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक प्लांट ब्रीडिंग मॉलेक्यूलर प्रयोगशाला की स्थापना की है. गुरुवार को कुलपति डॉ. एससी दुबे ने प्रयोगशाला का उद्घाटन किया. यह लैब कृषि, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत फसल किस्मों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

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नई प्रयोगशाला डीएनए निष्कर्षण, मार्कर-असिस्टेड चयन, जीनोटाइपिंग और मॉलेक्यूलर डायग्नोस्टिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है. इसके माध्यम से शोधकर्ताओं और पीजी-पीएचडी छात्रों को अधिक उत्पादन, बेहतर पोषण गुणवत्ता और कीट, रोग और प्रतिकूल जलवायु के प्रति सहनशील फसल किस्मों के विकास में सहायता मिलेगी.


उद्घाटन के अवसर पर कुलपति डॉ. एससी दुबे ने कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. पारंपरिक पादप प्रजनन को मॉलेक्यूलर विज्ञान से जोड़कर नवाचार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों, उद्योग और समाज को लाभ मिलेगा. उन्होंने शिक्षकों से नई तकनीकों को सीखने और गैर-आनुवंशिकी विषयों के शिक्षकों को भी मॉलेक्यूलर अनुसंधान से जुड़ने का आह्वान किया.


विश्वविद्यालय के अनुसार, प्रयोगशाला पूरी तरह संचालित हो चुकी है और इसमें पीजी एवं पीएचडी छात्रों के शोध कार्य शुरू हो गए हैं. यह क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगी तथा सरकारी एजेंसियों, कृषि अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र के साथ सहयोग बढ़ाकर जलवायु-अनुकूल फसल प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रसार में योगदान देगी. प्रयोगशाला का संचालन आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग की अध्यक्ष डॉ. मणिगोपा चक्रवर्ती के मार्गदर्शन में होगा.


प्रयोगशाला में उपलब्ध अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से रोग एवं कीट प्रतिरोधी, सूखा सहनशील, अधिक उत्पादन क्षमता और बेहतर पोषण मूल्य वाली फसल किस्मों के विकास की प्रक्रिया तेज होगी. लाभकारी जीनों की शीघ्र पहचान और पादप आनुवंशिक संसाधनों के त्वरित विश्लेषण से प्रजनन की अवधि और लागत दोनों में कमी आएगी, जिससे टिकाऊ कृषि और बदलती जलवायु परिस्थितियों में खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी.


उद्घाटन समारोह में निदेशक अनुसंधान डॉ. पीके. सिंह और कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. डीके. शाही सहित विश्वविद्यालय के कई अधिकारी और वैज्ञानिक मौजूद रहे.

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