Sep 02, 2026 05:27 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

मुख्य बातें
- आपके बैंक खाते से अचानक पैसे कट जाएं और आपको पता ही न हो कि क्यों? कभी गलत बैंक चार्ज, कभी एक ही पेमेंट का दो बार डेबिट और कभी ऐसा ट्रांजैक्शन जिसे आपने किया ही नहीं
- ऐसे में सिर्फ बैंक को फोन करके चुप बैठ जाना काफी नहीं है

आपके बैंक खाते से अचानक पैसे कट जाएं और आपको पता ही न हो कि क्यों
आपके बैंक खाते से अचानक पैसे कट जाएं और आपको पता ही न हो कि क्यों? कभी गलत बैंक चार्ज, कभी एक ही पेमेंट का दो बार डेबिट और कभी ऐसा ट्रांजैक्शन जिसे आपने किया ही नहीं। ऐसे में सिर्फ बैंक को फोन करके चुप बैठ जाना काफी नहीं है। अगर आप सही तरीके से शिकायत दर्ज करते हैं और समय पर उसे आगे बढ़ाते हैं, तो पैसा वापस पाने का रास्ता मौजूद है।
अनजान ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत करें शिकायत
अगर खाते में ऐसा डिजिटल ट्रांजैक्शन दिखता है जो आपने नहीं किया, तो बैंक को तुरंत आधिकारिक चैनल से इसकी जानकारी दें। आरबीआई के नियमों के तहत कुछ हालातों में ग्राहक की जीरो लाएबिलिटी हो सकती है, खासकर जब बैंक का अलर्ट मिलने के 3 वर्किंग डेज के अंदर अनधिकृत ट्रांजैक्शन की सूचना दे दी जाए। इसलिए अगली बैंक स्टेटमेंट का इंतजार न करें। जैसे ही संदिग्ध डेबिट नजर आए, कार्रवाई शुरू कर दें।
फोन के साथ लिखित शिकायत भी जरूरी
कस्टमर केयर पर शिकायत करना पहला कदम हो सकता है, लेकिन यहीं रुकना सही नहीं है। बैंक के ऐप, वेबसाइट, ईमेल या ब्रांच के जरिए लिखित शिकायत दर्ज करें। शिकायत में ट्रांजैक्शन की तारीख, रकम और यह स्पष्ट करें कि डेबिट क्यों गलत है। साथ ही शिकायत का नंबर, स्क्रीनशॉट्स, ईमेल और बैंक के जवाब सुरक्षित रखें। जहां आरबीआई के अनधिकृत डिजिटल ट्रांजैक्शन वाले नियम लागू होते हैं, वहां बैंक को लागू नियमों के अधीन, सूचना मिलने के 10 वर्किंग डेज के अंदर वो पैसे का प्रॉविजन क्रेडिट देना होता है।
अगर फ्रॉड नहीं, बैंक का गलत चार्ज है तो?
मान लीजिए खाते से कोई अनजान फ्रॉड ट्रांजेक्शन नहीं हुआ, बल्कि बैंक ने गलत तरीके से कोई फीस काट ली, एक ही रकम दो बार डेबिट कर दी या टैरिफ से ज्यादा चार्ज कर दिया। ऐसे मामले में बैंक से पूछें कि चार्ज किस नियम के तहत लगाया गया और उसकी कैलकुलेशन कैसे हुई। अपनी अकाउंट स्टेटमेंट, बैंक की फीस शेड्यूल और जो भी बातचीत हुई उसे संभालकर रखें।
बैंक नहीं सुन रहा तो आरबीआई Ombudsman का रास्ता
पहले बैंक में शिकायत करना जरूरी है। अगर बैंक जवाब नहीं देता या उसका समाधान आपको स्वीकार नहीं है, तो मामला आरबीआई Ombudsman तक ले जाया जा सकता है।
1 जुलाई 2026 से लागू रिजर्व बैंक इंटिग्रेटेड Ombudsman Scheme, 2026 के तहत पात्र ग्राहकों के लिए यह रिड्रेसल मैकेनिज्म मुफ्त है। आम तौर पर बैंक को शिकायत देने के 30 दिन बाद, अगर जवाब नहीं मिला है या मिले जवाब से आप संतुष्ट नहीं हैं, तो आरबीआई के पास शिकायत की जा सकती है। शिकायत आरबीआई के कम्पलेंट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) के जरिए दर्ज की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर आरबीआई हेल्पलाइन 14448 से भी जानकारी ली जा सकती है।
एक गलती बिल्कुल न करें
शिकायत करने के बाद भी खाते पर नजर बनाए रखें। पैसा वास्तव में वापस आया या नहीं, यह चेक करें और जब तक मामला पूरी तरह बंद न हो, सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।